कल्ले खान डॉन – 1

कॉलेज का पहला दिन था, सभी अपनी क्लास अटेंड कर के घर जा रहे थे कि तभी कॉलेज के मेन गेट पर खड़े एक लड़के ने सब को रोक लिया और रैगिंग लेने लगा, बोला कल्ले, कल्ले नाम है हमारा, मेरी मर्ज़ी के बिना यहाँ पत्ता भी नही हिलना चाहिए, आज से मैं इस कॉलेज का डॉन हूँ।

दिखने में टिड्डी पहलवान कल्ले में कलेजा बहुत था, कम से कम ऊपरी तौर से तो वो ऐसा ही दिखाता था। पता चला कि कल्ले कॉलेज की टीचर रुबीना का बेटा है।

नए लड़कों पर जल्दी ही कल्ले ने अपना खौफ कायम कर लिया, और इसमें उसकी मदद की वहाँ के कुछ टीचर्स ने। जब भी कोई कल्ले खान की शिकायत ले कर जाए टीचर्स उसे ही गलत बता कर भगा देते, पता चला कि कल्ले उन्हें बाकायदा ‘खुश’ रखता है, किसी को पान-सिगरेट तो किसी को दारू की बोतल सप्लाई की जाती है।

कल्ले की गुंडागर्दी दिन ब दिन बढ़ती ही जा रही थी, बात बढ़ते बढ़ते कॉलेज के प्रिंसिपल तक पहुँची, लेकिन प्रिंसिपल भी कल्ले की तरफदारी करने लगा। पता चला प्रिंसिपल आलम सर का रुबीना मैडम से बहुत पुराना चक्कर था और कल्ले इन दोनों के नाजायज़ रिश्ते की नाजायज़ औलाद था।

बहुत कम समय में कल्ले ने अपना सिक्का जमा लिया था। प्रिंसिपल और टीचर्स जो कल्ले की गैंग के थे उसका खूब फायदा उठाते थे। जब भी गैंग के किसी टीचर का किसी से विवाद हो जाता तो तुरंत कल्ले को आगे कर दिया जाता, कल्ले उसे माँ बहन की गलियां देता मार पीट करता उसकी बेइज़्ज़ती करता। ये सब चरित्रहीन प्रिंसिपल, बदचलन रुबीना और भ्रष्ट टीचर्स की शह पर चलता रहा, कोई किसी के खिलाफ मुँह खोलने को तैयार नहीं था, क्योंकि हमाम में सभी नंगे थे।

समय ने करवट ली और प्रिंसिपल आलम सर की जगह नए प्रिंसिपल सुभाष सर का पदार्पण हुआ। बेहद कड़क मिज़ाज सुभाष सर एकदम पाक साफ थे, सुपारी तक नहीं खाते थे न चाय पीते थे। ऐसे में बदचलन रुबीना और भ्रष्ट टीचर्स की उनसे सेटिंग नही बैठ पा रही थी।

सुभाष सर ने आते ही भ्रष्टाचार पर नकेल कस दी, सभी गलत काम बंद करवा दिए, कॉलेज की शक्ल सूरत बदल दी, परिसर को एकदम साफ-स्वछ बना दिया, बिल्डिंग में रिपेयर मेंटेनेन्स करवाई, रंगाई पुताई करवाई, लैब में एक्सपेरिमेंट में लिए सभी जरूरी सामान मुहैय्या करवाया। भ्रष्टाचार में डूबे विरोधियों ने उन पर खूब आरोप लगाए पर उन्हें तनिक भी फर्क न पड़ा और स्टूडेंट्स भी उनसे बेहद खुश थे।

सभी भ्रष्टाचारी और कल्ले परेशान थे उनकी सल्तनत अब जाती रही थी। आखिरकार तुरुप के इक्के का इस्तेमाल किया गया। कल्ले को मैदान में उतारा गया। उसने सुभाष सर से खूब बदतमीज़ी की, उन्हें गालियां दी, प्रिंसिपल ने तुरंत कल्ले को कॉलेज से सस्पेंड कर दिया।

बदचलन रुबीना और भ्रष्ट टीचर्स कल्ले को बचाने पहुँच गए, बोले साहेब बच्चा है गलती हो गयी माफ कर दीजिए वर्ना इसका कैरियर खराब हो जाएगा। कल्ले ने हाथ पाँव जोड़े माफी मांगी, लेकिन उन्ही भ्रष्ट टीचर्स में से कुछ ईमानदारी का नाटक करते हुए बोले कि इसे सज़ा मिलनी ही चाहिए।

सुभाष सर कड़क मिज़ाज थे लेकिन रहम दिल भी थे, सो उन्होंने कल्ले को माफ कर दिया और हिदायत दी कि कभी दोबारा ऐसा न करे।

कल्ले एक बार फिर कॉलेज में आ चुका था, इस बार पहले से भी ज़्यादा बदतमीज़ हो कर। सब से कहता फिरता क्या उखाड़ लिया मेरा प्रिंसिपल ने? मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता, देखो मेरे साथ रुबीना और सभी भ्रष्ट टीचर्स हैं, मेरा कोई कुछ नही उखाड़ सकता।

ईमानदारी का नाटक करने वाले भ्रष्ट टीचर्स भी बोले हाँ सही है अगर कल्ले गलत था तो उसे सज़ा क्यों नहीं दी प्रिंसिपल ने?

बात सुभाष सर तक पहुंची पर उन्होंने इसे इग्नोर करना ही उचित समझा। कल्ले के हौसले अब पहले से भी ज़्यादा बुलंद हो चुके थे, हर किसी को गालीगलौच, मारपीट उसका रोज़ का काम हो गया था।

एक बार फिर वो प्रिंसिपल सुभाष सर से भिड़ गया, उनसे बदतमीज़ी और गाली गलौच करने लगा। जैसे ही प्रिंसिपल ने कार्यवाही की तो भरे मैदान में सबके सामने प्रिंसिपल को चैलेंज कर बैठा, बोला कर लो जो करना है, और बदचलन रुबीना के बुरखे के पीछे जा छुपा, बार बार बुरखे से निकल कर चुनौती देता कहता पुलिस बुलवाओ मुझे गिरफ्तार करवाओ अगर हिम्मत है तो और फिर बदचलन रुबीना के बुरखे के पीछे छुप जाता।

बड़ी ही कुटिलता के साथ बदचलन रुबीना और भ्रष्ट टीचर्स उसका “बच्चा है जी” कह कर बचाव करते, तो दूसरी तरफ ईमानदारी का नाटक करने वाले टीचर्स कटाक्ष करते प्रिंसिपल को नीचा दिखाने के लिए कहते अरे करवाओ ना गिरफ्तार, बैठे क्यों हो? चरित्रहीन आलम सर ने तो बाकायदा कल्ले को अपने यहाँ डिनर पर बुलवाया।

इस बार सुभाष सर बिल्कुल भी रियायत के मूड में नहीं थे सो उन्होंने पुलिस बुलवा कर कल्ले को गिरफ्तार करवा दिया। बदचलन रुबीना बुरखा उठा कर छाती पीट रही थी, भ्रष्ट टीचर्स कैंडल मार्च निकालने की सोच रहे थे, वहीं चरित्रहीन आलम सर को डर सता रहा था कि कहीं उनकी रंगीन ज़िन्दगी सबके सामने न आ जाये।

ईमानदारी का नाटक करने वाले भ्रष्ट टीचर्स को साँप सूंघ गया था वे खामोशी से मातम मना रहे थे, बेपर्दा होने के डर से सब एक हो कर कल्ले को सही बताने में जुट गए, पर बच्चे सब जानते थे वे प्रिंसिपल के साथ खड़े रहे, वे खुश थे उन्हें घुटन भरे माहौल से आज़ादी की ओर ले जाने वाला नायक उन्हें मिल चुका था।

ऐसा ही हाल कन्हैया कुमार का है, पहले देश को गाली दी फिर presstitutes के बुरखे में जा छुपा, presstitutes ने भी खूब बचाव किया देशद्रोही कन्हैया का, ‘लड़का है लड़कों से गलतियां हो जाती हैं’ का राग अलापते रहे, हाथ पैर जोड़ कर।

