ज़हरीलों! याद भी है बतौर पीएम, मनमोहन की आखिरी प्रेस कांफ्रेंस?

पांच साल पहले आज ही के दिन तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ‘प्रेस कांफ्रेस-प्रेस कांफ्रेस’ खेलने के लिये मीडिया के सामने लाये गये थे।

विज्ञान भवन में हुई इस प्रेस कांफ्रेस में देश का लगभग हर ख्यातिप्राप्त पत्रकार और संपादक मौजूद था। लेकिन लगभग सवा घंटे चली उस प्रेस कांफ्रेस में कुछेक को ही सवाल पूछने का मौका मिला।

स्पेक्ट्रम, कोयला, कॉमनवेल्थ जैसे घोटालों से घिरी सरकार के मुखिया होने के नाते मनमोहन सिंह से इस संबंध में सवाल पूछे जाने की उम्मीद की जा रही थी। इसके साथ ही आगे आने वाले लोकसभा चुनावों से पहले हो रही सरकार की इस अंतिम प्रेस कांफ्रेस में कांग्रेस और गठबंधन से संबंधित सवालों के आने की भी सुगबुगाहट थी।

चूंकि भाजपा और एनडीए गठबंधन की ओर से नरेन्द्र मोदी को आगामी लोकसभा चुनाव के बाद गठबंधन की ओर से प्रधानमंत्री पद का दावेदार घोषित किया जा चुका था और वह बहुत जोर-शोर से चुनाव प्रचार में भी जुट गये थे, इसलिये उम्मीद यह भी थी कि इस संबंध में भी मनमोहन सिंह से सवाल पूछे जायेंगे।

उम्मीद के अनुसार उपरोक्त विषयों को केंद्र में रखकर सवाल पूछे भी गये लेकिन सवालों की धार देखकर ही एक आम आदमी भी को भी समझ में आ गया कि यह सारे सवाल दस जनपथ से ही लिखकर भेजे गये हैं।

अपने रटे-रटाये जवाबों में जो वाक्य सबसे प्रमुखता के साथ मनमोहन सिंह बोल पाये थे, वह था कि “इतिहास मेरे कार्यकाल की जब भी समीक्षा करेगा तो मुझे विश्वास है कि वह मेरे प्रति उदारता बरतेगा।”

साथ ही मोदी के संबंध में पूछे गये सवाल पर “मोदी का प्रधानमंत्री बनना देश के लिये त्रासद होगा”, जैसे जुमले ही अगले दिन के अखबारों की सुर्खियां बन पाये। बाकी शायद ही किसी को याद हो कि अपने कार्यकाल के घोटालों और गांधी परिवार तथा अपने संबंधों पर भी मनमोहन सिंह ने कुछ कहा हो।

दरअसल उस पूरी प्रेस कांफ्रेस का मतलब बस इतना था कि घोटालों के बाद मनमोहन सिंह की चुप्पी को लेकर हो रहे सवालों के बीच उनकी दिन प्रतिदिन गिरती छवि को मीडिया के माध्यम से कुछ ढ़का जा सके। पूरी प्रेस कांफ्रेस का खाका भी इसी को केंद्र में रखकर खींचा गया था। मोदी के संबंध में तीखे बयान भी मनमोहन सिंह के मुंह से इसलिये दिलवाये गये क्योंकि कांग्रेस को पता था कि मीडिया उसे तत्काल लपक लेगी।

बाकी प्रेस कांफ्रेस की खानापूर्ति भी हो जायेगी और मोदी के उपर दिये गये प्रधानमंत्री के बयान पर दो-तीन दिन मीडिया में बहसें भी चल जायेंगी। कुल मिलाकर यह साबित हो जायेगा कि मनमोहन सिंह भी बेबाकी के साथ मीडिया में बोलते हैं।

बाकी जो आज मोदी के साक्षात्कार को फिक्स्ड और स्क्रिप्टेड बताते हुये अपने ब्लॉग के पेज भरते जा रहे हैं उन्हें शायद ही यह याद हो कि बतौर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की उस प्रेस कांफ्रेस में उनसे यह भी पूछा गया था कि क्या आप अपनी पत्नी की बात मानते हैं? क्या आप फिल्में देखते हैं? आपका फेवरेट क्रिकेट खिलाड़ी कौन है?

करोड़ों रुपये खर्च करके विज्ञान भवन में आयोजित हो रही उस प्रेस कांफ्रेस में लगातार दस सालों तक प्रधानमंत्री रहे मनमोहन सिंह से ऐसे सवाल पूछकर मूर्धन्य पत्रकार देश को क्या संदेश देना चाहते थे यह तो कोई विनोद दुआ टाइप पत्रकार या कोई पीपी (पेटिकोट पत्रकार) ही बता सकता है।

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