बोलो ज़ुबां केसरी : नमो को अगले 5 वर्षों के लिए फिर लाने 5 महत्वपूर्ण बातें

प्रिय मित्रों!!
अपराध बोध पालना बन्द कीजिए।
13 दिन,
13 महीने,
5 साल,
फिलहाल 10 साल की प्लानिंग है।
समुद्र में उठती लहरों का अध्ययन कीजिए।
आखिरी बड़ी लहर के पहुंचने से पहले कई लहरों को पीछे लौटना होता है।
स्पंदन से सुनामी होने का अपना एक पैटर्न है।
टाइमिंग की ज़रा सी चूक परिणाम में कच्चापन लाती है।

निम्न वाक्यों से परहेज़ कीजिए।

1 “केवल फेसबुक पर लिखने से कुछ नहीं होता!”

जो जिस रूप में योगदान दे रहा है, देने दीजिए। होता है, भई, लोगों को अपनी बात तो कहने दीजिए। बस रायबहादुर बनने से बचिए। आपकी राय नहीं मानी जाती है, तो विद्रोही, उदास, हताश मत होइए।

2 “हिंदुओं की दुर्गति के लिए हिन्दू ही जिम्मेदार हैं!”

आप थोड़े सजग रहें, इतना कि बस आपकी दुर्गति न हो। बाकी लोगों को उनके किये का भुगतने दीजिए। खुद को बचाकर चलिये। अभी दुर्गति नहीं हुई है, पर आगे अवश्य होने वाली है। प्रत्यक्ष कूदना पड़ेगा, क्योंकि शीघ्र ही दुर्गति स्वतः चलकर तुम्हारे अँगने में ठुमकने वाली है। ये सबरीमाला वगैरह तो कुछ भी नहीं है। स्थितियां अत्यंत विकट हैं।

3 “सरकार ने बहुत निराश किया है!”

यह कथन उन लोगों का है जो कल ही टोले में शामिल हुए थे और जबरदस्त उकसा रहे थे। जब सबकुछ उनके मनमाफिक नहीं हुआ तो जितनी जल्दी उफान पर थे, वैसे ही ठंडे भी हो गए। उकसाना, खेल बिगाड़ने का ही दूसरा नाम है। इनमें जो अपने हैं, उनकी पूरी बात, ससम्मान सुनिए। धीरज बंधाइये। जो घुसपैठिये हैं उन्हें रोने दीजिए।

4 “धिक्कार है, इनको… उनको… इनको… उनको… !”

धिक्कारने की बजाय इनका मजाक उड़ाइये।
व्यंग्य में बहुत ताकत होती है। हँसते हुए विरोध कीजिए, यदि अपना हुआ तो साथ में हंसने लगेगा। नहीं हुआ तो 2012 की तरह दुबक जाएगा। (2012 से ही सोशल मीडिया पर हम हावी होने लगे थे। उसके बाद तो सामने वालों को मुँह खोलने ही नहीं दिया।)

5 “आरक्षण, scst एक्ट, स्त्री, दलित, किसान, मजदूर,,,,,”

ये अपनी लड़ाई की भूमि है ही नहीं। ये उनकी ही भूमि है जहाँ खदेड़कर आपको लड़खड़ाते हुए जिबह करना है। इन मुद्दों की हकीकत सभी जानते हैं। ऐसे मामलों में खुद को इन्वॉल्व कीजिए, मसलन मैं किसान हूँ, मैं हकीकत जानता हूँ… वगैरह।

और अंत में,
कभी भी खुद को सरकार, राष्ट्रवादी, मोदी जी का चेला, बीजेपी का प्रवक्ता इत्यादि रूप में प्रस्तुत मत कीजिये। गम्भीर मजाक कहने समझने की ताकत विकसित कीजिए।

यदि बात ठीक लगे तो अवश्य बताना।

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