बजट 2019 : हमें तो एक बार फिर 15 लाख मिल गए हों जैसे

कांग्रेस के लोग ताना मारते फिरते हैं कि ‘मोदी ने खातों में 15-15 लाख नहीं दिए जैसा कहा था’ (जबकि ये कभी कहा ही नहीं)… मगर उन नालायकों को मालूम नहीं मोदी कितनी बार 15 लाख दे चुके हैं।

बस समझने वाली बात है –

मुझे तो आज का बजट देख कर लगा एक बार फिर 15 लाख मिल गए। इसके पहले हाल ही में 15 लाख तब मिले जब 10% आरक्षण गरीबों को दिया और तब भी मिले जब राम मंदिर के लिए सुप्रीम कोर्ट से ज़मीन मांग कर सारे विपक्ष की बोलती बंद कर दी।

मिडिल क्लास और वेतनभोगी कर्मचारी वर्ग की 5 लाख की इनकम को टैक्स से मुक्त कर सरकार ने बहुत मजबूत कदम उठाया है।

ये भाजपा का खुद का बहुत पुराना सपना था! फिक्स डिपॉज़िट पर ब्याज से छूट 10 से 40 हज़ार करना, स्टैण्डर्ड डिडक्शन 40 से 50 हज़ार करना, और अन्य बहुत से बजट के प्रावधान देश की आर्थिक गतिविधियों और बचत को बढ़ावा देंगी।

छोटे किसानों को 6000 रुपये सालाना देने के फैसले से 12 करोड़ किसान को फायदा होगा। इसके अलावा मछली, पशुपालन करने वाले किसानों के बैंक के ब्याज में 2% की छूट और घुमन्तु समुदाय के लिए कल्याण बोर्ड का बनाना ये साबित करता है कि जैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके घरों में घुस कर उनके दर्द का खुद अनुभव किया है।

नरेंद्र मोदी ने ईमानदारी से टैक्स देने वालों को सही मायने में पुरस्कृत किया है। क्योंकि वो बार-बार कहते हैं कि टैक्स देने वालों को अब ये विश्वास है कि उनका पैसा सही जगह पर प्रयोग हो रहा है, इसलिए लोगों की भी जिम्मेदारी बनती है कि वो सरकार को टैक्स देना जारी रखें जिससे सरकार अपनी योजनाओं को अमली जामा पहना सके।

देश की रक्षा करने वाली सेनाओं के लिए 26000 करोड़ बढ़ा कर रक्षा बजट 3 लाख करोड़ से ज्यादा कर मोदी जी ने उन्हें सैल्यूट किया है। वो देश की रक्षा करते हैं तो मोदी जी ने उन्हें आश्वस्त किया है कि वो आपके पीछे खड़े हैं।

कमी तो बजट में कोई भी निकाल सकता है। राहुल गाँधी ने कह ही दिया कि किसानों को केवल 17 रुपये रोज़ के दिए गए हैं जो बहुत कम हैं! भाई, तुमने क्या किया था ज़रा ये भी बताओ।

एक सज्जन किसी चैनल पर कह रहे थे कि 10% आरक्षण में तो 8 लाख कमाई वाले गरीब होते हैं तो आयकर छूट की सीमा 8 लाख होनी चाहिए थी।

लोगों को बस बोलने से मतलब है। जब कांग्रेस सरकार ने OBC की Creamy Layer के लिए आय की सीमा 6 लाख की थी तब आयकर छूट तो 6 लाख नहीं की थी। इस सीमा का आयकर छूट से कोई लेना देना नहीं होता क्यूंकि ये सीमा पारिवारिक आय होती है जबकि आयकर एक व्यक्ति के लिए होता है।

कुल मिला कर सरकार ने ऐसा बजट दिया है जो बहुजन हिताय बहुजन सुखाय साबित होगा। राष्ट्रपति के अभिभाषण में साफ़ झलकता था कि पिछले साढ़े चार साल में समाज का कोई ऐसा हिस्सा नहीं है जिसके लिए सरकार ने ठोस कार्य ना किये हों।

और ये केवल नरेंद्र मोदी की सोच की वजह से हुआ है। मगर फिर भी विपक्ष का ‘एक सूत्रीय प्रोग्राम’ है – मोदी को हटाओ… कैसे हटाओगे? ये मोदी है जिसका पैर अंगद का पैर है, और 130 करोड़ जनता की ताकत से ज़मीन पर टिका है।

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