राष्ट्रपति के संबोधन की तीन महत्वपूर्ण, मगर मीडिया द्वारा उपेक्षित बातें

राष्ट्रपति महोदय ने 70वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर अपने सम्बोधन में तीन महत्वपूर्ण बातें कहीं जिन्हे समाचारों में उपेक्षित कर दिया गया।

प्रथम, राष्ट्रपति महोदय ने ज़ोर दिया कि देश के संसाधनों पर हम सभी भारतीयों का एकसमान अधिकार है, चाहे हम किसी भी समूह के हों, किसी भी समुदाय के हों, या किसी भी क्षेत्र के हों।

द्वितीय, उन्होंने कहा कि घर में साझेदारी एक परिवार का निर्माण करती है। काम में भागीदारी एक व्यवसाय का निर्माण करती है। विभिन्न हित वाले लोगों के मध्य साझेदारी समाज का निर्माण करती है। सरकार और जनता की साझेदारी हमारे राष्ट्र का निर्माण करती है। और राष्ट्रों की साझेदारी एक बेहतर विश्व का निर्माण करती है। दूसरे शब्दों में, उन्होंने राष्ट्र और बेहतर विश्व का आधार परिवार को माना है।

याद करिये कि पिछले वर्ष संयुक्त राष्ट्र महासभा में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने अपने संबोधन में कहा था (इस विषय पर अक्टूबर 2018 में लिख चूका हूँ) कि “संयुक्त राष्ट्र को परिवार के सिद्धांत पर चलाना होगा। संयुक्त राष्ट्र, मैं, मेरा और मुझको कहकर नहीं चलाया जा सकता। यह मंच, हम — हमारा और सबको के सिद्धांत पर बनाया गया था। उसी आधार पर चलेगा तो जीवित रहेगा।”

[संयुक्त राष्ट्र में परिवार के पक्ष में आवाज़ उठाने के लिए विदेश मंत्री को बधाई]

हाल ही में भारतीय नेतृत्व द्वारा परिवार को राष्ट्र और विश्व समुदाय की इकाई के रूप में ज़ोर देने के पीछे की कहानी यह है कि कुछ समय से व्यक्ति विशेष के अधिकारों की चौखट पर परिवार – और परिवार से बने समाज – की समग्रता और स्नेह की बलि देने का प्रयास चल रहा है। किसी परिवार या परिवार के सदस्य को मारने वाले आतंकवादी के मानवाधिकारों के संरक्षण का लेक्चर पिलाया जाता है। लोकतान्त्रिक सरकार के निर्णयों की वैधता को सिविल सोसाइटी या व्यक्ति विशेष के द्वारा जानबूझकर किये गए कुतर्को और हिंसा के द्वारा चुनौती दी जा रही है।

या फिर, दो पुरुष या दो महिलाओ के संसर्ग का उत्सव मनाया जाता है, यद्यपि मैं यहाँ स्पष्ट कर दूँ कि हर व्यक्ति को अपना जीवनसाथी चुनने के अधिकार को मैं स्वीकार करता हूँ। यहाँ तक कि अवैध घुसपैठियों का भी मानवाधिकार के नाम पर समर्थन किया जाता है, जबकि कुछ स्थितियों में अवैध घुसपैठिये राष्ट्र की अवधारणा और नींव को कमज़ोर कर देते हैं।

इन्हीं व्यक्तिगत अधिकारों के नाम पर कई बार शिशु और बच्चे, परिवारों से अलग कर दिया जाते हैं। इस व्यवस्था की त्रासदी भारतीय परिवारों ने पश्चिमी देशों में झेली है।

तृतीय, राष्ट्रपति महोदय ने कहा कि इस वर्ष भारतवासियों को आने वाले लोकसभा चुनावों के रूप में एक महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी निभाने का अवसर मिलने जा रहा है। इन्होने ज़ोर दिया कि हमारे आज के निर्णय और कार्यकलाप, 21वीं सदी के भारत का स्वरूप निर्धारित करेंगे। एकजुट होकर, अपने प्रयासों के बल पर, इस सदी को भारत की सदी बनाने का अवसर हम सबके सामने है। इसलिए, राष्ट्र निर्माण की दृष्टि से आज का यह समय हम सबके लिए उतना ही महत्वपूर्ण है जितना हमारे देशवासियों के लिए स्वतंत्र भारत का शुरुआती दौर था।

मुझे आशा है कि हम सब अपना वोट डालते समय इस बात का ध्यान रखेंगे कि कौन सा नेतृत्व और किसकी सरकार 21वीं सदी के भारत का निर्माण करने में सक्षम है।

मुझसे पूछे तो मैं प्रधानमंत्री मोदी को और उनकी सरकार के लिए वोट डालने को कहूंगा।

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