पोलिटिकल सर्जिकल स्ट्राइक

कल मोदी जी ने अपना पहला पोलिटिकल सर्जिकल स्ट्राइक किया, सवर्णों को सरकारी नौकरियों में 10% का आरक्षण दे कर।

आज से करीब 4-5 महीने पहले की बात है जब भी कोई मित्र कहता था कि मोदी सवर्णों के लिए कुछ नहीं कर रहे चुनाव हार जाएंगे तब मैं कहता था “उसे मोदी कहते हैं वो वह करता है जो कोई सोच भी नहीं पाता, सवर्णों को आरक्षण दे कर उनकी नाराज़गी दूर कर देगा मोदी”, आरक्षण?? और वो भी सवर्णों को?? कोई मानने को तैयार ही नहीं होता था, कल मैं व्यस्त था न्यूज़ नहीं देखी थी, अचानक मित्रों के फ़ोन आने लगे और बोले आपकी बात सच हो गयी।

मोदी का यह मास्टर स्ट्रोक है, जहां MP में सरकार बदलते ही सवर्णों पर अत्याचार होने लगे उन पर मुकदमे कायम होने लगे, वहीं दूसरी ओर मोदी सरकार ने सवर्ण युवाओं को नया जीवन दे दिया आरक्षण दे कर.

गरीबी जात पूछ कर नहीं आती इसलिए गरीब सवर्णों को भी आरक्षण का अधिकार दिया गया है, बिल आज लोकसभा में पास हो कर कल राज्यसभा में भेजा जाएगा, अब देखना यह है कि कौन कौन सी पार्टियां हैं जो सवर्णों के साथ है और कौन कौन सवर्ण विरोधी मानसिकता वाली पार्टी हैं.

कल लालू प्रसाद यादव की RJD और अखिलेश यादव की SP ने इस बिल का विरोध कर के साफ दर्शा दिया कि वे सवर्ण विरोधी हैं, वे नहीं चाहते कि गरीब सवर्णों के बच्चों को सरकारी नौकरी मिले, वे जब सत्ता में थे तब भी कह चुके हैं कि ब्राह्मणों की कोई मदद ना करे, आज एक बार फिर वे सभी सवर्णों के बच्चों के भविष्य को रौंदने पर आमादा हैं, लालू यादव और अखिलेश यादव तो बेनकाब हो चुके हैं, आज और भी चेहरे बेनकाब होने की संभावना है।

एक बात तो 100% स्पष्ट है, मोदी सवर्ण हितों का पूरा ख्याल रखते हैं, न सिर्फ सवर्ण बल्कि देश के हर तबके का ख्याल रखते हैं, वे ‘सबका साथ, सबका विकास’ में विश्वास रखते हैं, लेकिन कुछ लोग सवर्णों को गाली दे कर अपनी राजनैतिक दुकान चलाना चाहते हैं, ये सवर्ण विरोधी लोग हैं, जिन्हें पद्मावती में कला दिखाई देती है, जिन्हें राम काल्पनिक दिखते हैं, जो रामसेतु तोड़ना चाहते थे, जो कहते हैं “तिलक तराजू और तलवार इनको मारो जूते चार”, जिनका एकमात्र उद्देश्य है सवर्णों को खत्म कर के हिन्दुओं और देश को खत्म करना।

जो आज़ाद भारत में आज तक न हुआ वो मोदी ने कर दिखाया, इतिहास का सबसे बड़ा फैसला ले कर सवर्णों को आरक्षण दे दिया, कई पार्टियों ने ऐसे वादे किए पर किसी ने एक तिल भी नहीं रखा जबकि इसके विपरीत मोदी ने बिना कहे बिल संसद में ला कर रख दिया, जो लोग मोदी को सवर्ण विरोधी बताते नहीं थक रहे थे उनके मुँह पर यह एक जोरदार तमाचा है।

लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जो आज भी अपने आपको ब्राह्मण बताते नहीं थक रहे, राष्ट्रवादी बताते नहीं थक रहे. वे आज भी कोई न कोई बहाना निकाल कर इस बिल का विरोध करते नज़र आ जाएंगे या फिर बिल में छुप जाएंगे, मित्रों ये न तो ब्राह्मण हैं, ना राष्ट्रवादी और न ही हिन्दू, ये सिर्फ कांग्रेसी हैं, चरणभाट, लालची और पप्पू मूत्र पीने वाले गंदे कांग्रेसी, यदि आपको भी कोई ऐसा ही कांग्रेसी मिल जाये तो अपने तर्कों से ऐसे तरीके से उसकी पूजा कीजियेगा कि दोबारा मुंह न खोल सके, इनका सिर्फ यही इलाज है।

सबका साथ सबका विकास, तो ज़ोर से बोलो नमो नमो।

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