सीबीआई विवाद : जस्टिस गोगोई के बाद जस्टिस सीकरी भी सुनवाई से अलग

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एके सीकरी ने एम. नागेश्वर राव को सीबीआई का अंतरिम निदेशक नियुक्त किये जाने के केंद्र सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई से खुद को गुरुवार को अलग कर लिया है। इससे पहले मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस रंजन गोगोई भी इस मामले की सुनवाई से अलग हो चुके हैं।

जस्टिस सीकरी की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की सुनवाई शुक्रवार के लिए सूचीबद्ध की है। अब दूसरी पीठ इस मामले की सुनवाई करेगी। उल्लेखनीय है कि किसी मामले की सुनवाई से खुद को अलग करने का कारण बताना न्यायाधीशों के लिए अनिवार्य नहीं होता।

गुरुवार को जैसे ही मामला सुनवाई के लिये आया जस्टिस सीकरी ने गैर सरकारी संगठन कॉमन कॉज़ की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे को बताया कि वह इस मामले की सुनवाई नहीं करना चाहते और खुद को इससे अलग कर रहे हैं।

जस्टिस सीकरी ने कहा, “आप मेरी स्थिति समझते हैं, मैं इस मामले पर सुनवाई नहीं कर सकता।”

गौरतलब है कि न्यायमूर्ति सीकरी सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा को पद से हटाने वाली उच्च अधिकार प्राप्त समिति का हिस्सा थे।

सीबीआई के अंतरिम निदेशक नियुक्ति के खिलाफ दायर याचिका में कहा गया है कि बिना चयन समिति की मंजूरी के नागेश्वर राव की नियुक्ति की गई है।

अंतरिम सीबीआई निदेशक की जिम्मेदारी संभाल रहे एम नागेश्वर राव को 18 दिसंबर को सरकार ने अतिरिक्त निदेशक के रूप में पदोन्नत किया था। ओडिशा कैडर के 1986 बैच के आईपीएस अधिकारी राव के नाम को कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने मंजूरी प्रदान की थी।

सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के बीच टकराव सामने आने के बाद राव को अंतरिम सीबीआई निदेशक की जिम्मेदारी सौंपी गयी थी।

उल्लेखनीय है कि कांग्रेस नेता मल्लिकार्जु्न खड़गे ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कहा था कि एम नागेश्वर राव की सीबीआई के अंतरिम निदेशक के पद पर नियुक्ति ‘गैरकानूनी’ है तथा जांच एजेंसी के नए प्रमुख की नियुक्ति के निए चयन समिति की तत्काल बैठक बुलाई जाए।

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