सुप्रीम कोर्ट ने भाजपा को नहीं दी पश्चिम बंगाल में रथयात्रा की अनुमति

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार के तर्कों से सहमत होते हुए राज्य में भाजपा को रथयात्रा को इजाजत नहीं दी है। सुप्रीम कोर्ट ने माना कि इस संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है कि इस रथयात्रा से सौहार्द बिगड़ेगा।

उल्लेखनीय है कि पहले भाजपा की पश्चिम बंगाल में 39 सभाएं होनी थी अब राज्य सरकार 20 करने को तैयार हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने भाजपा को सभा करने की अनुमति दे दी है।

इस पर राज्य सरकार ने दलील दी कि सभा में कितने लोग आएंगे और सभा कहां होगी, भाजपा ने अब तक नहीं बताया है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने भाजपा को कहा कि वह अपनी यात्रा का नया शेड्यूल पश्चिम बंगाल सरकार को दे।

इससे पहले राज्य सरकार ने कोर्ट में कहा ‘हमें सभा को लेकर आपत्ति नहीं है, रथयात्रा को लेकर आपत्ति है, क्योंकि भाजपा की यह यात्रा संवेदनशील इलाकों से गुज़रेगी। भाजपा एक दिन में दो हज़ार लोगों के जुलूस के साथ त्रिशूल लेकर संवेदनशील इलाकों से गुज़रेगी। काँग्रेस नेता और वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने पश्चिम बंगाल सरकार की तरफ से पैरवी की।

वहीं वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने पश्चिम बंगाल भाजपा की तरफ से पक्ष रखते हुए कहा कि राज्य सरकार का “शत्रुतापूर्ण” व्यवहार है, वह हमारे लोकतांत्रिक अधिकार का उल्लंघन कर रही है।

गत 8 जनवरी को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। राज्य भाजपा ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर कर कलकत्ता हाईकोर्ट की डिवीज़न बेंच के निर्णय पर रोक लगाने की मांग थी।

कोलकाता में भाजपा की प्रस्तावित ‘गणतंत्र बचाओ रथयात्रा’ पर हाईकोर्ट की डिवीज़न बेंच ने रोक लगा दी थी। जबकि इससे पहले कलकत्ता हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने भाजपा की प्रस्तावित रथयात्रा को मंजूरी दे दी थी, जिसके बाद ममता सरकार हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के इस निर्णय के विरुद्ध डिवीज़न बेंच के पास पहुंची थी।

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