सर्वानन्द कौल ‘प्रेमी’: सेकुलरिज्म को माथे लगाया उसी पर विधर्मियों ने ठोक दी कील

धर्म व्यक्ति को कर्तव्यपरायण होने का मार्ग दिखाता है उसका किसी फेथ, रिलिजन, समुदाय, पन्थ अथवा सम्प्रदाय से कोई सम्बंध नहीं होता. वहीं दूसरी तरफ सेक्युलर होने का प्रचलित अर्थ है किसी रिलिजन के प्रति पक्षपाती न होना. सर्वानन्द कौल उनमें से थे जिन्होंने सेकुलरिज्म को अपना धर्म समझा था. सर्वानन्द कौल के ऊपर माता … Continue reading सर्वानन्द कौल ‘प्रेमी’: सेकुलरिज्म को माथे लगाया उसी पर विधर्मियों ने ठोक दी कील