24 कैरेट का सोना

यह बोलती आंखों वाला 29 वर्षीय युवक, मैकेनिकल इंजीनियर सुमित कुमार (Sumit Kumar) है।

अक्सर मैं हिन्दू युवकों की निष्क्रियता और अय्याशियों वाली आदतों से नाराज़ रहता हूँ… मग़र सुमित कुमार को देखकर हृदय से दुआ ही निकलती है।

रोहिंग्याओं पर मैंने बहुत लिखा है… आंदोलनों में शामिल हुआ हूँ… भाषण दिए हैं… मगर रोहिंग्याओं वाली आपदा से मुझे सुमित ने ही वाकिफ कराया था।

हमने जंतर-मंतर पर धरने दिए… जुलूस निकाले… इन कार्यक्रमों के आयोजनकर्ता सुमित कुमार थे… ‘भारत माता परिवार’ तत्वावधान में। आइये आपको बताते हैं कि सुमित असल में हैं क्या?

सुमित एक हिन्दूरत्न हैं। बढ़िया तनख्वाह वाली नौकरी में थे… दिल की आग ने चैन से सोने नहीं दिया… निकल पड़े…

सबसे पहले रामपुर में बाल्मीकि बस्ती को आज़म खान के कहर के चलते ध्वस्त होने से बचाया… जागरूक किया… लोग मुट्ठी बांध कर खड़े हुए।

मुजेसर-फरीदाबाद की बाल्मीकि सफ़ाई मज़दूरों की झोपड़ियों में महीनों रहे… बच्चों को पढ़ाया… उन्हें साबुन, डिटर्जेंट और फेसवॉश बनाना सिखाया, झोपड़पट्टी में झोपड़पट्टी वालों की तरह रहे… वही खाया-पिया, जो गरीब खाते थे…

अंतत: सैकड़ों धर्म परिवर्तित हिंदुओं की घर वापसी करायी… कार्य पूरा होने पर भी आज भी उन गरीब लोगों से जुड़े हैं… किताबें, कपड़े और जूते बांटते हैं… हमारे वन-मैन-आर्मी सुमित कुमार!

जब सुमित ने नौकरी छोड़ी तो कुछ ही दिन ठीक चला… अपनी तनख्वाह गरीब हिंदुओं-मज़दूरों में खर्च करने वाले सुमित अब अपनी आजीविका के लिए इंजीनियरिंग विषयों पर कंटेंट राइटिंग कर अपना पेट तो भरते हैं, शेष 80 % हिंदुत्व सेवा पर… अनेक गरीबों की सहायता करते हैं।

आजकल झारखंड के उन इलाकों में कार्य कर रहे हैं… जहां नक्सलियों और माओवादियों का दबदबा है। ईसाई मिशनरियों के प्रचार और धनशक्ति का सामना अपने पुराने हथियार फ्री शिक्षा, सफाई और किताबें, जूते-चप्पल बांट कर रहे हैं। एक बार नक्सलियों ने सुमित की जीप पर फायरिंग भी झोंक दी… बाल-बाल बचे।

कल जब सुमित कुमार मुझे करोलबाग में मिले… मैंने पूछा कि यह जज़्बा तुम्हें मिला कहाँ से? हिंदुत्व और देश बचाने की मुहिम के लिए जान लड़ाने वाला, 22 लड़कियों को जेहादी पंजों से बचाने वाला!…

सुमित का जवाब मेरी आँखें खोलने वाला था। सुमित ने बताया कि उन्होंने ईसाइयों के NGO की कार्यशैली को नजदीक देखा… पाया कि यह लोग दबे-कुचलों में एकाकार हो जाते हैं… बाद में प्रभु यीशु की प्रशंसा, चित्रों औऱ सेवा कार्यों को देखते हुए अनेक आदिवासी और गरीब हिन्दू स्वयं ही ईसाई बनने की इच्छा प्रकट कर देते हैं।

सुमित ने जानी मानी हिन्दू-विरोधी शबनम हाशमी के NGO के ट्रस्ट ‘अनहद’ में भी कार्य किया है, जिसमें जावेद अख्तर, शबाना आज़मी और तीस्ता सीतलवाड़ भी काम करते हैं…

सुमित का मानना है कि यह ट्रस्ट हिन्दुओं की दरारों, जाति विभाजन और ऊंच-नीच पर बहुत अनुसंधान करते हैं। हिंदुओं को हिंदुओं के विरुद्ध खड़ा करने में इन्हें महारथ हांसिल है। शबनम हाशमी की NGO ‘अनहद’ सर्वाधिक कार्य दलितों के बीच कर रही है… परिणति धर्मपरिवर्तन पर ही होती है। मज़े की बात यह है मुस्लिमों के ट्रस्ट हिंदुओं से ही धन की उगाही करते हैं!

सुमित से मिलकर दिल खुश हो गया… सुमित को बस एक दर्द हैं कि उसकी मां उसके इस तरह जान हथेली पर लिए पूरे देश मे घूमने से दुखी रहती हैं।

सुमित ने अपना बैग खोला… बैग से एक डिब्बा निकाला…. डिब्बे में सुमित के हाथ का बना गाजर का हलवा था। पार्क में फैली गुनगुनी धूप में बैठकर हमने हलवा खाया… सुमित को एक बार फिर आशीर्वाद दिया… सुमित बढ़ चले.. हजारीबाग की अपनी ट्रेन पकड़ने।

शुक्रिया सुमित…. मेरी प्रेरणा बनने के लिए।

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY