‘ऐसी पोल खोलूंगा कि जनता को अपना चेहरा नहीं दिखा पाएंगे राहुल गांधी’

कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री श्रीकांत जेना ने पार्टी से निकाले जाने के बाद कहा है कि वे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का ऐसा खुलासा करेंगे कि वे फिर ‘जनता को अपना चेहरा नहीं दिखा’ पाएंगे।

पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में जेना और कोरापुट के पूर्व विधायक कृष्णचंद्र सागरिया को कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया ‍गया है। उन्होंने अखिल भारतीय कांग्रेस समिति की अनुशंसा पर पार्टी की ओडिशा इकाई ने निष्कासित किया है।

जेना ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि ‘मैं समझता हूं कि राहुल गांधी 25 जनवरी को ओडिशा के दौरे पर आएंगे, मैं उसी दिन उनका पर्दाफाश करूंगा ताकि वे जनता को अपना चेहरा नहीं दिखा सकें।’

हालांकि जेना ने कांग्रेस अध्यक्ष के खिलाफ अपने प्रस्तावित ‘महाखुलासे’ का ब्योरा नहीं दिया।

कांग्रेस से निष्कासित किए जाने पर नाराज जेना ने कहा कि ‘राहुल गांधी ने स्पष्ट कर दिया है कि वे खनन माफिया का साथ देंगे। कभी उत्कलमणि गोपबंधु दास का साथ देने वाली ओडिशा प्रदेश कांग्रेस समिति के नेतृत्व ने खनन माफिया से हाथ मिला लिया है। हालांकि इस तरफ मैंने कई बार राहुल गांधी का ध्यान आकर्षित किया लेकिन उन्होंने खनन माफिया का साथ दिया।’

जेना ने आरोप लगाए कि गांधी ने निर्णय किया था कि ओडिशा की सरकार की कमान पटनायक परिवार के हाथों में रहना चाहिए, जिसके लिए उन्होंने बीजू जनता दल (बीजद) के अध्यक्ष नवीन पटनायक के साथ ‘महागठबंधन’ की घोषणा की।

जेना ने कटाक्ष करते हुए कहा कि वे पार्टी विरोधी गतिविधियों में संलिप्त नहीं रहे और कांग्रेस में वे उपयुक्त नहीं बैठते क्योंकि खनिजों को लूटकर उन्होंने ‘धन इकट्ठा’ नहीं किया है।

उन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष निरंजन पटनायक पर भी आरोप लगाए जिनके जवाब में पटनायक ने कहा कि अनुशासनहीनता में शामिल लोगों के लिए कांग्रेस में कोई जगह नहीं है।

लगभग 68 वर्षीय जेना पहली बार ओडिशा के कटक से लोकसभा के लिए वर्ष 1989 में चुने गए थे। इसके बाद वे वर्ष 1991, 1996 और 2009 में लोकसभा सांसद चुने गए। इससे पहले वे 1977 से 1989 के बीच ओडिशा विधानसभा के तीन बार सदस्य रहे।

श्रीकांत जेना को वीपी सिंह, इंद्रकुमार गुजराल और एच डी देवेगौड़ा सरकारों में मंत्रिमडल में शामिल किया गया था, वहीं मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए-2 सरकार में भी वे राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाए गए थे।

कुल मिलाकर जेना की राजनीतिक वज़नदारी को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता, और काँग्रेस नेतृत्व द्वारा उन्हें पार्टी से निकालने का निर्णय का परिणाम जल्द ही सामने आ सकता है। फिलहाल तो सारी निगाहें 25 जनवरी को उनके द्वारा किए जाने वाले खुलासे पर लगी हैं।

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