कितने कृतघ्न, कमीने, घिनौने और देशद्रोही हैं कुछ लोग!

जिस व्यक्ति ने आज से चार दशक पहले अपने प्राणों को दांव पर लगाकर पूर्वोत्तर के खूंख्वार हत्यारे आतंकवादियों के बीच घुसपैठ की, उनके आतंकी नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया। जिस व्यक्ति ने तीन दशक पहले स्वर्ण मन्दिर में कब्ज़ा किये बैठे 300 हथियार बंद आतंकवादियों के बीच अकेले और निहत्था घुसकर अपने प्राणों को … Continue reading कितने कृतघ्न, कमीने, घिनौने और देशद्रोही हैं कुछ लोग!