कितने कृतघ्न, कमीने, घिनौने और देशद्रोही हैं कुछ लोग!

जिस व्यक्ति ने आज से चार दशक पहले अपने प्राणों को दांव पर लगाकर पूर्वोत्तर के खूंख्वार हत्यारे आतंकवादियों के बीच घुसपैठ की, उनके आतंकी नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया।

जिस व्यक्ति ने तीन दशक पहले स्वर्ण मन्दिर में कब्ज़ा किये बैठे 300 हथियार बंद आतंकवादियों के बीच अकेले और निहत्था घुसकर अपने प्राणों को फिर दांव पर लगाया और उन 300 हथियारबंद आतंकवादियों के तंत्र का सफाया कर दिया।

जो व्यक्ति लगातार 7-8 वर्षों तक अपने प्राणों को दांव पर लगाकर पाकिस्तान में जासूस बनकर रहा। उसकी जड़ें खोखली करता रहा। पाकिस्तानी फौज नेता और मीडिया जिसको आज भी पानी पी पीकर कोसती रहती है।

आज मां भारती के उसी देशभक्त सपूत अजित डोवाल के ख़िलाफ़ ज़हर फैलाने का देशघाती कुकर्म खुलेआम प्रारम्भ हुआ है। देश को आज़ादी दिलाने का एकमात्र ठेकेदार होने का दावा करने वाली कांग्रेस अपने क्षणिक और क्षुद्र राजनीतिक लाभ के लिए इस देशघाती कुकर्म को अपना समर्थन/ संरक्षण खुलकर दे रही है।

उल्लेखनीय है कि आलोक वर्मा नाम के जिस CBI डायरेक्टर को लात मारकर CBI से खदेड़ा गया, वो चोरी-चोरी अजित डोवाल के फोन टैप करवा रहा था।

आलोक वर्मा यह देशघाती कुकर्म क्यों और किस के कहने पर कर रहा था? यह इसी से पता चल जाता है कि राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे समेत पूरी कांग्रेसी फौज उस आलोक वर्मा के समर्थन में सरकार के ख़िलाफ़ खुलकर ज़हर उगल रही है। उसको ढाई महीने का सेवा विस्तार देने की मांग प्रचण्ड धूर्तता से कर रही है।

ज्ञात रहे कि देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के पद पर बैठे व्यक्ति का फोन टैप कराने का कोई अधिकार CBI डायरेक्टर के पास नहीं होता। इसके लिए उसे तथ्यों को प्रस्तुत कर केन्द्र सरकार से अनुमति लेनी पड़ती है।

लेकिन सबको अंधेरे में रखकर बिना किसी अनुमति के ही आलोक वर्मा चोरी-चोरी अजित डोवाल का फोन क्यों टैप कर रहा था? किसके कहने पर कर रहा था?

यदि सरकार ने उसे ऐसा करने के लिये कोई आदेश नहीं दिया था, आलोक वर्मा ने सरकार को सूचित कर अनुमति नहीं ली थी, तो फिर देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के फोन टैप करके आलोक वर्मा किस को देना चाह रहा था? उन टेप को या तो पाकिस्तान या फिर चीन को बेचने वाला था!

या फिर आलोक वर्मा के देशघाती कुकर्म के पक्ष/ समर्थन और बचाव का प्रयास जिस निर्लज्जता के साथ कांग्रेस कर रही है, उसे देख सुन कर यह भी प्रतीत हो रहा है कि आलोक वर्मा सम्भवतः कांग्रेस के इशारे पर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के फोन टैप कर रहा था।

क्या कांग्रेस ने उन फोन टेप से सम्बन्धित कोई डील चीन और पाकिस्तान से की हुई थी?

यह सवाल इसलिए स्वाभाविक है क्योंकि चीन के राजदूत के साथ राहुल गांधी की गुप्त मुलाक़ात, फिर उस मुलाक़ात को छुपाने नकारने की कांग्रेसी कोशिश देश देख चुका है।

कांग्रेस के नेता मणि शंकर अय्यर को पाकिस्तान जाकर पाकिस्तान से मोदी सरकार का तख्ता पलट देने की भीख जयचंद की तरह मांगते हुए भी देश देख चुका है।

राफेल जहाज के एक-एक पुर्जे की जानकारी उजागर कर देने की मांग राहुल गांधी लगातार कर ही रहे हैं।

अतः राहुल गांधी और उनकी कांग्रेस यह बताए कि शतप्रतिशत पाकिस्तान के जासूस की भांति आचरण करने वाले आलोक वर्मा के समर्थन की राजनीतिक नंगई पर कांग्रेस क्यों उतारू हो गयी है?

उपरोक्त घटनाक्रम के अलावा अजित डोवाल के विरुद्ध एक अन्य ज़हरीला अभियान छेड़ा गया है।

जज लोया की मौत से सम्बन्धित सरासर झूठी खबर गुजरात चुनाव से कुछ समय पूर्व छापने वाली कांग्रेसी टॉयलेट पेपर सरीखी एक अंग्रेज़ी पत्रिका ने अब फिर एक फ़र्ज़ी खबर छापी है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल के बेटे हज़ारों करोड़ के हवाला रैकेट का संचालन कर रहे हैं।

इस खबर पर कांग्रेस प्रायोजित पत्रकार/ चाटुकार मंडली का तांडव प्रारम्भ हो चुका है।

देश के दुश्मनों की आंख का काँटा सिद्ध हो रहे अजित डोवाल के खिलाफ ऐसा घृणित दुष्प्रचार अभियान यह बताता है कि कितने कृतघ्न, कमीने, घिनौने और देशद्रोही हैं कुछ लोग।

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