अखंड भारत के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव

मोदी ने 2012 में किसी मुस्लिम पत्रकार को इंटरव्यू में बड़ी स्पष्टता से कहा था- अखंड भारत का नाम सुनते ही आपके मुंह में पानी आ जाता है। क्योंकि आपको लगता है कि इससे भारत में मुसलमानों की आबादी बहुत ज्यादा हो जाएगी।

मैं देखता हूं कि बहुत से परम राष्ट्रवादी फूफा-नोटावीर अपनी वॉल पर अखंड भारत का नक्शा टिकाए रहते हैं जैसे ये कोई परम राष्ट्रवादी होने का सर्टीफिकेट है।

तो श्रीमान बता दें कि अगर अखंड भारत बना तो उसमें मुसलमानों की आबादी कितनी होगी? मेरी समझ कहती है 60 करोड़। हम 80 करोड़। बाकी का गैप 50 साल में पूरा हो जाएगा। फिर कहां बचोगे यार।

टाईम्स ऑफ इंडिया के कभी एक बहुत कद्दावर संपादक हुआ करते थे गिरिलाल जैन। उन्होंने कहा था – विभाजन एकमात्र अच्छी चीज़ थी जो भारत में हज़ार साल में हुई। अगर एक रहते तो हिंदुओं और मुसलमानों की आबादी लगभग बराबर रहती। हिंदू रोज़ जुतियाए और लतियाए जाते।

बंटवारे से कुछ साल की राहत मिल गई जिससे हिंदुओं को अपने तरीके से आगे बढ़ने का मौका मिला। वैसे शायद उन्होंने हिंदू नहीं कहा, भारत कहा था।

गिरिलाल जैन की बात मार्के की है। उन्होंने कहा था कि मुसलमानों के दबाव से मुक्त भारत को अपने तरीके से आगे बढ़ने का मौका मिला।

बाकी परिवार की मंशा कुछ और थी। पूर्वी पाकिस्तान की गरीबी को उन्होंने अपने वोट बैंक का औज़ार बना लिया। न्योता देकर बुलाया, बीपीएल कार्ड बांटे और उन्हें अपना स्थायी वोट बैंक बना लिया, धरम-निरपेक्षता के नाम पर।

इस फर्जी धर्मनिरपेक्षता के नाम पर जो काम शातिरों ने किया, अब वही अखंड भारत वाले सुपर राष्ट्रवादी कर रहे हैं। बनाओ अखंड भारत, 40 करोड़ शांतिदूत और ले आओ। दुनिया की कोई कौम इतनी मूर्ख नहीं होती।

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