कुंभ से लौटकर : कुंभ नहीं देखा तो सनातन नहीं देखा

कुम्भ यानी सभ्यता की समीक्षा। सनातन पर विमर्श। समाज की चेतना में बदलाव का विश्लेषण। धर्मयात्रा की दृष्टिगत त्रुटियों में संशोधन एवं सुधार। यदि कोई संकट आसन्न है तो उसका निदान। राजनीति की शुचिता और जनता के सरोकारों पर चिंतन। सनातन जीवन संस्कृति को विशुद्ध बनाये रखने और सभ्यता के साथ सामंजस्य की तलाश। भारत की एकता, अखण्डता और प्रभुसत्ता पर व्यापक मंथन।

जी हां.. कुम्भ के यही निहितार्थ होते हैं। इसीलिए कुम्भ जैसे आयोजन की प्रतीक्षा रहती है ताकि इस अवसर पर जो आस्था और सनातन विश्वास के प्रश्न हैं उनको मिल बैठ कर हल कर लिया जाय। यही वह समागम है जब सभी जिम्मेदार एक बिंदु पर मिलते हैं और विमर्श का भरपूर समय होता है। समाज के सञ्चालन की बाधाओं से मुक्ति। राजनीति की विसंगतियों का समाधान।आस्था के प्रश्नों का स्थायी शांतिपूर्ण समाधान। इन्हीं के लिए भगवान् शंकराचार्य ने कुंभ की व्यवस्था दी।

आज के समय में कुंभ अपने मूल अर्थों में कितना सार्थक इसे वर्तमान भारत के किसी सबरीमाला या श्रीरामजन्मभूमि के प्रश्नों सहित तमाम अनसुलझे सामयिक मुद्दों का ध्यान कर समझा जा सकता है। और फिर यहीं समूची सनातन थाती, तीन कड़ियाँ, तेरह अखाड़े, 147 संप्रदायों के संचालकों और इनके भी शीर्ष पर स्थापित शंकराचार्य परंपरा को समाहित किये हुए सनातन का महापर्व कुंभ वर्तमान समाज, देश के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है।

हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार त्रिवेणी संगम के पवित्र जल में डुबकी लगाकर मनुष्य अपने समस्त पापों को धो डालता है। पवित्र गंगा-यमुना में डुबकी लगाने से मनुष्य और उसके पूर्वज दोषमुक्त हो जाते हैं। इस बार 2019 कुंभ का उत्तर प्रदेश में स्थित तीर्थराज प्रयाग में 15 जनवरी (मकर संक्रांति) से शुरू हो गया है जो 5 मार्च (महाशिवरात्र‍ि) तक चलेगा।

कुंभ मेले का इतिहास कम से कम 850 साल पुराना है। भारत में हरिद्वार, इलाहबाद, उज्जैन और नासिक में कुंभ लगता है। हर तीन साल बाद कुंभ दूसरे स्‍थान पर लगता है जिसकी वजह से अपने पहले स्थान पर यह 12 साल बाद आता है। कुंभ के दौरान 6 प्रमुख स्नान तिथियों को शाही स्‍नान होगा। इनमें 15 जनवरी मकर संक्रांति, 21 जनवरी पौष पूर्ण‍िमा, 4 फरवरी मौनी अमावस्‍या, 10 फरवरी बसंत पंचमी, 19 फरवरी माघी पूर्ण‍िमा, 4 मार्च म‍हाशिवरात्र‍ि शामिल हैं।

12 लाख की आबादी वाले शहर प्रयागराज में पहले दिन दो करोड़ लोगों ने गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम में डुबकी लगाई। एडीएम कुंभ दिलीप कुमार त्रिपुरायन के हवाले से दो करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं के स्नान की पुष्टि उत्तर प्रदेश सरकार ने की है। संगम स्थल पर 24 प्रवेश द्वार बनाए हैं। हर द्वार पर गिनती हो रही है।

कुंभ मेला प्रशासन के मुताबिक पहले शाही स्नान पर 14 अखाड़ों के 10 हजार से ज्यादा साधु-संतों ने संगम पर स्नान किया।मकर संक्रांति पर सुबह ब्रह्ममुहूर्त में 5.15 बजे कुंभ का पहला शाही स्नान शुरू हुआ। सबसे पहले महानिर्वाणी और श्री पंचायती अटल अखाड़े ने स्नान किया। किन्नर और जूना अखाड़े एक साथ तीसरे नंबर पर पहुंचे। इस दौरान विभिन्न अखाड़ों के साधु-संत सोने-चांदी की पालकियों, हाथी-घोड़े पर बैठकर संगम पर पहुंचे।

श्रद्धालुओं पर हेलीकॉप्टर से फूलों की बारिश की गई। संगम पर सुबह 10 डिग्री से भी कम तापमान था। प्रयागराज कुंभ में पहली बार किन्नर अखाड़े ने भी शाही स्नान किया। अखाड़े की प्रमुख लक्ष्मी नारायण ने सबसे पहले स्नान किया। इसके बाद अन्य करीब 500 किन्नर संन्यासियों ने स्नान किया। तीन भागों में बंटे सभी 14 अखाड़ों को संन्यासी, बैरागी और उदासीन भागों में बांटा गया है। सबसे पहले संन्यासी अखाड़े, फिर बैरागी और अंत में उदासीन अखाड़ों के साधु-संतों ने स्नान किया। सभी अखाड़ों को स्नान के लिए 30 से 45 मिनट दिया गया था।

