इल्लुमिनाती : काँग्रेस का नया प्रचारास्त्र

काँग्रेस के बारे में एक बात माननी पड़ेगी, वो यह है कि उन्हें अपना पराभव समझ में आता है और वे उससे comeback कैसे किया जाये इसकी योजनाएँ बनाकर रखते हैं।

कई सालों सेंक कर जाते जाते NOTA को मंजूरी इसी कारण दी गयी थी कि उसका लोगों की भावनाएँ भड़काने में उपयोग किया जा सके।

ये साबित भी हो गया है कि जब कि मूल भडकानेवाले कोंग्रेसी किराए के कलम थे, तीली लगाकर हवा हो गए, मशालें जलाकर अपने घर हमारे ही लोगों ने जला दिये। अब पछता रहे हैं, लेकिन उनको अपराधबोध से मुक्त करने के लिए काँग्रेस ही नए नए स्पष्टीकरण फैला रही है कि जो आप ने किया वह ठीक ही था।

ऐसे कई तीर हैं काँग्रेस के तूणीर में। नेता भले ही पप्पू हो, पीडीयों को पप्पू न समझें।

और रणनीतियों को लेकर एक बात समझनी पड़ेगी कि काँग्रेस धीरे धीरे पकाने में मानती है। उसे अच्छी तरह पता है कि दम बिरयानी माइक्रो वेव में नहीं बनती, उसे धीमी आंच पर ही पकाना चाहिए, तभी उसका स्वाद आता है। उतना समय वो देती है।

उतना समय वे इसलिए दे सकती है क्योंकि भले ही वो प्रत्यक्ष सत्ता से बाहर हो, सिस्टम में उसके ही लोग हैं और सिस्टम को कोई भी नया शासक एक झटके में आमूलचूल साफ नहीं कर सकता। लोकतन्त्र में तो यह असंभव ही रहा है।

विगत तीन चार सालों से जो अंडा सेंका जा रहा था उसका नाम है न्यू वर्ल्ड ऑर्डर या एन डबल्यू ओ। इल्लुमिनाती यह इसका दूसरा प्रसिद्ध नाम है। आजकल इसके चर्चे गरम हैं। विशेष कर इंग्लिश जाननेवाले एजुकेटेड मिडिल क्लास में।

होता कुछ यूं है कि इसके बारे में जो कुछ “जानकारी” नेट पर उपलब्ध है, उसे फैलाना, नेट पर उपलब्ध अमेरिकन लेखकों द्वारा लिखी बीसियों किताबों में से जो भी इन्होने पढ़ी हैं उनमें से डरावनी बातों को आज जो हो रहा है उनसे जोड़कर दिखाना।

कई ऐसी बातें होती हैं जिनके सबूत नहीं उपलब्ध होते हैं। ऐसी बातें भ्रमित करने में बहुत उपयुक्त होती हैं, जैसे नेताजी सुभाषचंद्र बोस की मृत्यु। इस घटना के बारे में कितनी कहानियाँ उपलब्ध है आप को भी कुछ पता होगा। हर नयी कहानी पुरानी कहानियों को कहानी बताकर खारिज करती है और सत्य होने का दावा करती है।

अस्तु, हम बात ये कर रहे हैं कि काँग्रेस NWO या इल्लुमिनाती के नाम का प्रचार में कैसे उपयोग कर रही है।

किसी भी आदमी को एक बड़ा डर यही होता है कि उसका धन किसी काम का न हो जाये। धार्मिक ग्रन्थों में इसका अलग रूप सामने आता है कि मरने के बाद यह काम नहीं आता, या फिर ऐसी कथाएँ कही जाती हैं जहां दिखाया जाता है कि उन परिस्थितियों में सोना चाँदी हीरे जवाहरात अन्न का दाना भी नहीं दे सके। लेकिन आज के परिप्रेक्ष्य में देखें तो उसे डर होता है कि उसके पास जो कागज़ी मुद्रा है वह अचानक रद्दी कागज़ न हो जाये।

