सरकार किसी की भी बने, चुनाव बाद शुरू हो जाएगा श्रीराम मंदिर निर्माण

भारतीय जनता पार्टी के लिए विश्व हिन्दू परिषद के बाद अब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से भी राहत भरी खबर आई है।

सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत ने कहा है कि संघ लोकसभा चुनाव के बाद राम मंदिर निर्माण शुरू कर देगा, चाहे केंद्र में किसी की भी पार्टी की सरकार बने।

उल्लेखनीय है कि इससे एक दिन पहले ही विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने ऐलान किया था कि वह लोकसभा चुनाव तक के लिए राम मंदिर आंदोलन को रोक रहा है।

देहरादून में आयोजित संघ के एक कार्यक्रम के दौरान डॉ भागवत ने राम मंदिर, धार्मिक भेदभाव और जातिगत आरक्षण संबंधी कई मुद्दों पर सवालों के जवाब दिए।

राम मंदिर के मुद्दे पर भागवत ने कहा कि हाल ही में कुंभ मेले हुई ‘धर्म संसद’ के मुताबिक ही मंदिर का निर्माण होगा।

आरक्षण के मुद्दे पर मोहन भागवत ने कहा कि वह इसके साथ हैं, लेकिन वह व्यापक सामाजिक पहुंच के भी पक्षधर हैं।

राम मंदिर मामले पर लोकसभा चुनाव तक शांत होने का वीएचपी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का फैसला भारतीय जनता पार्टी के लिए राहत भरा माना जा रहा है।

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या में गैर-विवादित जमीन रामजन्मभूमि न्यास को लौटाने संबंधी याचिका दायर करके यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह राम मंदिर मामले को लेकर अभी भी संवेदनशील है।

प्रधानमंत्री मोदी भी इस मामले में कह चुके हैं कि जब तक सुप्रीम कोर्ट का फैसला नहीं आ जाता है, तब तक किसी अन्य विकल्प पर विचार नहीं किया जाएगा।

ऐसे में विश्व हिन्दू परिषद और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के इन फैसलों से चुनावी माहौल में भाजपा को थोड़ी राहत मिली है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मीडिया प्रमुख अरुण कुमार ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की याचिका से संत समाज संतुष्ट है। हालांकि उन्होंने कहा कि ‘व्यापक जनजागरूकता के कार्यक्रम चालू रहेंगे।’

इस बारे में आरएसएस के एक अन्य नेता ने कहा, ‘भागवतजी ने कहा है कि चुनाव के बाद कोई भी सरकार सत्ता में आए, संघ धर्मगुरुओं के साथ मिलकर कार्रवाई करेगा।’

आरएसएस नेता ने यह भी कहा कि भागवत ने राम मंदिर निर्माण के लिए कोई तय तारीख तो नहीं बताई है लेकिन यह स्पष्ट किया है कि राम मंदिर और गोरक्षा ही हिंदू संस्कृति के आधार हैं और वे बेहद महत्वपूर्ण हैं।

ध्यातव्य है कि हाल ही में हुई ‘धर्म संसद’ में कहा गया था, ‘जैसे-जैसे चुनाव आ रहा है, छद्म सेक्युलर राजनीतिक ताकतें इकट्ठा हो रही हैं। संत समाज राम जन्मभूमि मुद्दे को राजनीतिक मुद्दे में नहीं बदलने देगा।’

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