…यदि मोदी को दुबारा चुनते हैं तब…

जब से बजट आया है तब से ही मैं यह सोच रहा हूँ कि न तो मैं 60 वर्ष का वृद्ध मजदूर हूँ, न ही 5 एकड़ से कम की भूमि का स्वामी हूँ और न ही मैं नौकरी-पेशा व्यक्ति हूँ जो 5 लाख तक टैक्स फ्री हो गया तो मैं ये मान लूँ की मोदिया ने जो लाभ दिया उसपर मेरा मालिकाना हक बन गया !

लेकिन मेरे आसपास जो लोग निवास करते हैं , उनकी आँखों में एक उत्साह है ।

मेरी आँखों में वही खुशी है जो एक Sugar के रोगी के पास होती है, जो खुद न खाने वाली मिठाईयों को बाजार से pack करवाकर घर ले जाता है…. उनके लिये जो मिठाईयां खा सकें और पचायें भी !

जिन लोगों को लाभ नहीं मिल पाया वह लोग सोचें कि हमने अपने आसपास के जरूरतमंदों को Give it up किया है ! याद है ?? हमारे आपके Give it up करने से न जाने कितने करोड़ गरीब लोगों के चूल्हे जल रहे हैं… तो फिर यही खुशी क्या कम है ?

किसका शेर है मुझे पता नहीं ? लेकिन इन पंक्तियों को लिखते ही यह मुझे याद आ गया..

बदल जाओ वक्त के साथ

या फिर वक्त बदलना सीखो

मजबूरियों को मत कोसो

हर हाल में चलना सीखो ।

और हाँ.. यह छूट और लाभ का पैसा किसी राजनेता के Swiss bank में नहीं जाएगा, मॉरीशस और दुबई की shell कम्पनियों में चोर दरवाजे से नहीं invest होगा बल्कि हमारे भारत की अर्थव्यवस्था में घूमेगा.. दौड़ेगा , Grow करेगा और उन देशों से हाड़-तोड़ लड़ाई करेगा जो अर्थव्यवस्था में 1 से लेकर 5वें पायदान तक खड़े हैं ।

2022 तक भारत की अर्थव्यवस्था लगभग 4 ट्रिलियन डॉलर के आसपास की होगी यदि मोदी को दुबारा चुनते हैं तब ।

नहीं तो.. जय जय सियाराम !

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