अर्थव्यवस्था-2 : बौद्धिक सम्पदा के बाद, अगली लड़ाई Artificial Intelligence को लेकर

पिछली कड़ी में हमने यह चर्चा की थी कि कैसे केवल कुछ ही दशकों में अमेरिका और यूरोप के 25 वर्ष के फ़ुल टाइम वर्कर की आमदनी 75 वर्ष के अपने पितामह (जो कि रिटायरमेंट बेनेफिट पर है) से कम हो गई है।

इसका अर्थ यही हुआ कि बहुत ही जल्दी यूरोप और अमेरिका का मध्य वर्ग सीमित होना प्रारम्भ हो जाएगा।

उन बिन्दुओं पर और अन्दर जाने के पहले यह देखते हैं कि यूरोप या अमेरिका की इकॉनमी तथा इस वैश्विक अर्थ व्यवस्था का नया खिलाड़ी चीन कौन सा खेल, खेल रहे हैं।

जैसा कि आप लोगों को पता ही है कि केवल कुछ दशकों पहले तक दूसरे देश की ज़मीन, संसाधन इत्यादि पर परोक्ष या अपरोक्ष ढंग से क़ब्ज़ा करना ही समृद्धि और वैभव प्राप्त करने का मुख्य ढंग था। और इस कार्य में अमेरिका के पूँजीवादी और स्टैलिन, माओ जैसे वामपन्थी और हिटलर जैसा तानाशाह, सभी एक जैसा ही व्यवहार कर रहे थे।

लेकिन आज ट्रेज़र, ज़मीन और संसाधन में नहीं बल्कि Intellectual property (बौद्धिक सम्पदा) में छिपा हुआ है। और बौद्धिक सम्पदा की चोरी को अमेरिका बहुत गम्भीरता से ले रहा है।

रही बात बौद्धिक सम्पदा की तो, अमेरिका के पास अधिकतर बौद्धिक सम्पदा, यूरोप से ली हुई है और यूरोपियन, पिछले 300 वर्षो से भारत, ब्राज़ील तथा अन्य लैटिन देशों से हर प्रकार की लूट मचाए ही हुए थे। ख़ैर, मुद्दा यहाँ पर यह नहीं है।

अमेरिका को खिसियाहट यह हो रही है कि उसकी इन्टीलेक्चुअल प्रापर्टी जैसे हॉलीवुड का सिनेमा, चीनी मुफ़्त में डाऊनलोड करके देख रहे हैं।

दूसरा, इस Intellectual property war के साथ साथ करेंसी और ट्रेड वॉर, खुलकर चल ही रहा है।

बौद्धिक सम्पदा के बाद, अगली लड़ाई Artificial intelligence (AI) के द्वारा ‘मन’ के नियंत्रण को लेकर होने जा रही है।

अब आप सोचेंगे कि यह कैसे? तो उसका उत्तर आप स्वयं देख लीजिए।

आजकल का नवयुवक, भारत का हो या कहीं का, किसी भी प्रश्न के मन में उठने पर सीधा ‘गूगल’ में सर्च करता है। और यही सब प्रश्न AI के द्वारा, सॉफ़्टवेयर के द्वारा नियंत्रित किए जाएँगे और वह देश सबसे शक्तिशाली समझा जाएगा जो अधिक से अधिक जनसंख्या के मन को नियंत्रित कर सके।

और अर्थ व्यवस्था, बम गोला बारूद से नहीं बल्कि ‘ग्लोबल सबक्रिप्शन मॉडल’ के आधार पर नियंत्रित किया जाएगा। इस मॉडल को ऐसे समझिए, जैसे भारत में आप लोग ‘टाटा स्काई’ को सबस्क्राइब किए हुए हैं, उसी प्रकार ‘नेट फ्लिक्स’, अमेज़न तथा ग्लोबल कम्पनी आपको सबस्क्राइब करनी पड़ेगी।

तो, 1980 के समय तक ज़र जोरू ज़मीन पर आधारित इकॉनमी, पहले कसीनो, फिर ड्रग्स और फिर गिग्स पर गई और ग्लोबल गेम्स की ओर मुड़ रही है।

अगली कड़ी में सेमीकंडक्टर चिप पर एकाधिकार तथा अर्थ व्यवस्था के अन्य वैश्विक कारणों पर चर्चा करेंगे। पहले की बीस-तीस कड़ियाँ, चीन अमेरिका और यूरोप पर ही केंद्रित रहेंगी, उसके बाद भारत का सनातन पक्ष और उसकी विवेचना पर हम मन्थन करेंगे।

क्रमश:…

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