विषैला वामपंथ : नारीवाद, सामाजिकता का ट्रेड-यूनियनिज़्म

हमारी माँगें पूरी हों!चाहे जो मजबूरी हो!! यह नारा हम सबने सुना है, दीवारों पर लिखा देखा है। किसी ने अगर 70-80 का दशक किसी इंडस्ट्रियल टाउनशिप में बिताया हो तो ज़रूर ही सुना होगा। मेरा बचपन ऐसे ही इंडस्ट्रियल टाउन सिंदरी में बीता। पिताजी फ़र्टिलाइज़र फैक्ट्री में काम करते थे। पूरा शहर ही फैक्ट्री … Continue reading विषैला वामपंथ : नारीवाद, सामाजिकता का ट्रेड-यूनियनिज़्म