इल्लुमिनाती को लेकर यही कहानियाँ सब से अधिक प्रसारित की जाती हैं कि वे दुनिया के किसी भी देश को दीवालिया बना सकते हैं, किसी भी देश के मुद्रा को अपनी मर्जी से रद्दी कागज़ बना दे सकते हैं। अगर किसी देश का मुद्रा कीमती है तो उनके समर्थन से। सुपरपावर देशों के सत्ताधारी भी उनके हस्तक हैं और उनकी मेहरबानी से सत्ता चलाते हैं।

ये कौन हैं इसपर भी कई किताबें लिखी गयी हैं, जिनके नाम लिए गए हैं, किसी ने कभी कोई खंडन नहीं किया, किसी लेखक पर किसी ने मुकदमा नहीं किया। ध्यान ही नहीं दिया है। जब कि सब से मज़े की बात यह है कि इनके विरोध में लिखनेवाले ये सभी लोग एक आरोप में एकमत हैं कि इल्लुमिनाती अपने विरोध में किसी की भी आवाज़ को उठाने नहीं देती और जब चाहे किसी की भी हत्या कर देती है।

फिर इतना साहित्य कैसे लिखा गया, हर दिन नया लिखा जा रहा है, इतने सालों से इनके खिलाफ इतनी किताबें हैं, धड़ल्ले से बिक भी रही हैं, वेब साइट्स कितनी सारी हैं – और हम यहाँ केवल इंग्लिश में उपलब्ध सामग्री की बात कर रहे हैं, बाकी भाषाओं की हमें जानकारी भी नहीं।

कोई लेखक मारा नहीं गया, कोई साइट बंद नहीं हुई। लेकिन हर कोई यही कह रहा है कि इनसे डरकर रहिए, ये आप को कभी भी मार सकते हैं। आप गायब हो जाएँगे, किसी को पता भी नहीं चलेगा।

वैसे इनपर जो आरोप लगाए जाते हैं वे अधिकतर वामियों पर लागू होते हैं, इस्लामी सत्ताओं पर लागू होते हैं, खास कर आवाज बंद किए जाने पर, विरोधकों की हत्याओं पर। लेकिन उसपर भी आवाज़ उठती दिखती नहीं, है ना मज़े की बात?

मुद्रा के साथ खिलवाड़ करने के लिए सब से अधिक बदनाम कोई है तो वामियों का पेट्रन जॉर्ज सोरोस है जिसके खिलाफ मलेशिया ने तो अरेस्ट वारंट निकाला हुआ है अपनी मुद्रा के साथ खिलवाड़ करने के आरोप में।

अस्तु, यहाँ बात कर रह हैं कोंग्रेसी रणनीति की। फिलहाल लोग सोशल मीडिया पर और खास कर WA या चैट में इनकी बातें छेड़ते हैं। फिर धीरे से गाड़ी लायी जाती है भारत के नोटबदली पर।

यहाँ बात ऐसी है कि भारत में कोई भी पैसेवाला पूरा व्हाइट मिलना दुष्कर है, कानून ही ऐसे हैं। कमाया धन अवैध हो जाता है क्योंकि आप उस पर कर नहीं चुकाते, लेकिन वह अनैतिक नहीं होता। इसलिए आम धनिक को उसका अपराधबोध नहीं होता। बहुतांश सधन लोगों को कहीं न कहीं नुकसान हुआ ही है। कुछ अपनी व्यवस्था कर पाये, कुछ को कुछ पैसों पर पानी छोड़ना पड़ा, और जहां अपने पैसे की बात हो तो कम क्या और ज्यादा क्या, जान अटकी रहती है उसमें हर किसी की।

अब यहाँ मोदी जी पर इल्लुमिनाती का एजेंट होने का आरोप लगाया जाता है। पुतिन, ट्रम्प और इस्राइल के साथ अच्छे सम्बन्धों का हवाला दिया जाता है। और इसी इल्लुमिनाती के व्यापक षडयंत्र के एक भाग के तहत मोदी जी ने आप के पैसों को रद्दी कागज़ कर दिया, ऐसा आरोप लगाया जाता है और उनको हटाने में सहयोग की मांग की जाती है।

