ये क्या… ये तो बहुत बड़ा फाउल मार गये नेहरू

बात है वर्ष 1948 की जब होलकर राजघराने का वारिस चुनने की बात चली।

तो ज़ाहिर है कि बेटा ही वारिस बनेगा। पर यही पेंच फंस गया।

यशवंतराव द्वितीय ने दो विवाह किए थे। एक भारतीय महिला से और एक अमेरिकन महिला से।

भारतीय महिला की बेटी थी उषा राजे होलकर। जबकि अमेरिकन महिला के बेटे थे शिवाजी राजे होलकर जो रिचर्ड होलकर के नाम से प्रसिद्ध हैं।

रिचर्ड को वारिस बनाने का वक्त आया तब उस वक्त के प्रधानमंत्री नेहरू, गृह मंत्री वल्लभभाई पटेल और राष्ट्रपति राजेन्द्र प्रसाद ने साथ में बैठकर निर्णय किया कि होलकर का वारिस रिचर्ड नहीं बन सकते क्योंकि वे एक विदेशी महिला की संतान हैं।

इस लिए वारिस बेटी उषा राजे होलकर को बनाया गया।

हालांकि रिचर्ड को संपत्ति में हिस्सा मिला। उनके बेटे का नाम यशवंत होलकर है, जिनकी शादी गोदरेज घराने की बेटी से हुई है। रिचर्ड की बेटी सबरीना की शादी गोआ के राजघराने में हुई है।

तन, मन, धन से भारतीय रिचर्ड को वारिस नहीं बनाया गया।

क्योंकि उस वक्त के प्रधानमंत्री ने ये नहीं चाहा कि किसी विदेशी महिला की संतान इस देश में राजकाज करे।

तो अब सवाल ये उठता है कि ये काँग्रेसी किस मुंह से राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनवाना चाहते है।

क्या वो भूल गए कि उनके खुद के दल के सुपर पावर अध्यक्ष ने क्या निर्णय लिया था?

भई, अपने को तो नेहरू का ये निर्णय बहुत पसन्द आया।

इस बात पर गौर करना चाहिए। राहुल को प्रधानमंत्री बनने से रोकने के लिए उन्हें उनके पिता के नाना का फैसला ही दिखा देना चाहिए।

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY