‘प्रगतिशील, ‘भारत रत्न’ नेहरू, इंदिरा, राजीव, सोनिया सरकारों के बावजूद भीषण गरीब थे अधिकतर भारतीय

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद कई राष्ट्र जो आर्थिक विकास के स्तर पर भारत के समकक्ष थे, हमें पछाड़ते हुए तेजी से प्रगति कर गए।

अमेरिका, चीन और रूस को छोड़कर बहुत से देश भारत के दो-तीन जिले के बराबर थे, और कुछ उत्तर प्रदेश से भी छोटे। जनसँख्या के मामले में तो कहीं ठहरते ही नहीं थे।

चीन, रूस और सिंगापुर को छोड़कर, सभी विकसित राष्ट्रों ने लोकतंत्र को अपना लिया। इन सभी राष्ट्रों की समृद्धि का प्रमुख स्रोत तेल के कुएं नहीं थे। ना ही अधिकतर देशों में अंग्रेज़ी बोली जाती थी।

इसके विपरीत भारत ने स्वतंत्रता के बाद लोकतंत्र अपनाया, इंग्लैंड में पढ़े नेहरू और उनके परिवार के नेतृत्व में विद्वानों और नौकरशाहों ने राष्ट्र को दिशा निर्देश दिया। आपातकाल का लाभ उठाकर राष्ट्र को सेक्युलर और समाजवादी भी बना दिया।

लेकिन फिर भी न तो गरीबी दूर हुई, न ही कृषकों को समृद्धि मिली, न ही समाजवाद मिला और दंगे एवं आतंकी हमले होते रहे।

अधिकतर जनसँख्या – 90 प्रतिशत से भी अधिक – गन्दगी, अँधेरे, मंहगाई, अभाव और भ्रष्टाचार में रहने को अभिशप्त थी। रेल टिकट से लेकर कुकिंग गैस, पेंशन, राशन, मार्कशीट का सत्यापन, सब में घूस देनी पड़ती थी। किसी भी उद्यम को लगाने में बीसियों क्लीयरेंस, परमिट और भाग-दौड़ की आवश्यकता थी।

एक तरह से हमने ‘जुगाड़’ और ‘सब चलता है’ के जुमलों से जीना सीख लिया था।

‘प्रगतिशील’, ‘भारत रत्न’ नेहरू, इंदिरा, राजीव, सोनिया सरकारों के बावजूद सब के सब भीषण गरीबी से जूझ रहे थे.

भारत की दरिद्रता और पिछड़ेपन का केवल एक कारण था : इन भारत रत्नों ने जनता और गरीबो का भला नहीं, सिर्फ और सिर्फ अपना और अपने परिवार के सदस्यों का भला किया है।

वोट गरीब से मांगे, वोट दलित से मांगे, वोट पिछड़ों से मांगे, उनके नाम पर सरकार बनाकर उन्‍होंने अपनी तिजोरियां भर लीं। इसके सिवा कुछ नहीं किया।

इन भारत रत्नों से प्रेरणा लेकर लालू, अखिलेश, मायावती इत्यादि ने भी समाजवाद और सेक्युलरिज़्म के नाम पर अरबों की सम्पत्ति बना ली।

आजकल जो कभी एक-दूसरे को देखना नहीं चाहते थे, पसंद नहीं करते थे, वो अब एकसाथ। अपने स्‍वार्थ के लिए यह सभी परिवारवादी पार्टियां मिल करके अब जनता के विकास को रोकने पर तुले हुए हैं; उन्हें सशक्त होने से रोकना चाहते हैं। उस अभिजात्य वर्ग को पता है कि अगर गरीब, किसान, दलित, पिछड़े सशक्‍त हो गए तो उनकी दुकानें हमेशा के लिए बंद हो जाएँगी।

भारत रत्नों और इनके सेक्युलर फॉलोवर्स, जनता को लॉलीपॉप (फ्री बिजली, पानी और लागत से कम रेल और बस टिकट इत्यादि) और स्लोगन (सामाजिक न्याय; धर्मनिरपेक्षता; आरक्षण इत्यादि) के द्वारा मूर्ख और जानबूझकर दीन-हीन और गरीब बनाये रखते है जिससे वे ‘मूर्ख’ कुछ टुकड़ों के लिए उस अभिजात्य वर्ग को सत्ता में बनाये रखते हैं।

इन्हें पता था कि हर सरकारी नीति से कुछ लोगों को लाभ, अन्य को हानि होगी। कुछ को विजय, अन्य को पराजय का सामना करना पड़ेगा।

सरकार सभी लोग को नौकरी नहीं दे सकती; पूरे विश्व में अधिकतर लोगों को रोज़गार निजी क्षेत्र में मिलता है। इसके बावजूद निजी क्षेत्र को विकसित नहीं होने दिया गया।

इस नीति ने नौकरी ढूढने वालों के लिए सरकार को माई-बाप और निजी क्षेत्र में कुछ लोगों का एकाधिकार बना दिया। इस एकाधिकार को बनाये रखने के लिए निजी क्षेत्र एक ही परिवार के भारत रत्नों को ‘बख्शीश’ देगा, बिटिया और दामाद को बिना कुछ करे हर वर्ष करोड़ों की इनकम देगा। बदले में निजी क्षेत्र को टैक्स चोरी और फर्जी कंपनियां बनाने की सुविधा।

कुछ को विजय, अन्य को पराजय।

भारत रत्न विदेशी निजी कंपनियों से डिफेन्स के लिए लड़ाकू विमान, एयरक्राफ्ट कैरियर, और बंदूके खरीदेंगे, लेकिन भारतीय निजी क्षेत्र को रक्षा संयंत्र नहीं बनाने देंगे।

कुछ की विजय (कमीशन), राष्ट्र की पराजय।

प्रधानमंत्री मोदी ने निजी क्षेत्र और उद्यमशीलता को बढ़ावा दिया है, मुद्रा लोन की योजना चलायी, 59 मिनट में लोन की स्वीकृति की व्यवस्था की जिससे निजी क्षेत्र में रोजगार बढ़े।

GST के द्वारा टैक्स दरों में पारदर्शिता आयी जिससे चुने हुए उद्योगपतियों को लाभ ना मिले।

आम जनता की विजय, अभिजात्य वर्ग के लोगों की पराजय।

प्रधानमंत्री मोदी भारत की भ्रष्ट संरचना को बदल रहे हैं। उस संरचना को जिससे भारत रत्नों और उनके मित्रों ने आम भारतीयों का शोषण करके अपने परिवार और खानदान को राजनैतिक और आर्थिक सत्ता के शीर्ष पर बनाए रखा था।

प्रधानमंत्री मोदी ऐसी व्यवस्थाओं को तोड़ रहे हैं, खत्म कर रहे हैं, जिन्होंने दशकों से देश के विकास को रोक रखा था।

मैंने क्यों लिखा कि अधिकतर भारतीय भीषण गरीबी से जूझ रहे थे? क्योंकि इस वर्ष भारत से भीषण गरीबी समाप्त हो जायेगी। इसका क्रेडिट एक चाय वाले को जाता है।

प्रधानमंत्री मोदी पर विश्वास बनाये रखे।

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