ममता की रैली में बहुत कुछ कह गया कुछ शब्दों के ‘सन्नाटे का शोर’

आज ममता बनर्जी की रैली में नेताओं के भाषण के शब्दों को खंगाला। सारांश यह निकला कि वे प्रधानमंत्री मोदी से बेहद क्षुब्ध हैं।

उन्होंने कहा कि ‘मोदी ने लालू प्रसाद यादव को नहीं छोड़ा, अखिलेश यादव को नहीं छोड़ा, मायावती और मुझे भी नहीं छोड़ा’, और फिर पूछा कि फिर आप सब को क्यों छोड़ेंगे?

आरोप लगाया कि नौकरियां हैं नहीं, पर आरक्षण दे रहे हैं। नोटबंदी और GST की आलोचना की। संविधान बचाने और सेक्यूलर उसूलों को ज़िंदा रखने की बात की। विपक्ष से एकजुट होकर मोदी सरकार को सत्ता से बाहर करने की अपील की।

रोना रोया कि मोदी सरकार ने किसान, गरीब, मज़दूरों और दलितों को परेशान किया है। आरोप लगाया कि सीबीआई की इज़्ज़त को तार-तार कर दिया।

लेकिन कुछ शब्दों और मुद्दों को सुनने के लिए कान तरस गए।

पहला प्रमुख शब्द है – आतंकवाद। किसी भी विपक्ष के नेता ने यह रोना नहीं रोया कि भारत में लोग आतंकी हमले में मर रहे हैं, भारतीय अपने-आप को असुरक्षित समझ रहे हैं।

दूसरा मुद्दा विकास के बारे में है। किसी भी नेता ने यह दावा नहीं किया कि मोदी सरकार के समय भारत की विकास दर कमज़ोर है तथा वे सत्ता में आकर भारत की विकास दर को बढ़ा देंगे।

तीसरा मुद्दा, महागठबंधन ने हुंकार ही नहीं भरी कि वे भारत के दुश्मनों की नानी याद दिला देंगे। यह मैं समझ सकता हूँ क्योंकि राष्ट्र की सुरक्षा अब सुदृढ़ हो गयी है और आतंकी दुश्मन कंगाल।

चौथा मुद्दा, किसी भी नेता ने यह नहीं कहा कि वे SC एक्ट को हटा देंगे। ना ही उन्होंने यह गारंटी दी कि प्राकृतिक संसाधनों पर पहला अधिकार अल्पसंख्यकों का होगा।

पांचवां, मेरा दिल कह रहा था कि शायद एक नेता तो हुंकार लगाएगा कि मंदिर वही बनाएंगे। शायद भूले-भटके ही बोल देता कि वह सत्ता में आते ही राम मंदिर निर्माण के लिए अध्यादेश लाएंगे। यहाँ तक कि यदुवंशी अखिलेश और तेजप्रताप ने भी मुंह सिल लिए।

छठवां, किसी ने भी जम्मू-कश्मीर समस्या को नहीं उठाया कि कैसे वह वहां के भोले-भाले, ‘रूठे’ हुए लोगों को कौन सा लॉलीपॉप देकर मनाएंगे या 370 समाप्त कर देंगे।

सातवां, किसी भी नेता ने यह नहीं कहा कि कैसे वे भ्रष्टाचार समाप्त कर देंगे। यह भी वादा नहीं किया कि वे ‘निर्दोष’ लालू प्रसाद यादव को जेल से रिहा कराएँगे। बेचारे जगन्नाथ मिश्रा ही चारे घोटाले में एकमात्र दोषी हैं और अकेले मिश्रा जी ही जेल में सड़ते रहेंगे।

आठवां, अगर GST खराब है तो सत्ता में आने के बाद उसे हटाने की बात भी नहीं की।

नौवां, सीबीआई की स्वायतत्ता कैसे बनाएंगे, इस पर भी चुप्पी साध गए! क्या सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को सीबीआई निदेशक की नियुक्ति और बर्खास्तगी वाली समिति से हटाकर स्वायतत्ता सुनिश्चित करेंगे?

अंत में, भारत के टुकड़े-टुकड़े करने वाले गैंग और नक्सलवादियों से निपटने का भी आश्वासन नहीं दिया। जैसे कि यह समस्या अस्तित्व में ही नहीं है।

मुझे पूर्ण विश्वास था कि इन मुद्दों पर अपनी स्पष्ट राय रखकर विपक्ष मोदी सरकार को सत्ता से बेदखल कर सकता था।

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