काँग्रेस के लिए अगस्टा कांड से बड़ी समस्या, मिशेल का भारत सरकार के हाथ आना

क्रिश्चियन मिशेल के पिता वोल्फगैंग मैक्स रिचर्ड (Wolfgang Max Richard Michel) की तीन कंपनियाँ थी – एन्टेरा कॉर्पोरेशन, यूएमसी इंटरनॅशनल ट्रेडिंग लि. और फेरो इम्पोर्टस् लि।

एन्टेरा कॉर्पोरेशन के 75% शेयर्स 1987 से लिश्टेन्स्टाईन स्थित एक ऑफशोर फंड ईस्टर्न ट्रेड आन्स्टाल्ट के पास थे। 1987 से 1996 के दरमियान उन्होने भारतीय सौदों से बीस लाख पाउंड कमाए। ये पैसे उनकी कंपनी ने इंजिनियरिंग कंसल्टेंसी/ इंडस्ट्रियल कंसल्टेंसी के नाम से लिए थे।

वोल्फगैंग कहते थे कि इन्दिरा जी से उनका 1970 से व्यक्तिगत परिचय था। राजीव गांधी के विवाह के बाद ये परिचय कैसे हुआ और किसके द्वारा हुआ, यह बात अज्ञात है। उस समय वे भारत से ज्यूट और चमड़े के वस्तुओं की भारत से निर्यात कराते थे और उनकी कंपनी इन चीज़ों की सब से बड़ी निर्यातक थी।

जब भी वे दिल्ली आते तो क्लॅरिजेस होटेल में रहते। इस होटल के मालिक हैं सुरेश नन्दा। एडमिरल नन्दा के सुपुत्र।

भारत ने WG 30 और MK 42 ये हेलिकॉप्टर्स ब्रिटिश कंपनियों से खरीदे थे, वहाँ वोल्फगैंग ही बिचौलिये रहे। क्रिश्चियन मिशेल ने CBI से कहा है कि 1982-83 में इन्दिरा जी ने संसद में एक बार कहा था कि वोल्फगैंग भारत के मित्र हैं। सीबीआई इसकी पड़ताल कर रही है।

ब्रिटेन के राजनयिक सर्कल्स में भी वोल्फगैंग का बड़ा रुतबा था। वे ब्रिटेन की लेबर पार्टी के लिए फंड खड़ा कर देते थे। ये काम उनकी मौत होने तक चलता रहा। उनकी कन्या कॅरोलिन (संस्कृत स्कॉलर) का विवाह लेबर पार्टी के बडे नेता लॉर्ड मॅथ्यू इव्हान्स के साथ हुआ था (अब तलाकशुदा)। कॅरोलिन खुद साहित्य के क्षेत्र में एक प्रसिद्ध हस्ती थी और मॅथ्यू, फाबर एंड फाबर नामक बड़ी प्रकाशन संस्था के प्रमुख थे।

1996 के आसपास वोल्फगैंग को ‘Persona Non Grata’ घोषित किया गया – याने उनके साथ कोई भी व्यवहार न करें ऐसे आदेश संरक्षण मंत्रालय ने निकाले थे। इसके बाद उन्होने अपने बेटे क्रिश्चियन मिशेल को अपने धंधे में लगाया। उसको एंटेरा कंपनी में पार्टनर बनाया और उसे अपने कॉन्टेक्ट्स हस्तांतरित कर दिये।

CBI के सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत किए निवेदन में मिशेल द्वारा यह बताए होने का उल्लेख है।

2001 से उसकी बहन कॅरोलिन भी इस कंपनी में भागीदार बनी। साथ साथ जोमर इन्वेस्टमेंटस् कंपनी में भी ये भाई बहन पार्टनर हैं। मिशेल ने पिता से धंधे की बागडोर तो अपने हाथों में ली लेकिन पिता से उसकी बनती नहीं थी, उसने पिता को कंपनी के कारोबार से हटा दिया।

इससे व्यथित हुए वोल्फगैंग अपने दोस्तों से कहते कि ‘मैंने ज़िंदगी भर जो कमाया है, मेरा बेटा डुबाएगा’। हुआ भी यही, क्रिश्चियन मिशेल अपने पिता का ‘पप्पू’ ही साबित हुआ। 2004 में कंपनी को दीवाला निकालना पड़ा। उसपर तेरह लाख पाउंड का कर्ज़ चढ़ा था।

कंपनी के कर्ज़दारों में बड़ी बड़ी निजी तथा सरकारी कंपनियों के नाम थे। एक नाम फ्रेंच कंपनी Snecma (अब Safran Aircraft Engines) का भी था। यही कंपनी Dassault को उनके मिराज जहाजों के इंजिन भी बनाकर देती है। Dassault का नाम आगे भी आयेगा। उनके कर्ज़दारों में दो भारतीय वंश के लोगों के नाम भी दिखते हैं – पी डी मेनन और आर दीक्षित।

दीवालिया घोषित किए जाने के बाद मिशेल को ब्रिटेन में सात साल धंधा करने से मनाही की गई। वहाँ रजिस्टर्ड आठ कंपनियों में वह डायरेक्टर था। उनमें से पाँच अब बंद हो चुकी हैं। OMIC Ltd, Aviation News Service Ltd, Loyalrich Ltd, Ferro Import Ltd और Entera Corporation। अन्य तीनों के नाम हैं Globe Oil Ltd, Global Trade & Commerce Ltd and Fitness First (Curzons) Ltd। चूंकि ब्रिटेन में धंधा नहीं कर सकता था इसलिए उसने दुबई से Globala Services FZE नाम की कंपनी शुरू की।

मनी लॉंडरिंग करने वाले दलालों को अपने व्यवहार छुपाने के लिए अनेक शेल कंपनियाँ खोलनी पड़ती हैं, जिनका अस्तित्व केवल कागज़ों में होता है। इन कंपनियों का इस्तेमाल करके पैसे यहाँ के वहाँ किए जाते हैं। वोल्फगैंग हो या क्रिश्चियन मिशेल, दोनों की पैदा की हुई इन शेल कंपनियों का मकड़जाल दिमाग को सुन्न कर देता है।

कुल बात यह है कि ये कंपनियाँ अपने बैंक खाते स्विट्ज़रलैंड – केमान आइलैंड – पनामा – लिश्टेनस्टाइन – मोनॅको जैसे देशों में रखते हैं जहां पैसों के व्यवहार का पता नहीं चल सकता।

वोल्फगैंग की केसर इनकॉर्पोरेटेड कंपनी की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। 1995 में उन्होने यह कंपनी पनामा में चालू की तब उसका पता अपने लंदन स्थित चेल्सी वाले घर का दिया हुआ था। उसमें पार्टनर के तौर पर दिल्ली के किसी विक्रम सिंह का नाम है लेकिन उनका पूरा पता नहीं लिखा गया। शस्त्रों की दलाली में मिले पैसों को इस केसर इनकॉर्पोरेटेड द्वारा यहाँ वहाँ किया जाता था। 1997 में कंपनी की बागडोर क्रिश्चियन मिशेल के हाथों में दी गयी, ऐसा दिखाई दे रहा है।

इसी लिए क्रिश्चियन मिशेल ऐसा व्यक्ति है जो राफाल और अगस्टा इन दोनों कंपनियों के भारत से हुए व्यवहारों में कॉमन कड़ी है, ऐसा प्रतीत हो रहा है। इसीलिए यद्यपि मोदी सरकार द्वारा केवल अगस्टा का नाम लेते हुए ही उसे भारत लाया है, लेकिन यह व्यक्ति गत चार दशकों के काँग्रेसी पाप बाहर ला सकता है, इसीलिए संसद में हंगामा होता दिख रहा है।

क्रमश:…

(सुश्री Swati Torasekar जी की मराठी ब्लॉग पोस्ट का हिन्दी अनुवाद)

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