लोकसभा चुनाव तक अभी और बढ़ेगी यह बिलबिलाहट

कितना आसान है हिन्दुस्तान में किसी हिन्दू को मार दिया जाना! न कोई हल्ला, न चीख पुकार, न मीडिया का विधवा विलाप, न मानवाधिकार की पुकार, न पुरस्कार वापसी, न असहिष्णुता बढ़ने का खतरा!

क्यों भाई! यह तो सभ्यता की सहज गति है! जैसे विभाजन स्वीकार कर भारतीय उपमहाद्वीप के पाक और बांग्लादेश हिन्दू विहीन होते चले गए वैसे ही एक दिन भारत से भी हिन्दू बहिष्कृत कर दिए जाएंगे! फिर सब ठीक हो जाएगा!

पिछले चार वर्षों में ‘शांतिप्रिय’ समुदाय की बेचैनी बढ़ गई है। वह बेचैनी बिलबिलाहट तक पहुंच गई है।

सोशल मीडिया पर मोदी को खुली गाली। बाहर काफिरों को हराने का खुला आह्वान। कभी किसी मंच से प्रधानमंत्री के सिर कलम करने के नारे, कभी पाकिस्तान ज़िंदाबाद। कभी हैदराबाद से हुआं हुआं, तो कभी बंगाल में बवाल।

और यह सब सिर्फ इसलिए कि न जाने कितने दशकों बाद एक सशक्त हिन्दू-सत्ता के बल से हिन्दू अपने बुनियादी अधिकारों की लड़ाई लड़ने लगा है। वह गो-हत्यारों को सज़ा दे रहा। वह कश्मीर में शैतान आतंकियों को ठोक रहा। वह पाकिस्तान को पांच का पच्चीस समझा रहा। वह सभी आतंकी साज़िशों को नाकाम कर चैन की सांस ले रहा। वह तीन तलाक़ को तौल रहा।

वह एक आततायी औरंगज़ेब के नाम पर बनी सड़क का नाम बदल रहा। इलाहाबाद को मूल नाम प्रयाग कह कर फिर से पुकार रहा। विराट कुंभ का आयोजन कर दुनिया को स्तब्ध कर रहा। जन गण मन और वंदेमातरम, भारत माता की जय गाने, कहने में उसे फिर से गौरव का अनुभव हो रहा।

उसने इतिहास में बर्बर आक्रांताओं से लोहा लेने वाले महावीर हिन्दू सम्राटों को पुनः सम्मान देना शुरू कर दिया है। वह देख रहा कि उसका प्रधानमंत्री माथे पर त्रिपुंड लगाकर गर्व से सिर उठाकर केदारनाथ और विश्वनाथ मंदिर के दर्शन कर रहा।

बस हमारे जीने की आधारभूत शर्त से तुम तड़प उठे। तुम तड़प उठे हो कि आतंक की ट्रेनिंग देने वाले कई मदरसे यूपी में बंद हो गए। बूचड़खाने बंद हो गए। तुम तड़प उठे कि पाकिस्तान को घर में घुसकर मारने वाली घटना पर आधारित एक फिल्म अरबों का व्यापार कर रही। तुम तड़प उठे हो कि कश्मीर के पत्थरबाज़ों को अब बर्दाश्त नहीं किया जा रहा।

इन सबके बीच हमारे कुछ साथी जो वीरता में शिवाजी और राणा से कम नहीं, वे मोदीजी को दिन-रात कोसने में लगे रहते हैं। उन्हें लगता है कि मोदीजी को पचास फुट का भाला लेकर चलना चाहिए। जहां कुछ हिन्दू विरोध हुआ नहीं कि गच्च से भाला भोंक दें मोदी जी।

उनसे कहना चाहता हूं कि जैसे आप किसी हिन्दू के मारे जाने पर कुछ उखाड़ नहीं पाते वैसे ही मोदी जी भी एक विशाल लोकतांत्रिक देश में बीस करोड़ मुसलमानों को अरब सागर में नहीं फेंक सकते। ना ही कोई घटना विशेष को रोक सकते। परंतु हिन्दू सशक्तिकरण के लिए अभूतपूर्व काम तो वे कर ही रहे। यह समय के साथ दिखेगा भी। थोड़ी प्रतीक्षा तो करनी होगी।

हिन्दुओं की अंतिम उम्मीद नरेन्द्र मोदी हैं। इस देश की राजनीति में बीजेपी से इतर कोई पार्टी हिन्दू हित के बारे में सोच ही नहीं सकती। वे सत्ता में आ गए तो सब स्वाहा कर देंगे। मोदीजी रहे तो आपके बेटे पोते भी ढंग से जी लें शायद। वे नहीं रहे और गैंग्स आफ ठगपुर आ गया तो… तो तो तो…

ध्यान रहे! यह बिलबिलाहट 2019 के चुनाव तक अभी और बढ़ेगी। खासकर वहां और जहां राज्य की सत्ता में बीजेपी नहीं है। इसलिए शांत मन से 2019 में एक प्रतिबद्ध हिन्दू हितैषी और कर्मठ, तपस्वी प्रधानमंत्री को पुनः चुनें। जिन हिन्दुओं को मोदीजी से बैर है वे चुप रहने की कृपा करें। उनके बहकावे में आकर अगर पांच लोग भी प्रभावित होते हैं तो बुरा असर होगा। पछताने को भी कुछ बाक़ी न रहेगा।

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