कुंभ से लौटकर : कुंभ नहीं देखा तो सनातन नहीं देखा

कुम्भ यानी सभ्यता की समीक्षा। सनातन पर विमर्श। समाज की चेतना में बदलाव का विश्लेषण। धर्मयात्रा की दृष्टिगत त्रुटियों में संशोधन एवं सुधार। यदि कोई संकट आसन्न है तो उसका निदान। राजनीति की शुचिता और जनता के सरोकारों पर चिंतन। सनातन जीवन संस्कृति को विशुद्ध बनाये रखने और सभ्यता के साथ सामंजस्य की तलाश। भारत … Continue reading कुंभ से लौटकर : कुंभ नहीं देखा तो सनातन नहीं देखा