स्वस्थ शरीर और तेज़ दिमाग के लिए अनीमिया को करना होगा दूर

राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार द्वारा अनीमिया को रोकने के लिए 10-19 वर्ष के किशोर-किशोरियों में अनीमिया के रोकथाम हेतु सप्ताहिक आयरन फॉलिक एसिड (Weekly Iron Folic Acid supplementation ¼WIFS½ अनुपूरण कार्यक्रम शुभारम्भ

राज्य स्वास्थ्य समिति, यूनिसेफ और केयर के सहयोग बिहार में सप्ताहिक आयरन फॉलिक एसिड अनुपूरण (विफ्स) कार्यक्रम की शुरुआत

बांकीपुर गर्ल स्कूल की 9 वीं की छात्रा फौजिया खानम एवं अन्य बच्चों को आयरन गोली खिला कर स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डेय और शिक्षा एवं समाज कल्याण मंत्री कृष्ण नंदन वर्मा ने की बिहार में सप्ताहिक आयरन फॉलिक एसिड कार्यक्रम की शुरुआत

पटना, 22 जनवरी-2019 : स्वास्थ्य शरीर और तेज़ दिमाग के लिए अनीमिया को दूर करना होगा और हर किशोर किशोरी को आयरन फोलिक एसिड की नीली गोली खिलाना होगा. पहले बिहार में 1 लाख जीवित जन्म देने के दौरान पहले 205 माताओं की मृत्यु हो जाती थी जो अब घट कर 165 हो गई है .

हमने इसे आने वाले वर्षों में 70 तक लाने का लक्ष्य रखा है. जिसके लिए आज से बिहार में सप्ताहिक आयरन फॉलिक एसिड कार्यक्रम की शुरुवात की जा रही है . उक्त उद्गार बिहार से स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डेय ने बिहार में सप्ताहिक आयरन फॉलिक एसिड कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए कहा.

अपने संबोधन में मंगल पाण्डेय ने कहा कि इस पहल का प्रभाव 12 करोड़ आबादी और 1 करोड़ 78 लाख बच्चों पर पड़ने वाला है। जब हम 1 साल बाद अनीमिया का सर्वेक्षण करेंगे तो पता चलेगा कि साप्ताहिकी आयरन फॉलिक एसिड कार्यक्रम क्या लाभ हुआ है. इस कार्यक्रम के लिए पूरी तैयारी स्वास्थ्य विभाग द्वारा कर ली गई है।

इस क्रम में 91 हज़ार आंगनवाड़ी, 68962 शिक्षकों, 17892 एएनएम और 4470 आशा सुगमकर्ता का प्रशिक्षण करवाया जा चूका है . बिहार में हमें सभी बच्चों के लिए 92 करोड़ गोलियों की आवश्यकता है जिसमे 30 करोड़ गोलियों की आपूर्ति प्रखंड स्तर तक की जा चुकी है। इस योजना के क्रियान्वयन में शिक्षा और समाज कल्याण विभाग की भूमिका बहुत ही महत्वपूर्ण है। आने वाले वर्षों में हम बिहार को एनेमिया मुक्त राज्य बनाएंगे। जब आगे आने वाली पीढ़ी स्वस्थ्य होगी तभी हम स्वस्थ्य और समृद्ध बिहार बना पाएंगे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शिक्षा मंत्री कृष्ण नंदन वर्मा ने कहा कि बिहार के बच्चों का दिमाग तेज़ होगा तो वो पढाई में बेहतर करेंगे और आगे अपनी जिन्दगी में सफल होंगे. इस पहल में शिक्षा विभाग पूरा सहयोग करेगा. सही तरीके से गोली का वितरण हो साथ ही यह भी सुनिश्चित करे कि गोली जिनको दी जा रही है वो आपके समक्ष ही इसको खा ले ताकि उनको इसका फायदा हो सके। गरीब और वंचित समूह के लोगों के बीच इसके बारे में जागरूक करने की आवश्यकता है। आमतौर पर लोगो के मन मे सरकार के द्वारा दी जाने वाली गोलियों और दवाओं के बारे में एक धरना होती है कि उनकी क्वालिटी उतनी अच्छी नही है जो कि पूरी तरह से गलत है।

मीडिया के प्रतिनिधियों से आग्रह करते हुए कहा कि इस गोली का कोई नुकसान नहीं है. इस अभियान से सम्बंधित किसी प्रकार कि संशय या घटना के बारे में कोई खबर लिखने के दौरान एक बार स्वास्थ्य विशेषज्ञ या सम्बंधित पदाधिकारी से अवश्य संपर्क करें. इस प्रकार के पहल में मीडिया के सकारात्मक सहयोग और सफलता कि कहानियों के द्वारा ज्यादा से ज्यादा बच्चों तक इसके लाभ को पहुंचा सकते हैं .

