भय का साम्राज्य बनाना ही कांग्रेस की ‘मॉडस ओप्रेंडी’

वर्ष 1993 में जब पिताजी श्री रघुनन्दन शर्मा दूसरी पारी में राजगढ़ से विधायक चुने गए तब दिग्विजय सिंह की सरकार बनी ही थी।

राजगढ़ दिग्विजय सिंह का संसदीय क्षेत्र रहा था। हारने वाले कांग्रेस प्रत्याशी दिग्विजय के खासमखास थे।

एक सामंती ठसक वाले मुख्यमंत्री के लिए ये बर्दाश्त करना संभव नहीं था कि उनके ही इलाके में उनके ही आदमी को पछाड़ कर कोई भाजपाई अपनी पैठ बनाये।

परिणाम के दिन राजगढ़ में विजय जुलूस निकला और दूसरे दिन खुजनेर में। खुजनेर में जब जुलूस एक मस्जिद के सामने से निकल रहा था तब अचानक वहां की छत से जुलूस पर पत्थर और ईंटों से हमला कर दिया गया, फिर तलवार और फरसों से हमला करने की फ़िराक में कुछ झुण्ड सामने आये।

कई निहत्थे लोग घायल हुए, भीड़ तितर बितर हो गयी, पिताजी को कुछ कार्यकर्ता सुरक्षा घेरा बनाकर वहां से बाहर निकाल ले गए पर रात भर खुजनेर जलता रहा। एक दो लोग मारे भी गए, बाज़ार के बाज़ार जला दिए गए। सब जान गए थे ये हमला किसके इशारे और आश्रय से हुआ है।

अगले दिन से शुरू हुआ कांग्रेसी सत्ता का कुत्सित षड्यंत्र… जिन्होंने हमला किया उन्हें गिरफ्तार करने के बजाय भाजपा कार्यकर्ताओं को ही गिरफ्तार करना शुरू कर दिया गया। पिताजी को भीड़ को उकसाने, आगजनी करने, दंगा भड़काने जैसी कई धाराओं में बंदी बना लिया गया।

कई कार्यकर्त्ता अपना परिवार और रोज़गार छोड़कर कई महीनों पुलिस से छुपते रहे, कई गिरफ्तार कर लिए गए और प्रताड़ित किये गए। पिताजी को तीन महीने बाद ज़मानत मिली तब जाकर विधानसभा में शपथ ले पाए। जहाँ कई वरिष्ठ विधायकों ने हौसला बढ़ाया वहीं कुछ चुनिंदाओं ने सलाह दी कि एक मुख्यमंत्री के इलाके में विपक्ष के विधायक बने हो, ज़रा “संभल कर और सम्बन्ध बना कर” चलना।

खैर, अगले पूरे पांच साल विधानसभा में पिताजी राजगढ़ की जनता की समस्याओं को ज़ोर शोर से उठाते। इलाका मुख्यमंत्री का ही था इसलिए कांग्रेस को और मुख्यमंत्री को खुद जवाब देना पड़ता और शर्मिंदगी उठानी पड़ती।

इस से क्षुब्ध होकर और भय का वातावरण बनाने इस बार हमारे परिवार को निशाना बनाया जाने लगा। इस बार माताजी को झूठे और मनगढ़ंत अपराधों में शामिल बना दिया गया!

इशारा वही कि… “चुप हो जाओ”… वर्ना तुम्हारा राजनीतिक करियर खत्म कर देंगे! ये सिलसिला तब तक चला जब तक दिग्विजय सिंह मुख्यमंत्री रहा। अगले कई साल हमने ये सब मुक़दमे कोर्ट में लड़े और सब के सब जीते।

कांग्रेस की यही “मॉडस ओप्रेंडी” और यही परम्परा है कि वह अपने प्रतिद्वंद्वियों को नीचे से ऊपर तक प्रताड़ित करते आयी है, भय का साम्राज्य स्थापित करने में इन्हें कुछ ही महीने लगते हैं।

आज कमल नाथ के कार्यकाल में (जिसका रिमोट कंट्रोल दिग्विजय के ही हाथ है) भी वही हो रहा है जो बरसों से होते आया है। राजनीतिक हत्याओं का क्रम जारी है, गाँव कस्बों में अपना सब कुछ दांव पर लगाकर कांग्रेस से लड़ने वाले छोटे छोटे कार्यकर्ताओं को अलग अलग तरह से डराया धमकाया जा रहा है, 25 साल बाद उसी खुजनेर में बच्चों पर तलवारों और फरसों से हमले हो रहे हैं वो भी देशभक्ति के गीत गाने पर, सब जानते हैं किसके आश्रय और शह से!

कल पिताजी को फ़ोन किया और खुजनेर घटना के बारे में प्रतिक्रिया ली तो उन्होंने कहा, “हम सत्ता में ज़रूर रहे हैं पर अभी लड़ना भूले नहीं हैं, अब फिर से लड़ेंगे, भिड़ेंगे और जीतेंगे” !! वन्दे मातरम !!

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