क्या नेताओं के खिलाफ राजद्रोह के मुकदमे की वकालत करेगा मीडिया!

JNU वालों पर राजद्रोह का केस और विधवा विलाप शुरू! आज मीडिया सवाल कर रहा है कि तीन साल क्यूँ लगे?

अफ़ज़ल गुरु की फांसी पर लटकाने के 3 साल बाद, 9 फरवरी 2016 को, बरसी मनाते हुए JNU के कथित छात्रों ने देश के टुकड़े टुकड़े करने के नारे लगाए।

हर घर से अफ़ज़ल निकालने की प्रतिज्ञा की और राजद्रोह की मंशा से सभी नारे लगाए…

आज 3 साल बाद दिल्ली पुलिस ने मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट सुमित आनंद की अदालत में कन्हैया कुमार, उमर खालिद, अनिर्बान भट्टाचार्य, कुछ कश्मीरी छात्रों और 36 अन्य, जिनमें कामरेड डी राजा की बेटी और शेहला रशीद भी शामिल हैं, के खिलाफ ‘राजद्रोह’ का मुकदमा दर्ज किया है।

याद रहे इन पर ‘राजद्रोह’ का केस दर्ज किया गया है, देशद्रोह का नहीं…

दोनों में फर्क है – राजद्रोह सत्ता के खिलाफ विद्रोह होता है और ये कोई किताब, पेंटिंग, सोच, भाषण आदि से भी हो सकता है जिससे राजसत्ता के खिलाफ बगावत की जा सके।

दूसरी तरफ देशद्रोह में देश विरोधी ताकतों से सांठगांठ करना और उन लोगों को साजो सामान के साथ समर्थन देना होता है जो देश के खिलाफ और देश तोड़ने के लिए काम करते हों।

लेकिन चार्ज शीट दायर होते ही विधवा विलाप शुरू हो गया – एक आम बात कही जा रही है…

चुनावों में फायदा लेने के लिए किया गया है केस, राजनीति से प्रेरित है… ये कन्हैया का प्रलाप है।

उमर खालिद कह रहा है, कोर्ट में देख लेंगे…

शेहला रशीद भड़क रही है कि ये बोगस केस है, सब बरी हो जायेंगे और मैं तो उस दिन वहां पर थी ही नहीं…

यानि देश तोड़ने की धमकी दोगे, आतंकियों को समर्थन करोगे किन्तु ये नहीं चाहते कि सरकार कार्रवाई करे।

इस पर सारे देश के मीडिया चैनल्स पर प्रचार किया जा रहा है कि देश में लोगों के बोलने पर भी पाबन्दी लगाई जा रही है!

हिम्मत है तो स्वीकार करो कि आप लोगों ने राजद्रोह के लिए नारे लगाए और अदालत में इस बात के लिए लड़ो कि ये आपका संवैधानिक अधिकार है।

आज मीडिया सवाल कर रहा है कि आरोप पत्र दायर करने में 3 साल क्यों लग गए, इतना समय नहीं लगना चाहिए था।

बिलकुल ठीक है जी, मगर क्या एक भी चैनल ने 3 साल में एक बार भी ये खबर चलाई कि पुलिस विलम्ब क्यों कर रही है और क्या किसी ने दिल्ली पुलिस से पूछने की कोशिश की कि केस में क्या हो रहा है? केस का स्टेटस क्या है?

काँग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी, दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल, कम्यूनिस्ट सीताराम येचुरी और अन्य पर भी केस दर्ज हो।

जिन पर केस दर्ज किया गया है उनके अलावा राहुल गाँधी, अरविंद केजरीवाल, सीताराम येचुरी और अन्य उन नेताओं पर भी राज द्रोह का केस दर्ज होना चाहिए जो JNU में जा कर इन कथित छात्रों के समर्थन में खड़े हो गए थे।

ये नेता लोग भी छात्रों की तरह बराबर के अपराधी हैं क्योंकि इन्होंने उनके अपराध में उनका साथ दिया और उन्हें बचाने के लिए उनकी हिमायत की।

मीडिया क्या निष्पक्ष हो कर नेताओं के खिलाफ राजद्रोह का मुकदमा दायर करने की वकालत करेगा?

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