स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार ने कहा कि किशोरावस्था (10-19 वर्ष) में अनीमिया को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने सप्ताहिक आयरन फॉलिक एसिड अनुपूरण कार्यक्रम को शुरू किया है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यालय में जाने वाले समस्त किशोर-किशोरियों तथा विद्यालय नहीं जाने वाली किशोरियों में अनीमिया के रोकथाम के लिए सप्ताहिक आयरन फॉलिक एसिड को विद्यालयों एवं आंगनवाड़ी केन्द्रों के माध्यम से दिया जाना है। किशोर-किशरियों को प्रति सप्ताह 100 मि0ग्रा0 आयरन और 0.5 मिलीग्राम फोलिक एसिड गोली दिया जाना है। 23 जनवरी को सभी जिला मुख्यालय में जिला पदाधिकारी द्वारा इसका शुभारंभ किया जायेगा. यह गोली कोई दवा नहीं है बल्कि अनुपूरक है.

राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ वाई एन पाठक ने कहा कि CAB 2014 के अनुसार 10 से 17 साल के कुल 85 प्रतिशत लड़कियां और लड़के एनीमिया के शिकार है . अनीमिया किशोर और किशोरियों की वृद्वी और विकास में बाधक है। इस गोली को स्कूलों में मध्यान भोजन के बाद और असेंबली के समय गोली खिलाएंगे। जब स्कूल बंद होगा तो नोडल टीचर उतनी गोलियां देंगे।

स्कूल खुलने के बाद बच्चे खाने के बाद गोलियों के रैपर को अपने शिक्षकों को दिखएँगे ताकि सुनिश्चित हो सके कि बच्चों ने गोलियाँ खाई है। उप के बाद बिहार दूसरा राज्य है जिसने 92 करोड़ गोलियों का आर्डर किया है। हमने दवायों को 85 प्रतिशत जिला, प्रखंड के आंगनवाड़ी केंद्रों और विद्यालय तक पंहुचा चुके हैं. इस गोली के लेने के बाद कभी उलटी या जी मितलाने की घटना हो सकती है . इससे घबराये नहीं यह आयरन का मूल प्रभाव होता है. विभाग इस प्रकार की घटनाओं के लिए पूरी तरह मुस्तैद है.

यूनिसेफ बिहार के प्रमुख (प्रभारी) शिवेंद्र पंड्या ने कहा कि हम सबसे युवा राज्य है हमारी ४६ प्रतिशत आबादी 18 साल से कम है अगर हम किशोर किशोरियों कि बात करे तो वो २२ प्रतिशत लगभग २ करोड़ है. यूनिसेफ बिहार के बच्चों के लिए फ्लैगशिप कार्यक्रमों में सरकार को तकनीकी सहयोग करता है. इस कार्यक्रम में भी यूनिसेफ क्रियान्वयन, रिपोर्टिंग और अनुश्रवन में सहयोग करेगा. उन्होंने अंकुरण कार्यक्रम बताते हुए उन्होंने कहा कि पूर्णिया के 100 विद्यालयों में यह कार्यक्रम चलाया गया है . विद्यालय में पोषण वाटिका बनाये गए है जिससे खाने में पोषण युक्त सब्जियों के खाने पर बल दिया जाता है और जिससे अनीमिया को दूर किया जा सकता है. बिहार सरकार इस पहल को यूनिसेफ के सहयोग से बिहार के सभी विद्यालयों में लागू किया जायेगा.

केयर के राज्य प्रमुख हेमंत शाह ने कहा कि किशोरावस्था अनीमिया को दूर करने हेतु उपयुक्त समय है, क्योंकि यह वृद्धि और विकास का महत्वपूर्ण समय है। आयरन की कमी से उनके विकास, सीखने की क्षमता सीमित हो सकता है, दैनिक कार्यां में एकाग्रता कम हो सकती है, संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है, शरीरिक फिटनेस में कमी, कार्य उत्पादकता में कमी एवं विद्यालय छोड़ने की दर में वृद्धि हो सकती है।
कार्यकम के अंत में राज्य स्वास्थ्य समिति की अपर कर्यपालक निदेशक, राज्य स्वास्थ्य समिति बिहार करुणा कुमारी ने किया.

कार्यक्रम में राज्य के सभी जिलों से स्वास्थ्य, शिक्षा और समाज कल्याण विभाग के पदाधिकारियों साथ ही , जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी-सह-नोडल पदाधिकारी, जिला शिक्षा पदाधिकारी एवं जिला कार्यक्रम पदाधिकारी के साथ भी केयर, यूनिसेफ के प्रतिनिधि, और विभिन्न विद्यालयों के बच्चे और शिक्षक भी उपस्थित थे।

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY