फिर मीडिया और विपक्ष, भाजपा से क्यों पूछता है मंदिर निर्माण की तारीख

मीडिया और विपक्ष अयोध्या में श्रीराम मंदिर की तारीख भाजपा क्यों पूछता है। ये सुप्रीम कोर्ट से पूछने की हिम्मत क्यों नहीं करते?

उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कुछ गलत नहीं कहा टीवी कार्यक्रम ‘आपकी अदालत’ में।

29 जनवरी 2019 को सुप्रीम कोर्ट में नई बेंच द्वारा राम मंदिर प्रकरण पर सुनवाई शुरू करनी थी या ऐसा कहिये कि उस दिन नियमित सुनवाई की रूपरेखा तैयार की जानी थी। मगर वो अब नहीं होगी क्यूंकि उस दिन जस्टिस बोबडे उपस्थित नहीं रहेंगे और अगली तारीख की घोषणा अभी नहीं की गई है।

ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि सुप्रीम कोर्ट कांग्रेस की उस लाइन पर चल रहा है जो कपिल सिबल ने पिछले साल दिखाई थी कि मंदिर की सुनवाई 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद होनी चाहिए।

और इस पर कांग्रेस के नेता और मीडिया चैनल्स (जिनमें अनेक तो कांग्रेस के इशारों पर नाचते हैं) भाजपा से पूछते हैं कि मंदिर कब बनाएंगे, तारीख क्यों नहीं बताते!

इन कांग्रेस के नेताओं और मीडिया चैनल्स के गुर्दों में दम नहीं है जो सुप्रीम कोर्ट से पूछें कि आप मंदिर पर फैसला कब देंगे।

क्यूँ नहीं ये लोग खुल कर बोलते कि अगर आप में 10 साल में भी फैसला देने की क़ाबलियत और दमखम नहीं है तो फिर आप न्यायालय में बैठने का क्या अधिकार रखते हैं? क्यूँ आप उस कहावत को चरितार्थ कर रहे हैं कि देर से न्याय का मतलब अन्याय होता है (Justice delayed is Justice Denied).

एक टीवी चैनल ले कार्यक्रम ‘आप की अदालत’ में योगी आदित्यनाथ ने साफ़ कह दिया कि अगर आप फैसला नहीं कर सकते तो हमें सौंप दीजिए, हम 24 घंटे में मसला सुलझा देंगे।

ये बयान किसी तरह विवादित नहीं है मगर आज दिन भर रिपब्लिक टी वी ये कहता रहा कि योगी आदित्यनाथ ने मंदिर पर विवादित बयान दिया।

अखिलेश यादव कह रहे हैं कि योगी जी पहले उत्तर प्रदेश के किसानों की हालत सुधार लें जो बरबाद हो रहा है। अखिलेश पहले ये देख लें कि उनके समय में किसानों से कितना अनाज सरकार खरीदती थी और आज योगी सरकार कितना करती है।

मुझे समझ नहीं आज कुम्भ में वो 2-4 साधू संत कौन थे जो अखिलेश का स्वागत कर रहे थे। उस अखिलेश का जिसके पिता मुलायम सिंह यादव ने मंदिर निर्माण की पुकार लगा रहे निहत्थे कारसेवकों को गोलियों से भूनने का आदेश दिया था। उन साधु संतों को क्या अखिलेश ने आज मंदिर के लिए समर्थन करने का भरोसा दे दिया?

योगी जी ने आज सुप्रीम कोर्ट से बड़ी विनम्रता से जल्द फैसला करने की अपील की है। योगी जी का कथन सही है कि अब न्याय में और देरी से न्याय व्यवस्था के प्रति जनमानस के मन में विश्वास की कमी होगी।

ऐसी ही विनम्र अपील प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने भी स्मिता प्रकाश को हाल ही में दिए इंटरव्यू में की थी। अगर सुप्रीम कोर्ट अभी भी चेतने के लिए तैयार नहीं है तो फिर लोग और बहुत कुछ कहने के लिए मजबूर होंगे। फिर आप अवमानना के नोटिस देते रहेंगे लेकिन अपनी आज की गलती नहीं मानेंगे।

सुप्रीम कोर्ट से केवल फैसला देने के लिए अपील की जा रही है, ये नहीं कहा जा रहा कि किसके पक्ष में फैसला दें।

वैसे, जब ये मसला भूमि के टुकड़े के लिए, जिस पर विवाद है तो फिर ये संवैधानिक मसला कैसे हुआ जिसके लिए संविधान पीठ का गठन किया गया है।

विश्व हिन्दू परिषद् और धर्म सभा को हिंदूवादी शक्तियों और भाजपा के साथ मिल कर मंदिर के लिए आंदोलन करना चाहिए जिसका निशाना अब अदालत की लेटलतीफी होनी चाहिए ना कि भाजपा… क्यूंकि भाजपा के अलावा कोई राजनीतिक दल मंदिर निर्माण को समर्थन देने आगे नहीं आएगा।

कोई पाठक इस बात के लिए बहस ना करे कि सरकार अध्यादेश लाये क्यूंकि मोदी कह चुके हैं कि अदालत पहले फैसला करे तब सरकार विचार करेगी क्या करना है।

अब अगर पीएम ने ये कह दिया तो ये क्या ज़रूरी है कि उनके मन में कुछ और विचार चल ही ना रहा हो।

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