संघर्ष कथा : चाइनीज़ झालर को देश से बाहर धकेलेगी ये भारतीय झालरें

सपना खरीदा एक प्यारा
चाहत जमीं पर बो दी मैंने
हिम्मत की खाद डाली है
तकलीफों से सींचा है मैंने
उगेगी फसल किताबों की
अफसाना मेरा भी पढ़ लेना

भविष्य की थाती पर नया अध्याय लिखने की सनक तभी आती है मुझमें जब मैं निरंतर स्वामी विवेकानंद जी की तस्वीर देखता रहता हूँ और उन्हें ना केवल पढ़ता रहता हूँ बल्कि आत्मसात भी करता हूँ।

चाण्क्य की चाहत जब एक चन्द्र गुप्त तैयार करने की समझता हूँ तो मुझमें कभी चाणक्य बनने का भूत सवार होता है ऐसे में जब चन्द्र गुप्त के किरदार के लिए कोई पात्र नहीं मिलता तो खुद बन जाता हूँ। लक्ष्य प्राप्ति तक अपने प्रयासों में जब भी शिथिलता आती देखता हूँ तो विवेकानंद जी को फिर स्मरण करते हुए पढ़ता हूँ।

पारिवारिक और सामाजिक जिम्मेदारियाँ जब आंशिक रूप से रुकावट बनती दिखती हैं तो बुल्लेशाह को पढ़ता हूँ। अटल जी की एक पंक्ति राड नहीं मानूँगा मुझे मेरे मुक्काम तक ले ही आती है।

बातें करना बहुत आसान होता है उन्हें साकार करके दिखाने की सनक ही क्रांतिकारी का दर्जा देती है। सच में ऐसे में जिन्दगी और ऊपर वाला इम्तिहान भी सारे लेता है। सामाजिक परिवेश कभी हँसता है तो कभी हत्तोतसाहित करता है। भविष्य की थाती पर इतिहास लिखना इतना सरल नहीं होता। यदि होता तो सबने लिखा होता।

आज अपने सभी अग्रजों को नमन करते हुए चाहत है एक आशीर्वाद की मुझे मेरे लक्ष्य से भटकने मत देना मुझमें निरंतर नई ऊर्जा का संचार करना मेरी चाहत भविष्य की थाती पर इतिहास लिखने की है।

स्वामी विवेकानंद जी को नमन करते हुए एक प्रण की जहाँ चाणक्य बनना है वहाँ चाणक्य बनूँ और जो भी चन्द्र गुप्त दिखे उसे तराश दूँ और उचित पात्र ना मिले तो खुद बन जाऊँ पर राड ना मानूँ ठार ना मानूँ।

हाँ आज मुझे जरूरत है सबकी दुआओं की भोले बाबा की इच्छा है मुझसे कुछ कराने की तो विश्वास है कि वो मेरे तारणहार के रूप में किसी ना किसी को जरूर भेजेंगे जो आकर कहेगा चिंता ना कर मैं हूँ ना…

सूर्य का ऊत्तरायण होना अंधेरे में रोशनी करने के प्रयासों के लिए शुभ फलदायी हो ऐसी मधुर कामना के साथ प्रभु से उम्मीद भरी याचना

आज महसूस हुआ कि कभी-कभी वक्त हमें फोन का इस्तेमाल ही नहीं करने देता। लाईव ना आ पाने के लिए क्षमा याचना के साथ प्रस्तुत है मेरे वादे के अनुसार हिन्दुस्तानी लड़ियों के ऑटोमेशन का सफरनामा।

दोस्तों सपना दो तरह से देखा जाता है एक बन्द आँखों से सोते समय जिसपर हमारा कोई कंट्रोल नहीं होता और दूसरा खुली आँखों से जिसे हम अपने दिमाग से सपनों की दुनिया में बुनते हैं।

एक कहानीकार खुली आँखों से कथानक लिखता है और एक काल्पनिक कहानी का सृजन करता है। मुझे भी ( मोदी जी की तरह बचपन से ) शौक रहा है कहानीकारों की दिल को छू लेने वाली कहानियों के किस्सों को यथार्थ में जीने का। ऐसे में मैंने कई बार अचम्भित कर देने वाले किस्सों के पलों की जीया है।

