बोलो जुबां केसरी : Buudha In A Traffic Jam

एक प्रोफेसर अपनी कक्षा में भाषण देता है “करप्शन इस देश के लिए लाभदायक और ज़रूरी है!” वह अपने तर्क के आधार पर इसे सिद्ध भी कर देता है।

छात्रों में से जो सबसे ज़्यादा प्रभावी विरोध करता है, जिसका नाम विक्रम है और वह सोशल मीडिया में पिंक ब्रा जैसी सफल कैम्पेनिंग चला चुका है, उसे प्रोफेसर अपनी ऑफिस में अलग से मिलने को कहता है।

इस छात्र को एक नोटबुक देता है और कहता है “इन नोट्स को मैंने अपनी जवानी के दिनों में लिखा था। यह समाजवाद के बारे में है। तुम चाहो तो इसे अपने नाम से सोशल मीडिया पर प्रचारित कर सकते हो।” पर ध्यान रहे, यह एक सीक्रेट game का पार्ट है।

इतना ही नहीं, वह प्रोफेसर कैम्पस में ही एक पॉटर क्लब भी चलाता है, अपनी पत्नी के नाम से चलने वाले इस NGO के गहरे निहितार्थ होते हैं। इसमें मिट्टी की कलाकृतियों को सीधे ही सरकार को बेचने की सेटिंग होती है।

इस तरह से सरकार से भारी धनराशि उसे नियमित रूप से मिलती रहती है, जिसे वह चैरिटी के नाम पर नक्सलियों को भेजता है। जो राशि कम पड़ती है, उसके लिए अपने छात्रों को चंदा माँगने के लिए लगाया जाता है।

अपने छात्रों को व्यस्त रखने के लिए वह दोस्ती का माहौल बनाये रखता है। चेले चेलियों को परस्पर सेक्स, शराब, खुलेपन, विद्रोह, क्रांति आदि के लिए प्रोत्साहित करता है, और कई छद्म लेडी कॉमरेड को भी इस्तेमाल करता है। यहाँ तक कि उसकी पत्नी भी इन छात्रों के साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाने में हिचकती नहीं।

अचानक से 2014 में चैरिटी के नाम पर सरकारी और विदेशी फंड से चलने वाले NGO की निगरानी शुरू हो जाती है। फंडिंग में प्रॉब्लम आने लगती है। धन के अभाव में शहरी और अर्बन नक्सलियों के बीच अंतर्विरोध बढ़ जाते हैं। इस द्वंद्व में उनकी पोल खुल जाती है और उनके साथी पकड़े जाते हैं। कई मारे भी जाते हैं।

Buddha in a traffic jam नाम से बनी यह फ़िल्म यूट्यूब पर सहज उपलब्ध है। विवेक अग्निहोत्री को इसके लिए निश्चित ही धन्यवाद देना चाहिए।

अनुपम खेर अभिनीत, जबरदस्त कथानक, वामपंथी शैली में, उन्हीं को जवाब देती यह फ़िल्म हरेक व्यक्ति, छात्र, शिक्षक और महाविद्यालय में पढ़ने वाले को अवश्य देखनी चाहिए।

मैं गारण्टी देता हूँ, इसे देखते समय आप एक सेकंड भी चूकना नहीं चाहेंगे। बता दूँ कि ndtv और तमाम वामपंथियों ने सेंसरबोर्ड पर काफी दबाव बनाया था कि यह फ़िल्म प्रदर्शित न हो।

फिलहाल यदि कोई काम नहीं है, आपका स्वभाव भी बुद्धिविलास का है, फेसबुक से बोर हो गये हैं, कुछ नया देखना चाहते हैं, अर्बन नक्सल और वामपंथ को समझना चाहते हैं, jnu जैसे उत्पादों की झलक देखनी है, और 2 घण्टे का समय है तो इसे जरूर देखें और अपने अनुभव शेयर करें।

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