मोदी का मायाज़ाल, लुटियन दलाल बेहाल

बीती 26 जनवरी को एयर इंडिया के एक बोइंग जेट विमान ने कैरेबियन द्वीप के लिए उड़ान भरी थी।

आश्चर्यजनक रूप से लगभग 350 यात्रियों की क्षमता वाले इस विमान में केवल 24-25 यात्री सवार थे। यह सभी यात्री भारतीय जांच एजेंसियों के अधिकारियों की एक टीम के सदस्य थे।

उस विमान की दिल्ली से कैरेबियन द्वीप समूह के लिए रवानगी भी उस विमान की कोई नियमित उड़ान नहीं थी।

सुनियोजित तरीके से यह खबर आधी अधूरी जानकारी के साथ कुछ न्यूज एजेंसियों को लीक भी कर दी गयी थी। साथ में यह भी संकेत दिया गया था कि अपना कार्य पूरा करके यह टीम सम्भवतः 29 जनवरी तक वापस आएगी।

परिणामस्वरूप देश और दुनिया की निगाहें कैरेबियन द्वीप समूह, विशेषकर एंटीगुआ आइलैंड पर टिक गयी थी। लुटियनिया (Lutyen’s) दलाल कार्रवाई का हल्ला मचाकर भगोड़ों को अलर्ट करने में जुट गए थे। भगोड़ा चौकसी बयानबाज़ी भी करने लगा था।

लेकिन जिस समय पूरी दुनिया की जांच एवं गुप्तचर एजेंसियों के साथ ही साथ लुटियनिया दलालों की निगाहें कैरेबियन द्वीप पर गड़ी हुईं थीं उस समय वहां से लगभग 12000 किलोमीटर दूर दुबई की धरती पर भारतीय जांच एजेंसियों की टीम अपना जाल बिछा रही थीं।

उनके उस जाल में हज़ारों करोड़ के रक्षा सौदे कराने वाले हथियार दलाल दीपक तलवार और राजीव सक्सेना आराम से फंस गए थे। जिन्हें लेकर भारतीय जांच एजेंसियों की टीम 30 जनवरी की रात भारत के लिए रवाना हो गयी थी।

26 जनवरी को कैरेबियन द्वीप समूह के लिए जिस विमान ने उड़ान भरी थी क्या वो वहां पहुंचा था? या आकाश में ही अपना रास्ता बदलकर वो दुबई पहुंच गया था?

ये सवाल अनुत्तरित ही हैं और सम्भवतः अनुत्तरित ही रहेंगे। लेकिन पूरी ताकत से बायां हाथ लहराने के बाद अचानक दाएं हाथ से थप्पड़ मारकर सामने वाले को बुरी तरह चौंका देने की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की यह रणनीतिक शैली है लाजवाब। मोदी की इस रणनीति के थप्पड़ से लुटियनिया दलालों का मुंह लगातार लाल होता रहा है।

लगभग ढाई वर्ष पूर्व उड़ी में सेना के कैम्प पर हुए हमले के बाद भी मोदी सरकार ने अपने शत्रु पाकिस्तान पर इसी तरह प्रहार कर के उसे चौंकाया था और चित्त कर दिया था।

याद करिए कि उड़ी में सेना के कैम्प पर हुए हमले के बाद पाकिस्तान का पानी काट देने की चर्चा ज़ोर शोर से शुरू हो गयी थी। जल संसाधन मंत्री समेत जल संसाधन मंत्रालय तथा अन्य सम्बन्धित विभागों के वरिष्ठ नौकरशाहों के साथ प्रधानमंत्री, रक्षामंत्री, विदेशमंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की ताबड़तोड़ बैठकें दिल्ली के नॉर्थ और साउथ ब्लॉक में होने लगी थी।

5-6 दिन में ऐसा समां बन गया था मानो अगले कुछ ही दिनों में पाकिस्तान का पानी रोक दिया जाएगा। हालांकि थोड़ी सी भी तकनीकी जानकारी रखने वाला व्यक्ति यह समझ सकता था कि पाकिस्तान का पानी रोके जाने पर उस पानी का भारतीय सीमा के भीतर ही निस्तारण करने की समुचित व्यवस्था किए बिना पाकिस्तान जानेवाले पानी को स्थायी रूप से रोका जाना सम्भव ही नहीं।

ऐसी किसी व्यवस्था को करने में कम से कम दो से ढाई वर्ष का समय लगेगा ही लगेगा। लेकिन उस समय मोदी सरकार द्वारा पाकिस्तान को जा रहे पानी को रोके जाने का समां इतने शातिर और सधे हुए अंदाज़ में बनाया गया था कि पाकिस्तान में भी हड़कम्प मच गया था। वहां के न्यूज़ चैनलों में इस बात पर घण्टों बहस होने लगी थी कि भारत द्वारा पाकिस्तान का पानी रोके जाने के क्या और कैसे परिणाम होंगे।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपरोक्त प्रकरण ज़बरदस्त चर्चा का विषय बन गया था। ऐसे किसी भी भारतीय निर्णय के अच्छे बुरे भावी परिणामों की अटकलों अनुमानों का बाज़ार गर्म होकर जब अपने चरम पर पहुंच चुका था…

तब ही 28 सितम्बर की सुबह भारतीय सेना के DGMO ने आकस्मिक पत्रकार वार्ता बुलाकर यह ऐलान कर के देश के साथ साथ दुनिया को भी चौंका दिया था कि बीती रात हमारी सेना के कमांडों जवानों ने पाकिस्तानी सीमा के भीतर घुसकर 250 किमी के दायरे में स्थित आतंकी अड्डों पर हमला कर उन अड्डों को नेस्तनाबूद कर के भारी संख्या में आतंकवदियों को मौत के घाट उतार के उड़ी हमले का बदला ले लिया है।

दरअसल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की यह रणनीतिक मुद्रा अत्यन्त विशिष्ट है। प्रधानमंत्री मोदी अपना बायां हाथ लहराते झुलाते हुए अपने दाएं हाथ से झन्नाटेदार थप्पड़ अचानक और कब मार देंगे इसका पता थप्पड़ मारे जाने के बाद ही लगता है।

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