‘कोसा’ध्यक्ष या भक्त शिरोमणि हुए बिना बात रखने का सलीका तो सीखिए

आज मैंने तीन पोस्ट किए… और तीनों पर खूब नकारात्मकता बरसी…

पहले में कहा – केंद्र सरकार केरल में राष्ट्रपति शासन लगाए।

दूसरे में पूछा – प्रवीण तोगड़िया केरल कब जाएंगे? क्या यह हिन्दू धर्म का मुद्दा नहीं है?

तीसरे में कहा – भाजपा, संघ और विहिप जनभावनाओं की लहर को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करने में असमर्थ है…

पहला खुल कर मोदी को कोसने का मौका था। और अधिकांश प्रतिक्रियाएं अपनी जगह पर सत्य हैं। पर उपयोगी नहीं हैं।

मेरे लिखने का आशय सिर्फ इतना था कि केंद्र सरकार पर केरल की स्थिति में हस्तक्षेप करने का दबाव बनाया जाए। वह आशय बिल्कुल खो गया।

किसी ने भी इस स्वर को आगे नहीं बढ़ाया। कुछ ने कहा कि यह क्यों असंवैधानिक है या अव्यवहारिक है। ज्यादातर ने मोदी को जी भर के कोस लिया और काम हो गया।

भाई, हम नीति निर्धारक नहीं हैं। अधिक से अधिक प्रेशर ग्रुप हैं। हमारा काम वांछित दिशा में प्रेशर बनाना मात्र है। प्रेशर बनता है या नहीं, काम होता है या नहीं यह बाद की बात है। हमारा काम प्रेशर बनाना और बनाये रखना है… उस दिशा में प्रयास करने के बजाय हम या तो ‘कोसा’ध्यक्ष हो जाते हैं या फिर भक्त शिरोमणि।

दूसरी पोस्ट तोगड़िया जी के बारे में थी, कि वे सबरीमला कब जाएंगे। यहाँ भी उनकी कोसाई शुरू हो गई। सिर्फ एक मित्र ने सकारात्मक जानकारी दी लेकिन वह भी एक डिफेंसिव प्रयास था।

उद्देश्य यह है कि विश्व हिंदू परिषद इस विषय पर अपनी पूरी शक्ति लगाए जैसा अयोध्या में देखने को मिला। यह माँग रखी जा सकती है और उन्हें बिना कोसे भी रखी जा सकती है।

तीसरी मेरी बहुत जेन्युइन शिकायत है हिंदुत्व की शक्तियों से। यह सही है कि ग्राउंड पर जो भी हो रहा है वह भाजपा और संघ के लोग ही कर रहे हैं। कितने लोग जान दे रहे हैं, और ऐसा कितने ही सालों से हो रहा है। लेकिन इसे जनांदोलन में बदल कर इसका लाभ लेने में असमर्थ हैं।

हमारा नेतृत्व सामने आकर इसका श्रेय लेने में भी डरता है… अपनी संवैधानिक और शासकीय शक्तियों का प्रयोग करने की हिम्मत तो दूर की बात है…

हिन्दू समाज के नेतृत्व से बहुत सी अपेक्षाएँ हैं, बहुत सी शिकायतें भी हैं… पर वे सभी मेरे लिए आदरणीय हैं। सबके अपने योगदान हैं और जितना मैं जीवन भर में योगदान दे पाऊँगा उसका कई गुना अर्पित करके ही वे शीर्ष नेतृत्व बने हैं।

हाँ, उनसे और अधिक स्पष्टता और निर्भीकता की अपेक्षा है और अपनी इस अपेक्षा को व्यक्त करने की धृष्टता भर कर रहा हूँ… आप भी करें… पर बिना किन्ही अपशब्दों के…

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