जॉर्ज को राहुल ने क्यूँ दी श्रद्धांजलि?

आज राहुल गाँधी ने जॉर्ज फर्नांडिस को श्रद्धांजलि क्यूँ दी? जबकि काँग्रेस उन्हें कथित ताबूत घोटाले के नाम पर जलील करती रही।

आज जॉर्ज फर्नांडिस का 88 वर्ष की आयु में लम्बी बीमारी के बाद निधन हो गया। मज़दूर नेता से ले कर सफल मंत्री के रूप में जॉर्ज साहब ने अपनी छाप छोड़ी।

प्रधान मंत्री समेत अनेक लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है और देनी भी चाहिए। मैं भी जॉर्ज
साहब को नमन करता हूँ।

मगर आज राहुल गाँधी की जॉर्ज को श्रद्धांजलि देने वाले ट्वीट को देख कर मुझे ताज्जुब हुआ। राहुल गांधी भूल गए कि काँग्रेस ने जॉर्ज को कारगिल के कथित ताबूत और अन्य रक्षा सौदों में किस तरह जलील किया था!

काँग्रेस ने आधिकारिक तौर पर अटल जी और जॉर्ज पर घोटाले में लिप्त होने के आरोप लगाए और पूरे 2 वर्ष से ज्यादा संसद में जॉर्ज का बहिष्कार किया।

जब जॉर्ज संसद में आते थे तो काँग्रेस सांसद पहले तो उनके खिलाफ नारे लगाते और फिर उसके बाद उनका बहिष्कार करने के लिए संसद से ही चले जाते थे।

2004 में काँग्रेस की सरकार बनने के बाद तत्कालीन रक्षा मंत्री प्रणब मुख़र्जी ने जॉर्ज साहब को क्लीन चिट दे दी जिसकी वजह से सोनिया गाँधी ने प्रणब दा की #$ की @# फेर दी।

सोनिया के कहने पर अहमद पटेल से प्रणब दा को अपने बयान पर स्पष्टीकरण देने की हिदायत दी मगर तब तक नुकसान हो चुका था। तत्कालीन कानून मंत्री हंसराज भारद्वाज ने भी प्रणब दा पर आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट में दिया जाने वाला वकालतनामा उनके मंत्रालय ने अनुमोदित कर दिया था मगर प्रणब ने बदल दिया।

सुप्रीम कोर्ट में किसी धनंजय कुमार ने जनहित याचिका लगा कर जॉर्ज और अन्य के खिलाफ 24 हज़ार करोड़ के घोटाले करने का आरोप लगाया।

सीबीआई ने भी आरोप पत्र दायर किया, मगर ट्रायल कोर्ट ने आरोप सिद्ध नहीं पाए। सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि आरोपियों के खिलाफ 24 हज़ार करोड़ के लेनदेन के कोई सबूत नहीं मिले और उन्हें ट्रायल कोर्ट 2013 में डिस्चार्ज कर चुका है।

13 अक्टूबर 2015 की हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस टी एस ठाकुर की बेंच ने जनहित याचिका खारिज कर दी… और इस तरह जॉर्ज फर्नांडिस काँग्रेस के षड्यंत्र के तहत लगाए गए आरोपों से मुक्त हो गए। मगर उनके जीते जी काँग्रेस ने उनका जीवन नरक बना दिया।

मजे की बात है वी के शुंगलू (जिन्हें इस वर्ष पद्म भूषण मिला है) उस समय CAG थे (1996 से 2002) और उन्होंने भी इस कथित घोटाले की रिपोर्ट दी थी जो एक तरह से सही नहीं पाई गई।

सीबीआई के बारे में तो आप समझ ही सकते हैं कि क्या किया होगा। एक व्यक्ति और उसके साथ कई अन्य को 12 -14 वर्ष लपेट कर रखा, ये क्या कम था!

तो फिर आज राहुल गाँधी का जॉर्ज साहब को श्रद्धांजलि देने का कोई औचित्य नहीं रह जाता क्योंकि इन औपचारिकताओं की कोई कीमत नहीं होती।

राहुल गांधी की काँग्रेस और उसके नेता दृढ़ निश्चय वाले जॉर्ज को झुका नहीं सके।

आज वो ही खेल नरेंद्र मोदी के खिलाफ रफाल में खेलने की कोशिश की है राहुल ने, मगर फेल हो गए… इसके बावजूद पाकिस्तान और चीन के इशारों पर मोदी को बदनाम करने की कोशिशों में लगे हैं।

एक तरफ काँग्रेस ने कारगिल युद्ध पाकिस्तान से सांठगांठ के तहत कराया (क्यूंकि उस युद्ध को भाजपा का युद्ध कहा राशिद अल्वी, काँग्रेस के नेता ने) और दूसरी तरफ ‘तहलका’ में बैठे अपने चमचे पत्रकारों से कथित घोटाले को उजागर करवाया!

ये कितना गहरा षड्यंत्र कर सकते हैं, कोई सोच भी नहीं सकता। मगर “साँच को आंच नहीं” ये नहीं समझते काँग्रेस के लोग।

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