खुली आँखों से सपना बुनना और फिर उसे यथार्थ धरातल पर उतारना ठीक उसी तरह होता है जैसे देश के लिए कुछ कर गुजरने की राष्ट्रवादिता की बातें करना और देश के लिए कुछ कर दिखाना। बातें करना बहुत सरल होता है। कमियाँ निकालना उससे भी सरल और उससे भी सरल काम होता है सलाह देना। मुझसे जितने मित्र मिल चुके हैं वो मेरा स्वभाव भी जानते हैं और मेरा आकलन भी कर चुके हैं कि कितना सनकमिजाज हूँ। मैं जब अपने से अधिक सनकमिजाज से मिलता हूँ तो वास्तविकता में मेरी होड़ को पंख तभी लगते हैं।

मशीनों के ऑटोमेशन का सफर मेरा खुली आँखों से देखा गया सपना है। अभी तक मैं दावा करता रहा हूँ कि हिन्दुस्तान में दिवाली की लड़ियाँ बनाने की सहायक मैनुअल मशीनों को बनाने वाला अकेला हूँ। जरूरत ऑटोमेशन की महसूस होती है जब उपभोक्ता अपना जेब देखकर कहता है कि काम तो चाईना वाले माल से चलाना पड़ेगा फिर वो चाहे सोशल मीडिया पर कितना ही दावा करता रहे कि वो देसी घी के भरे मिट्टी के दिए जलाएगा पर चाईना की लड़ी नहीं लेगा।

पकड़े गए तो कहना बस इतना ही है कि नहीं नही ये तो पिछले सालों की हैं, ठीक थी तो लगा ली। बात चाईना के विरोध की तब सही लगती है जब विकल्प हो। पिछली दिवाली पर पूरे देश में हर जगह विकल्प के रूप में हिन्दुस्तानी हाथ की बनी लड़ी उपलब्ध थी पर दाम चाईना वाली से ज्यादा था।

हमारे जो मित्र सीमित साधनों के चलते नहीं ले पाए हम उनके लिए चाईना लड़ी के समतुल्य भारतीय उत्पादों के सृजन की ओर एक कदम बढ़ा गए। मजदूरी तो हमें चाहिए और वो भी हर हाल में आखिरकार यह हम मजदूरों के जीवन मरण का सवाल है। चाईना से हम उन मशीनों को लेने में कामयाब रहे जो सस्ती लड़ियाँ बनाती है। अब आपको चाईना की यूज एण्ड थ्रो वाली हल्की झालरें भी मेक इन इंडिया के उपक्रम में मिलेंगी। रिसेंटली परचेज फ्राम चाईना
लड़ियाँ बनाने की ऑटोमैटिक मशीन ( तस्वीर 1)

यह मशीन यूज एण्ड थ्रो वाली लड़ी बनाती है पतली तार में ( तस्वीर 2 )। हमने मशीन में कुछ अलटरेशन कर दिया है। अब यह पतली तार की जगह मोटी तार में लड़ी तैयार कर रही है। ( तस्वीर 3 )

पिछली दिवाली पर जो लड़ी आप लोगों तक पहुँची वह रिपेयरेबल कैटिगरी की 7×44 या 7×43 अथवा 10×43 में थी ( तस्वीर 4 ) और जो हैवी रेंज की झालरें थी वह 7×36 ( 7 तारें 0.19mm मोटी तारें पी वीसी ओड़ी 2.2mm ) की कॉपर वायर में थी ( तस्वीर 5 )। चाईना इस मशीन पर 7× 42 ( 7 तारें 0.1mm मोटी तार पी वी सी ओड़ी 1.2mm ) की तार मैक्सिमम चलाने के लिए कहता है। हमने अलट्रेशन कर 10×36 ( 10 तारें 0.19mm मोटी तार पी वी सी ओड़ी 2.2mm ) की तार में मशीन पर लड़ियाँ बनाने में सफलता प्राप्त कर ली है ( तस्वीर 3 )।

