रक्षा बजट : यह केवल कड़ी निंदा करनेवाला नहीं, महाशक्ति भारत है

6000 सालाना, 500 महीना, 17 रू प्रतिदिन से किसानों का क्या होगा? – राहुल गांधी

यह बजट चुनावी है, इसे लागू अगली सरकार करेगी क्या गारंटी है कि आनेवाली यह बजट लागू कर ही देगी? – ममता बनर्जी, कुमारस्वामी आदि आदि…

पहली बात सरकार किसानों को एक वर्ष में तीन बार 2-2 हजार की राशि सहयोग करेगी इसका मतलब यह है कि हर फसल के पूर्व 2-2 हजार।
राहुल गांधी को “एक मन बीज या एक बोरी खाद” की कीमत नहीं पता, फसलों के मौसम की जानकारी नहीं उसे क्या मालूम कि बुआई कटाई के समय जो हजार की कीमत है?

दूसरी बात, इस देश में सरकारें चुनाव के माध्यम से ही बनती है फिर कौन सी सरकार आगामी चुनाव की चिंता नहीं करेगी?
यह घिसा पिटा बयान भी कम्युनिस्ट विचारधारा की तरह अब आउटडेटेड हो चुका है। अब इसकी कोई उपयोगिता नहीं।

आइए इस बजट की घोषणा और व्यवहारिक स्तर पर लाभ पर विचार करें।

पहले जब गरीब या सीमांत किसानों के लिए कोई घोषणा होती थी तब आधी से अधिक रकम दलाल, सरकारी बाबू-अफसर ले उड़ते थे।
लेकिन अब हर किसी का बैंक में खाता है और सरकार यह सुनिश्चित कर चुकी है कि अनुदान या राहत की रकम सीधे लाभुक के खाते में जाना है।

स्वतंत्र भारत में पहली बार इस बजट के माध्यम से असंगठित मजदूरों की चिंता की गई है, जो किसी पूर्ववर्ती सरकारों ने नहीं की थी।
जीवन भर देश के विकास में योगदान देनेवाले असंगठित एवं ठेका मजदूर जीवन के चौथेपन में असुरक्षित हो जाते थे, 3000 मासिक पेंशन उनके लिए वरदान से कम नहीं है।

स्वतंत्र भारत का सबसे बड़ा रक्षा बजट दर्शाता है कि यह केवल कड़ी निंदा करनेवाला नहीं महाशक्ति भारत है।

गैस सिलेंडर बिना सब्सिडी 750 में मिल रहा है 5 लाख कर रहित आमदनी और छूट लेकर 7.5 लाख तक कर रहित आमदनी मध्यवर्ग के लिए सौगात है तथा यह समृद्ध भारत का संदेश है।

विपक्ष घिसे पिटे बसानों से इतर अबतक सार्थक विरोध नहीं कर पा रहा है।

अपने जीवन में इतना शानदार बजट मैंने पहली बार देखा, थैंक यू मोदी जी।

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