मोदी को प्रेसिडेंशियल लीडरशिप अवार्ड : राहुल गांधी और मीडिया में लुटयंस दलालों के झूठ का सच

जब से भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वर्ल्ड मार्केटिंग समिट (WMS), द्वारा प्रथम ‘फिलिप कोटलेर प्रेसिडेंशियल लीडरशिप अवार्ड’ दिया गया है तब से मीडिया में लुटयंस (Lutyen’s) के दलालों द्वारा इस अवार्ड को लेकर मोदी जी का उपहास किया जा रहा है।

इस की शुरुआत कुख्यात वामपंथी न्यूज़ पोर्टल ‘द वायर’ ने की, जिसने इसको इस तरफ प्रस्तुत किया जैसे यह कोई बिकाऊ अवार्ड है जिसे मोदी जी ने खुद को दिलवाया है। उसके साथ में यह भी जोड़ दिया कि इस पुरस्कार का स्वयं फिलिप कोटलेर से कोई सीधा लेना देना भी नहीं है।

सीधे अर्थों में ‘द वायर’ और उसके साथ के मीडिया वाले, भारत की जनता को यह बता रहे है कि मोदी जी ने अपनी छवि चमकाने व देश की जनता को बेवकूफ बनाने के लिए यह एक अनाम सा पुरस्कार खरीदा है।

इसी समाचार को लेकर राहुल गांधी भी ले उड़े और उन्होंने मोदी जी को इस पुरस्कार मिलने की बधाई देते हुए कटाक्ष किया कि पहली बार दिया गया यह पुरस्कार इतना प्रसिद्ध है कि इसके चयन करने की कोई समिति नहीं है।

इस पुरस्कार को लेकर विवाद खड़ा किये जाने का प्रथम दृष्टया कारण यही है कि राहुल गांधी और उनके मीडिया के दलालों को भारत की जनता की उदासीनता, अल्पज्ञान व स्वार्थीपन पर पूरा विश्वास है। वे पूर्व में भी ऐसे बहुत से झूठों से भारत की जनता को सफलतापूर्वक बेवकूफ बना चुके हैं, यह उसी की एक अग्रिम कड़ी है।

मुझको इस बात को लेकर बेहद आक्रोश है कि यद्यपि मीडिया में कोई भी ऐसा नहीं होगा जो फिलिप कोटलेर को नहीं जानता होगा लेकिन उसके बाद भी भारत की वैश्विक स्तर पर छिछालेदारी इन लोगों ने करवाई है।

इस विवाद का परिणाम यह हुआ कि स्वयं फिलिप कोटलेर को मीडिया और सोशल मीडिया पर आकर भारत की मीडिया व कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी के झूठ को विश्व के सामने उजागर करना पड़ा है।

मैं जानता हूँ कि राहुल गांधी के साथ भारत में बहुत से लोग फिलिप कोटलेर के नाम से परिचित नहीं होंगे लेकिन विश्व, फिलिप कोटलेर को ‘आधुनिक विपणन का पितामह’ (Father of Modern Marketing) के नाम से पहचानती है।

कोटलेर, केलोगग स्कूल ऑफ मैनेजमेंट में इंटरनेशनल मार्केटिंग के प्रोफेसर है, जिन्होंने 70 किताबें लिखी हैं। जिन्हें न सिर्फ एक विचारक माना जाता है बल्कि विश्व में उन्हें विक्रेता (मार्केटर) जगत का अबतक का सबसे प्रभावशाली व्यक्तित्व माना गया है।

वर्तमान में फिलिप कोटलेर का ध्यान व अध्यन पूरी तरह ब्रांड एक्टिविज़्म, लोकतंत्र व लोकहित और पूंजीवाद की समस्याओं पर केंद्रित है। कोटलेर ने अपने इसी मनन को विस्तार और जगत की भावी पीढ़ी को मार्केटिंग द्वारा एक बेहतर दुनिया देने के उद्देश्य से, 2010 में द वर्ल्ड मार्केटिंग समिट (WMS) नाम की विश्वव्यापी संस्था की स्थापना की है।

उनकी इस वैश्विक परिकल्पना को धरातल पर सफल बनाने में व्यवहारिक योगदान देने वाले नेतृत्व को सम्मानित करने के लिए ही संस्था द्वारा ‘फिलिप कोटलेर प्रेसिडेंशियल लीडरशिप अवार्ड’ की स्थापना की है।

संस्था का मानना है कि एक राष्ट्र का राजनीतिक नेतृत्व उस राष्ट्र का सिर्फ प्रधान नेता ही नहीं होता है बल्कि वह अपने राष्ट्र की छवि का अभिवावक (brand guardian of the nation) भी होता है। वह कैसा व्यवहार करता है वह पूरे राष्ट्र पर परिलक्षित होता है। यह भारत के लिए गर्व का विषय है कि उनकी इस संस्था ने मोदी जी को इस पुरस्कार के लिए अपना प्रथम आदर्श चुना है।

इस पुरस्कार पर भारतीय मीडिया व राजनीतिक वर्ग द्वारा विवाद खड़ा किये जाने के जवाब में कोटलेर ने कहा है कि इस पुरस्कार का उद्देश्य, एक ऐसे प्रमुख राजनेता को सम्मानित करने का है जिसने अपने राष्ट्र के लोकतंत्र और आर्थिक विकास में नए प्राण फूंके है। जो शासन में सबको प्रतिनिधित्व व सामाजिक न्याय देता है। जिसको यह विश्वास है कि एक अच्छा समाज, व्यापार के लिए स्वस्थ वातावरण देगा और जो पूरी ईमानदारी और मन से सामान्यजन के भले के लिए काम करता है।

आगे कोटलेर ने कहा है कि, ‘पुरस्कार के लिए स्थापित मापदंडों पर प्रधानमंत्री मोदी को सर्वश्रेठ पाया गया है। उन्होंने वैश्विक मंच पर अपने राष्ट्र की छवि को चमकाया है और अलग पहचान बनाई है। यह बड़े खेद का विषय है कि मोदी जी को इस पुरस्कार देने पर भारत में विवाद खड़ा किया गया है क्योंकि यह पुरस्कार केवल मोदी जी का सम्मान नहीं है बल्कि यह भारत का सम्मान है।’

यह कितने दुर्भाग्य व विषाद का विषय है कि भारत की पत्रकारिता और कांग्रेस का चारित्रिक पतन उस निम्नता को प्राप्त हो गया है जहां अंध मोदी विरोध में स्वयं अपने राष्ट्र भारत की अस्मिता को वैश्विक मंच पर निर्लज्जता से निवस्त्र कर, उसे कलंकित कर रहे है। राहुल गांधी और उनके दरबारियों को यह नहीं भूलना चाहिए कि पूर्व में हस्तिनापुर के भरे दरबार में द्रोपदी का चीरहरण किया गया था जिसकी कीमत पूरे कुरु वंश ने चितावेदी पर चुकाई थी।

आज भारत एक बार फिर उस मोड़ पर खड़ा है जहां भारत की अस्मिता को कलंकित करने वालों को कीमत अपने अंत से ही देनी होगी।

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  1. सत्ता के भूखे दलाल कांग्रेसी और वामपंथियों से उम्मीद ही क्या की जा सकती है।

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