अर्ध कुम्भ 2019 : दिव्य कुम्भ, भव्य कुम्भ

कुम्भ मेला प्रत्येक 12 वर्षों पर किसी एक स्थान पर लगता है, इसे महाकुम्भ कहते हैं। प्रयागराज और हरिद्वार में कुम्भ 12 वर्षों के अतरिक्त 6 वर्षों के अंतराल पर भी होता है, जिसे अर्ध कुम्भ कहते हैं। 2019 में प्रयागराज में लगने वाला कुम्भ अर्धकुम्भ ही है। हालाँकि इसकी अनुपम छटा व इसका थीम – दिव्य कुम्भ, भव्य कुम्भ देख कर यह महाकुम्भ ही लगता है।

आइये 2019 में प्रयागराज में लगे अर्धकुम्भ को समझते हैं।

साल 2017 के दिसंबर महीने में कुम्भ मेले को यूनेस्को ने विश्व धरोहर का दर्जा दिया। उसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार पर आने वाले कुम्भ मेले को और भी अधिक सुव्यवस्थित व सुगम्य बनाने की चुनौती बढ़ गयी।

स्वयं महंत रहे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी इस बात को अच्छे से समझते थे कि लाखों संतों, साधुओं, सन्यासियों, और श्रद्धालुओं के इस समागम में कैसी व्यवस्था की आवश्यकता पड़ेगी।

इसलिए उत्तर प्रदेश सरकार ने विधानसभा में अर्धकुम्भ का पहले नाम बदल के कुम्भ व कुम्भ का नाम महाकुम्भ रखा और विधानसभा से इलाहबाद मेला प्राधिकरण नाम से एक स्थाई संस्था के गठन का प्रस्ताव पारित किया,जिसके मुखिया डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट व पुलिस के इंस्पेक्टर जेनरल रहेंगे। इसके बाद राज्य सरकार ने करीब 2 हज़ार 500 करोड़ रुपये राज्य सरकार ने पहले ही सप्ताह में कुम्भ के लिए दिए। 2019 आते आते तक यह संख्या 4,200 करोड़ हो गयी, जो 2013 के मुक़ाबले करीब 4 गुणा ज़्यादा है।

मगर सरकार ने ये पैसे हवाबाज़ी में नहीं खर्चे, बल्कि कई बड़े प्रोजेक्ट, कई सुविधाएं व कई विभागों में लगाये हैं। राज्य सरकार ने कुम्भ मेले को कितनी गंभीरता से लिया है इसका अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है, कि सरकार ने इसके लिए अलग से एक संस्था का गठन किया, अलग से एक दायित्व ‘मेला इंचार्ज’ का गठन किया।

2019 कुम्भ की तैयारियां सरकार ने 2017 के अंतिम सप्ताह से ही शुरू कर दी थी, कुम्भ के लिए 2,500 करोड़ के फण्ड की घोषणा होते ही, पहले ही सप्ताह में 1700 करोड़ रुपये लगा दिए गए थे।

2 जनवरी 2018 को शुरू हुआ माघ मेला, उस समय के इलाहाबाद में कुम्भ की तैयारी के समान था। विगत कई वर्षों में अशुभ घटनाएं भी होती रही हैं, जिनसे जान माल की काफी क्षति होती थी, मगर इस कुम्भ में सरकार ने 22 हज़ार पुलिसकर्मियों, अर्धसैनिक बल की 80 बटालियनों और एयरबोर्न स्नाइपर्स की तैनाती का फ़ैसला लिया। सुरक्षित कुम्भ का नारा देते हुए भव्य कुम्भ में पुलिस ने ड्रोन से निगरानी करने का भी फ़ैसला किया।