जिसका आर्थिक नुकसान हुआ होता है वह आदमी बाकी बातों की जांच पड़ताल करेगा ही, यह कह नहीं सकते, तैश में आकर झांसे में आ सकता है।

एक बात समझिए, कई लोगों ने देश भावना के चलते नुकसान के बावजूद नोटबदली को स्वीकार किया था। लेकिन ये लोग NWO या इल्लुमिनाती के बारे में नहीं जानते। और जब नेट पर उपलब्ध साइट्स और मुफ्त किताबों द्वारा सामने लायी जाती है और यह ज़ोर देकर कहा जाता है कि यह हिंदुओं को खत्म करने का षडयंत्र है, और फिर कहा जाता है कि मोदी जी ने हिंदुओं के लिए कुछ नहीं किया बल्कि मुस्लिम ईसाई का तुष्टीकरण कर रहे हैं। साथ साथ जातिवाद का तड़का दिया तो खाना कितना भी बासी हो, परोसा जा सकता है। इसलिए खुले हाथ से जातिवाद का तड़का भी दिया जाता है।

इस बात से नज़र नहीं चुरानी चाहिए कि आंबेडकर जी सवर्णों के लिए फोकस ऑफ हेट बनाए गए हैं। उनके बारे में कई अफवाहें चलायी जाती हैं। इसमें बड़ी ही नफासत से ऐसे कट्टर हिंदुवादियों का इस्तेमाल किया जाता है जिन्हें आंबेडकर नाम की ही एलर्जी है।

वास्तव में दलित राजनीति की तो काँग्रेस ने, लेकिन सारा fall out उन्होने अंबेडकर जी पे इस कदर डाल दिया कि लोग काँग्रेस की करतूतें न समझ कर आंबेडकर जी से ही नफरत करने लग गए।

कुछ साल पहले उनको क्रिप्टो ख्रिश्चन भी बताया गया। इस बात के पुरस्कर्ता तो इतने अडिग होते हैं कि मानो वे आंबेडकर जी के बपतिस्मा के प्रत्यक्षदर्शी साक्षी हों। यह बात किसके दिमाग की उपज है, पता नहीं, लेकिन इसे बढ़ावा हिन्दू ही दे रहे हैं और आप इनसे सहमत नहीं होते तो आप को भी क्रिप्टो ख्रिश्चन घोषित कर सकते हैं।

NWO या इल्लुमिनाती के बारे में कहने को तो बहुत है, सौ से अधिक PDF किताबें तो मैं ही आप को दे सकता हूँ। बाकी उनके नाम से जो कारनामे बताए जाते हैं, प्रोटोकोल्स ऑफ द एलडर्स आदि जो भी कुछ बताया जाता है उन सब नीतियों का निचोड़ देखें तो वे सभी काँग्रेस, वामी और राजमहिषी के ही चित्र आँखों के सामने उभर आते हैं।

उनकी सत्ता थी, तो सोशल मीडिया पर कितना दबे सुरों में लोग लिखते थे, आज भी जहां उनकी सत्ता आई है वहाँ सोशल मीडिया के रंग बदले हैं। लोगों से फोन पर बात होती है तो आवाजें भी पहले जैसी खुली नहीं लगती, अज्ञात दबाव महसूस होता है। लेकिन फिर भी, आज मोदी जी को इल्लुमिनाती का एजेंट भी बता रहे हैं लोग, देख कर हैरान हूँ।

हैरानी की वजह ये भी है कि बोलनेवालों पर मोदी जी ने कोई सेन्सरशिप नहीं लगाई है, जो कोई जो मन में आए बोल सकता है, बोलता भी है। फिर भी मोदी जी को इल्लुमिनाती का एजेंट बता रहे – वो इल्लुमिनाती जो लोगों को पूरी तरह कंट्रोल करती है।

किसी भी विधिनिषेध के बिना सत्य-असत्य की बिरयानी परोसी जा रही है। व्यापक षडयंत्र की बात करें तो यह समझ में आता है।

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