चाईना की यह मशीन 5mm led के बल्ब में पतली तार में लड़ी बनाने में सक्षम है ( तस्वीर 2 ) जिसे हमने अलट्रेशन कर 5mm led एवं 8mm led बल्ब वो भी हैवी तार में बनाने के लिए सक्षम बना दिया है। (तस्वीर 3 एवं तस्वीर 6 )
अलटरेशन में इतनी कामयाबी प्राप्त कर ली है। लड़ी का सफर इस एक चित्र में प्रस्तुत है। ( तस्वीर 7 )

अब मेरा प्रयास इस मशीन को पूर्णतः मॉडिफाइड कर यूज टिल रिपेयरेबल कैटिगरी की लड़ी बनाने वाली ऑटोमैटिक मशीन बनाने की है ( तस्वीर 8 )। मेरा ध्येय हिन्दुस्तानी लड़ी की ऑटोमैटिक हिन्दुस्तानी मशीनें बनाने का है ताकि इसका लाभ सर्वत्र हिन्दुस्तान में लिया जा सके। आपकी शुभकामनाओं एवं सहयोग की अपेक्षा है।

मकर संक्रांति से मशीनों पर प्रोड़क्शन का काम प्रारंभ किया है तथा नई मॉडिफाइड मशीनों के निर्माण प्रक्रिया को सुचारु रूप से प्रारंभ किया है। आज मुझे आप सभी मित्रों की शुभाशीषों की नितांत आवश्यकता है। मेरा विश्वास है कि जहाँ सतत् प्रयास इच्छित परिणाम नहीं दे रहे होते वहाँ दुआएँ काम आती हैं।

मेरा ध्येय नए उद्यमियों को प्रेरित करने का भी है। जो मित्र इस उद्योग में आकर दूसरों को रोजगार देने में सक्षम हों उनका स्वागत है। उन्हें यथा सम्भव सहयोग करूँगा यह वादा है आप सभी से। जितना ज्यादा इस उद्योग का विस्तार होगा हम चाईना उत्पादों का बॉयकाट भी कर पाने में सफल होंगे। अब हिन्दुस्तान में लड़ियाँ चाईना पैटर्न पर यूज एण्ड थ्रो हल्की तार में भी बनेंगी राईस लड़ी बीस रुपये वाली भी अब भारत में बनेंगी तथा एल ई ड़ी बल्ब वाली हल्की एवं हैवी तार में भी और लक्ष्य वैसाखी तक रिपेयरेबल यूज टिल रिपेयरेबल लड़ियाँ बनाने की ऑटोमैटिक मशीन बनाने का है।

चाईना के इंजीनियर का दल दो दिन पहले हमारे द्वारा किए गए मॉडिफिकेशन का निरीक्षण कर गया है। अब आप समझ सकते हैं कि मेरी सनक मुझ पर कितनी हावी है। घर फूँक कर शहर को रोशन करने की तमन्ना मुझे दिल को छू जाने वाली कहानी का किरदार तो बनाती हैं दोस्तों पर पेट सिर्फ रोटी से नहीं, असल में आत्मियता के साथ प्रेम से परोसे गए एक प्रसाद रूपी निवाले से आत्मा को तृप्ति देता है और यह मेरा विश्वास है। आज मुझे जरूरत है दुआओं और शुभाशीषों की ताकि कभी ऊपर वाला किसी मोड़ पर कड़े इम्तिहान भी ले तो डगमगाने की जगह मैं आप सब के आशिषों के दम पर हार ना मानूँ।

+91 98911 22264
  • जय प्रकाश जुनेजा पाशी

(इस पुण्य कार्य में अधिक से अधिक सहयोग के लिए जय प्रकाश जुनेजा पाशी जी से इस नम्बर पर संपर्क करें, आप सबके सहयोग से ही हम चाईनीज़ बाज़ार को बाहर धकेलने में कामयाब हो सकेंगे – +91 98911 22264)

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