कुम्भ मेले में श्रद्धालुओं की आवाजाही में किसी प्रकार की कोई समस्या न उठानी पड़े इसलिए परिवहन मंत्रालय ने यहां भी विशेष ध्यान दिया है। स्नान पर्वों के लिए श्रद्धालुओं को निःशुल्क शटल बस सेवा दी जाएगी। वहीं रेलवे ने कुम्भ 1711 विशेष ट्रेनों की व्यवस्था की है। उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग ने इस मेगा इवेंट के लिए 49 दिनों के लिए 6 हज़ार बसों को सेवा में शामिल किया है।

अगर आप सोच रहे हैं कि परिवहन मंत्रालय व यातायात के लिए केवल इतना ही किया गया है तो आप ग़लत हैं।

अंडरपास का विस्तारीकरण, 10 रेलवे स्टेशनों का उच्चीकरण, 264 सड़कों का चौड़ीकरण और दृढ़ीकरण, 64 यातायात चौराहों का पुनर्निर्माण और सौंदर्यीकरण और 5 स्थानों पर जेटी का निर्माण, उत्तर प्रदेश सरकार ने किया है।

कोई बड़ी दुर्घटना न घटे इसलिए 40 अग्निशमन केंद्र 15 अग्निशमन चौकियों के साथ स्थापित की गयी हैं। 4 पुलिस लाइन, 40 पुलिस थाने, 3 महिला पुलिस थाने, 62 पुलिस चौकियां, 40 निगरानी टावर व 1000 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।

कुम्भ का स्थान इतना बड़ा है कि यह ग्रीक देश से भी ज़्यादा है। कुम्भ की व्यवस्था के लिए एक टेंट सिटी यानि टेंटों के शहर का निर्माण किया गया है। 3200 एकड़ के क्षेत्र में यह शहर गंगा किनारे बसाया गया है। यहां 600 से लेकर 40000 रुपये तक के टेंट उपलब्ध हैं। इन टेंटों में पांच सितारा होटलों जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। इस टेंट शहर को 50 करोड़ की लागत से बनाया गया है।

प्रवासी व उच्च वर्ग के लिए यहां 1000 स्विस कॉटेज तैयार किये जा रहे हैं, जिसमें एक कॉटेज की कीमत औसतन 4 लाख है। यहाँ 5 पांच सितारा रेस्तरां भी बनाये गए हैं, जिनमें सभी प्रान्तों का सात्विक भोजन मिलेगा। वैदिक यज्ञशाला, ग्रीन पैसेज, योग और मैडिटेशन सेंटर भी बनाये गए हैं। मेहमानों की सुरक्षा के लिए यहां 200 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। सुरक्षाबलों के 20 जवानों की ड्यूटी यहाँ 24 घंटे है और निगरानी के लिए 6 वाच टावर बनाये गए हैं। न्यूज़ीलैंड से विशेष प्रकार की चार नावें बनाई गयी हैं।

कुम्भ मेले की भव्यता बनाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने इतनी योजनाएं व प्रोजेक्ट बनाये हैं कि उन्हें एक लेख में समेट पाना बेहद मुश्किल है। पाठक स्वयं जब इन विषयों के बारे में जानेंगे तो सरकार की स्तुति किये बगैर रह नहीं पाएंगे।

सन्दर्भ :

https://navbharattimes.indiatimes.com/astro/photo/kumbh-2019-what-is-the-cultural-importance-of-kumbh-in-indian-culture-prayagraj-uttar-pradesh-india-52859/4/

https://www.indiatoday.in/india/story/prayagraj-allahabad-kumbh-mela-2019-date-time-place-all-you-need-to-know-about-kumbh-mela-1413012-2018-12-19

https://economictimes.indiatimes.com/news/politics-and-nation/kumbh-2019-work-begins-officials-arrive-with-men-and-machine/articleshow/62289483.cms?from=mdr

https://kumbh.gov.in

https://economictimes.indiatimes.com/news/politics-and-nation/kumbh-2019-work-begins-officials-arrive-with-men-and-machine/articleshow/62289483.cms?from=mdr

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