पहले दिन बड़ी संख्या में विदेशियों ने भी स्नान किया। कुंभ में 180 देशों के लोगों के आने की उम्मीद है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने कुंभ मेले के लिए कई खास इंतजाम किए हैं। कुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या को ध्यान में रखते हुए सरकार ने मेले में वर्ल्ड क्लास सैनिटेशन की व्यवस्था की है। इसके लिए मेला क्षेत्र को पूरी तरह से खुले में शौच से मुक्त करने के लिए एक लाख 22 हजार 500 शौचालय बनाये गए हैं। सैनिटेशन को लेकर कुंभ मेले का नाम गिनेस बुक ऑफ वर्ल्ड ऑफ रेकॉर्ड में नाम दर्ज कराने के उद्देश्य से सरकार ने कई बड़े इंतजाम किए हैं। मेले में आने वाले करीब 15 करोड़ श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए कुंभ मेले के दौरान करीब 35 हजार सफाईकर्मियों की तैनाती है। हर 250 मीटर पर शौचालय निर्मित हैं। मेले की कुल 250 किमी रोड पर हर 250 से 300 मीटर पर टॉइलट का इंतजाम है।

मेले में प्रतिदिन 1500 बेड की क्षमताओं के एक से अधिक अस्पताल कार्य कर रहे हैं। 750 बेड की क्षमता रिजर्व में रखी गयी है जिसके लिए प्रतिष्ठित डॉक्टरों के साथ ही एमबीबीएस और आयुष के चिकित्सकों और हेल्थ वर्कर्स को भी तैनात किया गया है। इमर्जेंसी की स्थिति में मेले में 150 ऐम्बुलेंस, एयर ऐम्बुलेंस और बोट ऐम्बुलेंस भी व्यवस्था है।

14 से कम उम्र के बच्चों को रेडियो टैग लग रहा है। पुलिस कुंभ में 14 साल से कम उम्र के बच्चों को रेडियो फ्रीक्वेंसी आईडेंटिफिकेशन (आरएफआईडी) टैग लगा रही है। ताकि भीड़ में खोने वाले बच्चों का पता लगाया जा सके। पुलिस ने इसके लिए 40,000 आरएफआईडी टैग मंगाया है। आरएफआईडी बेतार संचार का साधन है। इससे किसी वस्तु या व्यक्ति का पता लगाने के लिए इलेक्ट्रो-मैग्नेटिक स्पेक्ट्रम के रेडियो फ्रीक्वेंसी हिस्से में विद्युत चुंबकीय तरंगों का इस्तेमाल किया जाता है।

कुंभ मेले में श्रद्धालुओं को मौसम की जानकारी देने वाला एप लाॅन्च किया गया है। श्रद्धालुओं को मौसम की जानकारी देने वाला मोबाइल एप कुंभ मेला वेदर सर्विस उपलब्ध है। मेले में 15 खोया-पाया सेंटर बनाए गए हैं।

कुंभ में तीर्थयात्रियों के ठहरने के विभिन्न अखाड़ों, शिविरों के परिसरों में टेंट निर्माण की पारंपरिक व्यवस्थाओं के साथ ही उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने पीपीपी मॉडल पर 50 एकड़ में सभी सुख-सुविधाओं से युक्त टेंट सिटी बसाया गया है जिसकी क्षमता 1 हजार अतिथि प्रतिदिन की है।

इस सबके बीच त्रिवेणी क्षेत्र में गंगा और जमुना दोनों ही नदियों के जल की शुद्धता और सफाई भी अपने सुखद रूप में मौजूदगी दर्ज करा रही है। पहली ही नजर में नदियों के जल का बड़ा हुआ स्वच्छता स्तर लोगों का ध्यान आकृष्ट कर रहा है। संगम नोज (नदियों के मिलन स्थल) तक नावों से जा कर स्नान करना तीर्थयात्रियों में बहुत ही लोकप्रिय है। इसमें नावों के लिए छोटे प्लास्टिक पैंटून से सुव्यवस्थित ढंग से 4 लेन की जल-सड़क का निर्माण जल यातायात को सुगम और सुरक्षित बना रहा है।

मेला क्षेत्र में 40 पुलिस थाने, 3 महिला पुलिस थाना और 60 पुलिस चौकियों के साथ 4 पुलिस लाइनें कुंभ मेला के एक भाग के रूप में स्थापित किये गए हैं। इसी के साथ कुम्भ के नदी क्षेत्र के चारों ओर जल पुलिस तीन ईकाइयां स्थापित करेगी 1 घुड़सवार पुलिस लाइन स्थापित है।

भीड़ प्रबंधन हेतु वीडियो विश्लेषण भीड़ प्रबंधन हेतु वास्तविक समय वीडियो के जरिये अत्यधिक भीड़ की दशा में वास्तविक समय की खोज एवं चेतावनी की व्यवस्था है। लघुगणक स्वचालित नम्बर प्लेट पहचान तंत्र (ए०एन०पी०आर०) रंगों से वाहनों की पहचान वाहन का रंग/अनुज्ञप्ति प्लेट से वाहन की खोज एवं तिथि समय संयोजनबदलती हुई संदेश सम्प्रदर्शन बोर्ड वास्तविक काल की सूचना, चेतावनी प्रसारण, यातायात सुझाव, मार्ग दिशा-निर्देश एवं आकस्मिक संदेशविषय वस्तु एवं चित्र आधारित संदेश सम्प्रदर्शन के साथ समेकित यातायात प्रबंधन तंत्र की स्थापना जैसे प्रबंध सनातन के इस महापर्व कुंभ को भव्य, विराट बनाने के साथ ही स्वच्छ और सुरक्षित बना रहे हैं।

कुंभ नहीं देखा तो सनातन नहीं देखा : इसलिए बन सके तो सुविधानुसार कुंभ 2019 प्रयागराज में जाने का कार्यक्रम जरूर बनाइये।

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