…तो ये भी नोटबंदी की सफलता ही है

नरेंद्र मोदी की नोटबंदी से क्या फायदा-नुकसान हुआ, ये मेरी समझ के बाहर की चीज़ है, क्योंकि मैं न तो रघुराम राजन हूँ, न राहुल गांधी और न सोशल मीडिया का ‘सर्व विषय विशेषज्ञ’।

मेरे लिए इतना एक फायदा भी काफी है कि 500 और हज़ार के नकली नोट मिलने की जो खबरें पहले लगभग हर रोज़ सुनाई देती थीं, वो 8 नवंबर 2016 के बाद से मैंने एक भी नहीं सुनी।

उससे पहले लगभग रोज़ खबर आती थी कि कभी बैंक में, कभी एटीएम में, कभी पेट्रोल पंप पर, तो कभी बाज़ार में नकली नोट मिलते थे।

कई आम लोग इस कारण बहुत परेशान होते थे क्योंकि गलती से कहीं नकली नोट अपनी जेब में आ गया तो उसको चलाना मुश्किल था और बैंक में साबित करना भी असंभव था।

उन दिनों लगभग हर जगह 500 या 1000 के नोटों में भुगतान करने वाले हर व्यक्ति से एक कागज़ पर ऐसे सारे नोटों के नंबर लिखवाए जाते थे। ये सब झमेले आप भूल गए होंगे, लेकिन मैं नहीं भूला हूँ।

ये सारी चीजें अब बंद हो गई हैं, नकली नोट छापने वाले बेकार हो गए हैं, भारत की अर्थव्यवस्था में जो दीमक लग रही थी, उसका बहुत बड़ा हिस्सा अब साफ़ हो चुका है। मेरी नज़र में ये कोई कम बड़ी उपलब्धि नहीं है।

कुछ नमूने बता रहे थे कि 500 और हज़ार के जितने नोट रिज़र्व बैंक ने पहले छापे थे, वे सब नोटबंदी के बाद वापस आ गए, इसका मतलब वो सारा ऑपरेशन फेल हो गया।

उनको इतनी भी समझ नहीं है कि रिज़र्व बैंक ने जो नोट छापे थे, बाज़ार में सिर्फ उतने ही नोट नहीं चल रहे थे, और न वो नोटबंदी उन नोटों के खिलाफ थी।

रिज़र्व बैंक के अलावा जो गैरकानूनी तरीके से नकली नोट बाहर से छपकर आते थे और धड़ल्ले से बाज़ार में चल रहे थे, नोटबंदी उनके खिलाफ थी।

ये कॉमन सेन्स की बात है कि उसके बाद जब पुराने नोट देकर नए बदलवाने की बारी आई, तो कोई गधा ही नकली नोट जमा करवाने बैंक आता। इसलिए वो नोट रिकॉर्ड में आ भी नहीं सकते थे और आने भी नहीं वाले थे।

ज़रूरी बात ये है कि जितने असली नोट थे, वे सब वापस बैंक में आए और जितने नकली नोट थे वे सब चलन से रातोंरात बाहर हो गए। ये मोदी के नोटबैन की सफलता है, विफलता नहीं।

बेशक बहुत से आम लोगों को शुरू में तकलीफ भी हुई थी। लेकिन आज कोई ये नहीं कह सकता कि भारत में नोटों की कमी है या लेनदेन नहीं हो रहे हैं। हां, दो नंबर वाले ट्रांज़ेक्शन नहीं हो पा रहे हैं, और वो होने भी नहीं चाहिए। अगर नहीं हो रहे हैं, तो ये भी नोटबंदी की सफलता ही है।

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