लखनऊ में खुल गयी बंद मुट्ठी, इसलिए मत फंसिए भांडों के भ्रमजाल में

मेरा आवास एयरपोर्ट से 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। जिस मार्ग से ‘महान’ जननेत्री का जुलूस अभी अभी गुज़रा है उसी मार्ग पर मेरा आवास भी है। अतः उस जुलूस को देखकर लौटा हूं।

एयरपोर्ट से 5 किलोमीटर की दूरी तय कर चुके उस ‘महान’ जननेत्री के जुलूस के साथ चल रहा काफिला लगभग 150 मीटर लम्बा था। इस स्थिति ने मुझे भी चौंकाया। क्योंकि यह एक रोड शो/ रैली थी।

इससे लगभग एक घण्टे पूर्व एयरपोर्ट तक चक्कर भी लगा कर आया था। 5 किलोमीटर के उस दायरे में 30-35 स्थानों पर 100-50 के हुजूम के साथ कांग्रेसी नेताओं ने ‘महान’ जननेत्री के अभूतपूर्व ऐतिहासिक स्वागत के लिए अड्डा जमा रखा था।

इनमें से लगभग 90% अड्डों पर स्वागत वाले बैनरों के साथ फलाने-ढिकाने लोकसभा क्षेत्र से पार्टी टिकट की मांग का सांकेतिक सिफारिशी फुटनोट भी चस्पा था।

कानपुर लोकसभा क्षेत्र से टिकट मांग रहे दो अरबपति तथा एक करोड़पति टिकटार्थी, उन्नाव की एक अरबपति टिकटार्थी के साथ आई भीड़ ही इन 35-40 अड्डों की रौनक बढ़ा रही थी।

अब बात न्यूज़ चैनली भांडों की, जो सवेरे से ऐसे चीख चिल्ला रहे हैं मानो लखनऊ में कोई क्रांति हो गयी है। ‘महान’ जननेत्री के जुलूस के आगे-आगे चल रहे एक ट्रक पर बोरों की तरह लदे न्यूज़ चैनलों के कैमरे जुलूस का नज़ारा पीछे से नहीं दिखा रहे हैं। क्योंकि ऐसा करने पर जननेत्री के रोड शो में उमड़े 1000-500 के ‘अभूतपूर्व’ जनसैलाब की सच्चाई सामने आ जाएगी।

उल्लेख बहुत ज़रूरी है कि ‘महान’ जननेत्री का जुलूस जिस 15 किलोमीटर लम्बे मार्ग से गुजरना है उसमें से यही 5 किलोमीटर का दायरा ऐसा था जो 6 लेन चौड़ा है। अतः इसी मार्ग पर किसी भी रोड शो या जुलूस की औकात पता चलती है।

इसके बाद ऐसे बाज़ारों में ‘महान’ जननेत्री के जुलूस का मार्ग रखा गया है जहां 365 दिन लखनऊ की जनता जाम की समस्या से जूझती है।

अतः ‘महान’ जननेत्री के इस ऐतिहासिक जनसैलाब वाले रोड शो/ रैली के सम्बंध में मेरी कसौटी का निष्कर्ष यही है कि… बंद मुट्ठी आज लखनऊ में खुल गयी है, इसलिए न्यूज़ चैनली भांडों के भ्रमजाल में मत फंसिए।

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