खून से सने हैं HAL और काँग्रेस के हाथ

दो दिन पहले देश को दो ट्रेंड एयरफोर्स अफसर मिराज उड़ाते हुए दुर्घटना के शिकार हुए।‌ हमारे देश के लिए यह बहुत साधारण बात है। हादसे तो होते ही रहते हैं। कोई कार चलाते हुए हादसे में मारा जाता है, कोई विमान उड़ाते हुए ज़मींदोज़ हो जाता है।

ध्यान रहे कि वे दोनों वेल ट्रेंड अफसर थे। दिल्ली की सड़क पर दारू पीकर गड्डी चलाने वाले गूलर पहलवान नहीं। युद्ध और आपदा के क्षण में वे देश की रक्षा करने में सहाय होते। दुश्मन की धरती पर गोले बरसा कर लौटने वाले वीर साबित होते।

पर… उन्हें तो एक पुराना जहाज़ उड़ाते हुए मर जाना था। यही हमारी सरकारों ने दशकों की सत्ता में उन्हें सौंपा है। सड़ियल, खतरनाक पुराने विमान। नया कुछ खरीदा भी तो सबकुछ फाइनल करते करते उसे पुराना कर दिया या दलालों को खिला दिया।

काँग्रेस ने इन छह सात दशकों में रक्षातंत्र को मज़बूत करने के नाम पर दलालों को पाला पोसा। खुद खाया, उनके पेट भरे और भारतीय सेना को अनगिनत नुकसान पहुंचाए। बरसों बरस पुराने विमान उड़ाने को अभिशप्त हमारे युवा फौजी मरते रहे पर इन हत्यारों ने कुछ नहीं किया। आज भी जब राफ़ेल खरीदा जा रहा तो ये चोर शोर मचा रहे। कितना पतित हो सकता है कोई ! छि: कल्पना से परे है यह सब सोचना।

HAL की असलियत यह है कि वहां इस पुराने मिराज़ को दुरुस्त किया गया था। जो कि उड़ने के साथ ही नाकाम हो गया और एक क्षण के सौवें हिस्से से भी कम समय में खेल खत्म हुआ।

ये संस्था यूनियनबाज़ी का अड्डा है। मेरे एक जान पहचान के बंधु वहां कार्यरत हैं‌। उन्होंने आज से करीब दस साल पहले मुझे एक किस्सा सुनाया था।

एचएएल में बने एक हेलीकॉप्टर की परीक्षण उड़ान से पहले दो गुट के इंजीनियर्स में अनबन हो गई। तय समय पर उड़ान के लिए तैयार खड़े हेलीकॉप्टर को स्टार्ट करने की सारी कोशिशें बेकार हो गईं। जिन लोगों ने इस हेलीकॉप्टर को तैयार किया था उनके हाथ पांव फूले हुए थे।

दूसरे दिन पता चला कि फ्यूल टैंक में कुछ मिलावट कर दी गई है। यूनियनबाज़ों ने छोटे से स्वार्थ के लिए देश की सुरक्षा और सालों की मेहनत को बर्बाद करने में रत्ती भर विचार नहीं किया। ये काँग्रेसी, वामी संस्कृति का चरित्र है।

ऐसे लोग और इतनी निकम्मी हत्यारी सरकारों के बूते देश के फ़ौजी भला कब तक सुरक्षित हैं। ये तो अपने हित और सत्ता के लिए देश को ही गिरवी रख सकते हैं। दो युवा पायलट मारे गए तो क्या हुआ!

सेना को दुरुस्त करने के काम में मोदी सरकार जुटी हुई है। लोगों को फौजियों के बहुमूल्य जीवन का सम्मान करना चाहिए। वो शहीद होने के लिए नहीं आए हैं। उन्हें भी जीने का अधिकार है। उनके भी माता पिता, पत्नी, बच्चे, भाई बंधु हैं। उन्हें सत्तर के दशक का जहाज़ उड़ाने के लिए बाध्य न करो! यह उनके समय के साथ उड़ने का वक्त है! उनके हिस्से में भी दुनिया के आधुनिकतम विमान होना चाहिए!

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