अदालत से ज़मानत मांग कर बाहर आये कन्हैया ने बाहर आते ही सरकार को चैलेंज ठोक दिया मुझे गिरफ्तार कर के दिखाओ जेल भेज कर दिखाओ (जेल तो पहले ही हो कर आया था)।

पूरी गैंग सक्रिय हो गयी देशद्रोही कन्हैया को बचाने में, कुछ लोग मोदी समर्थक बन कर लगातार मोदी पर निशाना साधते रहे “जेल में डालो”… अरे भैया जेल तो सरकार उसे भेज ही चुकी थी, कानून भी कोई चीज़ है कि नही? या फिर तालिबानी कानून चलाया जाए कि चौराहे पर ही बिना मौका दिए मार दें?

ख़ैर… इस बार सरकार किसी रियायत के मूड में नहीं थी सो देशद्रोही कन्हैया के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी गयी, अब ऐसे में बदचलन रुबीना रूपी presstitutes परेशान हैं बुरखा फाड़ कर चिल्ला रहे हैं “ये गलत है जी, बच्चा है जी”, वहीं चरित्रहीन आलम सर रूपी कुछ पार्टी अध्यक्ष परेशान हैं कि कल तक जिसके साथ फोटो खिंचवाई थी वो जेल जाएगा, कहीं हमारे नाजायज़ रिश्ते जनता के सामने उजागर न हो जाएं।

सबसे बुरा हाल तो भ्रष्ट टीचर्स रूपी मोदी समर्थकों (मोदी विरोधी पढ़ा जाए) का है, जो कल तक चिल्लाते फिरते थे “क्या कर लिया देशद्रोही कन्हैया का? चौकीदार कुछ न कर पाया” अब जब चार्जशीट दाखिल हो चुकी है तो उन्हें सांप सूंघ गया है, उनकी वॉल सूनी है मातम मन रहा है।

असलियत तो यह है कि भ्रष्टाचारियों और अय्याशों के नाजायज़ गठजोड़ की नाजायज़ औलाद की तरह है कन्हैया जैसे टिड्डी पहलवान, ये सिर्फ एक भाड़े के टट्टू के समान हैं, जिनका उपयोग कर के फेंक दिया जाता है, लेकिन तब तक इन्हें कॉन्ट्रैक्ट मर्डरर की तरह इस्तेमाल कर के एक ईमानदार, जो देश को सुधारने का काम करने की इच्छा रखता है, की बलि ले ली जाती है।

इस सब के बीच देश की जनता खुश है, उन्हें मोदी के रूप में अपना जननायक मिल चुका है, जो उन्हें भ्रष्टाचार घोटालों और स्कैम्स की घुटन से बाहर निकाल लाया है, और विकास की आज़ादी भरी हवा में अब वे सांस ले पा रहे हैं।

अभी ये बदचलन और भ्रष्टाचारी और हंगामा मचाएंगे, चौकीदार पर और आरोप लगाएंगे, पर आप डिगना मत, न अपने विश्वास को डिगने देना, पूरी ताकत के साथ चौकीदार के साथ खड़े रहना, उसका समर्थन करना।

किसी भी देश को 100 साल में एक बार किस्मत बदलने का मौका ज़रूर मिलता है, भारत को मोदी के रूप में मिला है, इस मौके को खो मत देना मेरे भाइयों, वर्ना पछताने के अलावा कुछ हाथ नहीं लगेगा, और देश एक बार फिर अय्याशों, घोटालेबाज़ों और भ्रष्टाचारियों के हाथ में चला जायेगा।

अपना और अपने बच्चों के भविष्य का ध्यान रख कर, देश का ध्यान रख कर मोदी के समर्थन में डट कर खड़े रहें, हर रिश्ते को ताक पर रख कर सिर्फ देश हित की बात कीजिये, जो देश का नहीं वो आपका कभी नहीं हो सकता।

जय हिन्द, वंदे मातरम।

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY