बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण सुनिश्चित करने राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला

20 जनवरी, 2019 : बिहार शिक्षा परियोजना परिषद, राज्य शिक्षा शोध एंव प्रशिक्षण परिषद पटना यूनिसेफ बिहार के द्वारा स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए आयोजित राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला के अंतिम दिन आज सभी जिलों से आये प्रतिभागियों ने अपने अनुभव, फीडबैक और रोल प्ले से माध्यम से बाल सुरक्षा और संरक्षण से जुड़े कानूनी, सामाजिक और मनोवाज्ञानिक मुद्दों पर अपने विचार रखे.

बिहार शिक्षा परियोजना परिषद की राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी, गुणवत्ता किरण कुमारी ने कहा कि आजकल बच्चों के साथ ऐसी घटनाएं हो रही है जो अविश्वनीय है. हम सोचने पर मजबूर हो जाते हैं कि क्या ऐसा भी होता है.

यह प्रशिक्षक बाकी अन्य प्रशिक्षण से अलग था. इसका एक उद्देश्य बच्चों के साथ होने वाले हिंसा और उपेक्षा को सही तरह से समझाना था. किसी समस्या को अलग तरीके से देखने के लिए उसकी पूरी गंभीरता और उससे जुड़े सारे पहलू को समझना होगा. यह ट्रेनिंग उसी दिशा में एक कदम है.

आप जो भी अच्छा काम करें उसके बारे में साझा करें ताकि बिहार के शिक्षा और शिक्षकों की जो एक नकारात्मक छवि बनी है वो बदले. ऐसा नहीं है कि बिहार के बच्चों में कोई कमी है बस जरुरत है एक सही, सकारात्मक और सहयोगी माहौल बनाने की.

यह ट्रेनिंग समग्र शिक्षा के तहत पहला राज्यव्यापी कार्यक्रम है क्योंकि इसमें प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा के शिक्षक सम्मिलित है. विभाग द्वारा इस प्रशिक्षण को प्रमंडल और जिला स्तर पर 3 दिन के ट्रेनिंग कार्यक्रम के द्वारा लगभग 81000 विद्यालयों को बच्चों के लिए सुरक्षित बनाने में सहयोग करेंगे.

नालंदा के जिला शिक्षा पदाधिकारी मनोज कुमार ने कहा कि शिक्षक बच्चों के सबसे अच्छे दोस्त और अभिभावक होते है. बच्चे विद्यालय में अपने आप को सुरक्षित महसूस करते है. एक शिक्षक के रूप में यह हम सब की जिम्मेदारी है कि बच्चों के विकास के लिए एक सहयोगी और संवेदनशील माहौल विकसित करें ताकि बच्चों का सर्वांगीण विकास हो सकें.
यूनिसेफ की शिक्षा विशेषज्ञ डॉ प्रमिला मनोरहन ने कहा कि बिहार में शिक्षा के क्षेत्र में काफी काम हो रहा है लेकिन उसके बारे में लोग नहीं जानते हैं. यह कार्यक्रम भी इसका एक उदाहरण है.

विद्यालय में बच्चों की सुरक्षा को लेकर शिक्षा विभाग द्वारा यूनिसेफ के सहयोग से एक गाइडलाइन बनाई गई जिसके आधार पर इस कार्यकर्म में एक ट्रेनिंग मोडयूल पायलट किया गया है. लोगो के फीडबैक के आधार पर इसको परिमार्जित कर आगे के प्रशिक्षण के लिए प्रयोग किया जायेगा.

`टीचर्स ऑफ़ बिहार’ के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा इस पहल में किसी का कोई सहयोग नहीं है. फिर भी उनका काम काफी सराहनीय है. आप बस अपने जिले में 3 स्कूल को ऐसा बनाइये जिसके देख कर लोग उनकी सफलता का उदाहरण दे.

यूनिसेफ की संचार विशेषज्ञ निपुण गुप्ता ने मीडिया की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि बाल शोषण के किसी घटना को हैंडल करने की आपकी तैयारी में आपको मीडिया से कैसे बात करनी है इसके बारे में जानकारी होनी आवश्यक है. बच्चों के बारे में कोई संवेदनशील बात करने से पहले उसकी सत्यता जांच ले और हमेशा बच्चों के बेस्ट इंटरेस्ट का ध्यान रखे . मीडिया और सोशल मीडिया में अपने आस-पास की सकारात्मक कहानियां साझा करें.

यूनिसेफ के बाल संरक्षण विशेषज्ञ मसूर कादरी ने समेकित बाल संरक्षण सेवाएं के तहत बिहार में बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण से जुड़ी स्थापित संस्थानिक व्यवस्थाओं, सरकार की योजनाओं और नीतियों के बारे में शिक्षकों को बताया ताकि बच्चों के शोषण से जुड़े मामलों के निराकरण में वो सहयोग कर सकें।

एस ए मोईन सीनियर प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर, गुणवत्ता शिक्षा ने कहा कि क्या हम आज यह तय कर सकते है कि हम आज के बाद बच्चों को मानसिक और शारीरिक दंड नहीं देंगे. इस बात को भूल जाइये कि छड़ी के बिना बच्चों को पढाया नहीं जा सकता है.

बाल संरक्षण के क्षेत्र में काम करने वाली संस्था अर्पण की नेहा शर्मा ने कहा कि हमें भी इस प्रशिक्षण के पहले आशंकाएं थी कि कैसे हम इस प्रशिक्षण को पूरा करेंगे . सभी तीनों समूहों के प्रतिभागी सीखने के प्रति उत्सुक थे. सभी प्रतिभागियों ने काफी मेहनत किया. पहले हमने 4 दिनों तक इनको अलग अलग विषय पर प्रशिक्षण दिया. आज प्रतिभागियों ने 5 अलग अलग विषयों बाल विकास, बाल शोषण और उपेक्षा, बाल शोषण के आघात और उसके परिणाम , जेजे एक्ट और पोस्को एक्ट और बच्चों के साथ शोषण के प्रकटीकरण को संभालने के बारे में सीखा, चर्चा किया और बाद में अलग अलग समूहों ने रोल प्ले के माध्यम से उसको प्रस्तुत किया. हमारे पूरे टीम के लिए एक नया अनुभव था.

प्रशिक्षण के अपने अनुभवों को साझा करते हुए प्रतिभागियों ने कहा कि इस ट्रेनिंग के माध्यम से हमारा ह्रदय परिवर्तन हुआ है और हम बच्चों के मुद्दों को लेकर संवेदनशील हुए है. शिक्षकों का अपना ह्रदय परिवर्तन होना आवश्यक है स्कूल के साथ ही अपने घर में अपने बच्चों के साथ. एक ट्रेनर के लिए जानकारी से ज्यादा उनका सकारात्मक होना आवश्यक है. एक शिक्षक के रूप में हमें बच्चों के बेहतरी के लिए सारे कानून, योजनावों और नीतियों के बारे में जानना होगा ताकि हम उनके बेहतरी के लिए उनका सहयोग कर सकें. हमने जो सीखा है , कोशिश करेंगे कि उसे जमीन पर उस के मन मस्तिक पर उसका क्या प्रभाव होगा. इस प्रशिक्षण में हमें उपेक्षा के नए आयाम को समझाया है . हमारी उपेक्षा का प्रतिकूल प्रभाव बच्चों के विकास पर होता है . एक बच्चा जब शोषित होता है तो एक शिक्षक के रूप में पूर्ण रूप से आश्वस्त करना होता है कि हम उसके साथ है.

कार्यशाला में अर्पण से प्रशिक्षक के रूप में नेहा शर्मा, सुविधा, चंद्रिका, शुभांगी, दीपाली और विजल ने प्रशिक्षण दिया ।

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