EVM हैकिंग आरोप : लोकतंत्र के अपहरण का अंतर्राष्ट्रीय षडयंत्र

आज लंदन में अमेरिका का एक हैकर, जिसने अपनी पहचान छुपा रखी थी, ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में अतर्कसंगत घोषणा की कि भारत के 2014 के चुनाव में ईवीएम को हैक किया गया था और ईवीएम मशीन हैक की जा सकती है।

इतना बड़ा आरोप लगाने वाले ने अपनी बात की पुष्टि के लिए न कोई साक्ष्य प्रस्तुत किये और न ही कोई साक्ष्य देने की बात कही है। यह सिर्फ और सिर्फ लांछन लगाने के लिए किया गया आरोप है।

मेरे लिए यह कुछ नहीं है। यह भारत में 2019 के लोकसभा चुनाव को प्रभावित करने के लिए सिर्फ काँग्रेस का अंतराष्ट्रीय स्तर का, विदेश की भूमि पर रचा हुआ एक और षडयंत्र है।

कैम्ब्रिज एनालिटिका के बाद विदेश की भूमि से काँग्रेस का यह एक और कुटिल प्रयास है। इस बार काँग्रेस ने, पर्दे में छिपी एक आवाज़ का सहारा, इस आशा से लिया है कि इस प्रयास से भारत मे ईवीएम को लेकर लोगों मे संदेह का बीजारोपण हो जाएगा।

मैं इस तथाकथित हैकर के पीछे काँग्रेस का हाथ इस लिए कह रहा हूँ क्योंकि वहां कपिल सिब्बल और द वायर के पत्रकार पहुंचे थे और यह प्रेस कांफ्रेन्स पूरी तरह प्रायोजित थी।

जब से काँग्रेस 2014 में सत्ता से बाहर हुई है तभी से ईवीएम से छेड़छाड़ को लेकर सबसे ज्यादा बात काँग्रेस ने की है। आज यह धूर्त और कपटी काँग्रेसी यह समझ चुके हैं कि वे 2019 के लोकसभा चुनाव में बिना बेईमानी किये, नरेंद्र मोदी की सरकार को नहीं हरा सकते है।

वे जानते है कि मोदी का फिर से प्रधानमंत्री बन कर आना न सिर्फ उनका अस्तित्व समाप्त करेगा बल्कि उनका ईकोसिस्टम भी नष्ट हो जाएगा। उन्हें यह ईवीएम अपने रास्ते का सबसे बड़ा रोड़ा लग रही है। यह ईवीएम ही वो अस्त्र है जो राहुल गांधी की काँग्रेस को बेईमानी से लोकतंत्र का अपहरण करने से रोक रही है।

काँग्रेस का उद्देश्य यही है कि अंतराष्ट्रीय स्तर पर भारत, उसके इलेक्शन कमीशन व चुनाव में उपयोग होने वाली ईवीएम को इतना कलंकित कर दिया जाय कि भारत की सत्यपरायण, आदर्शवादी जनता के मन मे संदेह पैदा हो जाये और फिर सर्वोच्च न्यायालय में बैठे उनके पीडी के सहारे, चुनाव में ईवीएम के प्रयोग पर रोक लगवा दी जाए।

और फिर इस तरह काँग्रेस सहित सभी विपक्षी दलों का प्रिय रहा बैलट बॉक्स एक बार फिर 2019 के चुनाव में प्रयोग किया जाय और बाहुबल के आधार पर उसमें पड़ने वाले मतों का अपहरण किया जा सके।

यदि लोग यह सोच रहे है कि यह सिर्फ काँग्रेस का ही षडयंत्र है तो यह गलत है। यह भारत की बढ़ती शक्ति व आर्थिक रूप से स्वावलंबी होते भारत को घुटने पर फिर बैठाने का एक अंतराष्ट्रीय षडयंत्र है। मुझे इस बात पर कोई भी संदेह नहीं है कि काँग्रेस ने सत्ता में फिर से वापस आने के लिए भारत का सौदा इन शक्तियों से कर लिया है। यह पाकिस्तान, चीन या युद्ध सामग्री बनाने वाली कम्पनियां भी हो सकती हैं।

भारत नि:संदेह एक ऐसे दौर से गुज़र रहा है जहां, स्वार्थ का बोलबाला है। आज जब यह बार-बार सिद्ध हो चुका है कि भारत के हिंदुओं की संवेदनशीलता व उनमें दूरदृष्टि का अभाव उनको स्वार्थी बनाते है और वे आज के लिए अपने ही कल की हत्या बार-बार करते हैं, तब यह अंतराष्ट्रीय मकड़जाल और भी भयावह है।

मेरा मित्रों से यही आग्रह है कि यह संक्रमणकाल है। यह काल अर्जुन की दुविधा का काल नहीं है। यह एक युद्ध है और हमारे लिए सिर्फ नेतृत्व का आंख बंद कर भरोसा करके अपने शत्रुओं का संहार करने का काल है।

यह जो आज हुआ है, इससे भी बड़े बड़े अभी और आक्रमण होंगे और ये आपके विश्वास को लड़खड़ाने का प्रयास करेंगे। यहां आप यह याद रखिये कि इन द्रोहियों को यह अच्छी तरह पता है कि आपके होते काँग्रेस या कोई भी गठबंधन उनको जीतने नहीं देगा इसलिये वे आपके विश्वास व मन से खेलेंगे। वे आपको युद्ध भूमि से दूर दुविधा, संशय व हीनता के जगत में ले जाना चाहते हैं।

वो षडयंत्र करते रहेंगे लेकिन आप उनका प्रतिघात करते रहिये क्योंकि 2019 का चुनाव जहां न सिर्फ भारत के अस्तित्व का भविष्य तय करेगा बल्कि यह भी तय करेगा कि भारत के हिंदुओं की अगली पीढ़ी श्राद्ध करने वाली होगी कि नहीं।

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