शेख हसीना से बहुत कुछ सीख सकते हैं मोदी

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना से भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बहुत कुछ सीखने को मिल सकता है। शेख हसीना बांग्लादेश को एक प्रगतिशील मुल्क के रूप में सामने लाने में सफल हुईं हैं।

भारत से जो चाहा… जीतने में सफल रही हैं। भारतीय रुपया मदद के रूप में मिला… भारतीय सरकारों के साथ नदी जल समझौतों में मनचाहा पानी पाया… भू-संधियों में भारत के एक बड़े शहर के बराबर ज़मीन उन्होंने हासिल कर ली…

कम से कम 10 करोड़ बांग्लादेशी भारत में प्रवेश करा कर बांग्लादेश को भुखमरी से बचाकर विकास के रास्ते पर ले आयी यह महिला! रोहिंग्याओं को मदद दी… मग़र इसके लिए धन भारत से लिया… यह है कूटनीति!

आप आश्चर्य करेंगे कि इटली, हंगरी, जर्मनी, इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और स्वीडन तक बांग्लादेशी फुटकर व्यापारियों के रूप में छा गये हैं… बांग्लादेश कमीज़, स्पोर्ट्स कैप और जूट निर्मित सामानों के निर्माण में वर्ल्ड लीडर बन चुका है…

अर्थव्यवस्था में बांग्लादेश भारत को टक्कर दे रहा है… रेस्टोरेंट और होटल व्यवसाय में बांग्लादेशी अमेरिका तक में भारतीयों को पछाड़ रहे हैं…

शेख हसीना ने उन सारे मिलिट्री जनरलों को सीखचों के पीछे पहुंचाया, कइयों को फांसी दिलाई… जो उनके पिता और परिवार की हत्या में शामिल थे। जमात-ए-इस्लामी बांग्लादेश के हेड को फांसी दे दी… जिसने पाकिस्तान की शह पर आर्मी जनरलों को मुजीब परिवार की हत्या के लिए उकसाया था।

शेख हसीना… मोदी की हमउम्र हैं… परंतु पाकिस्तान को हर बार उसी की बाड़ में घुसकर उन्होंने मार लगाई है… अंततः पाकिस्तान ने जेहादी मुल्लों को बांग्लादेशी धरती पर उतरने से रोक दिया…

शेख हसीना में इतनी अक्ल है कि यदि बांग्लादेशी कठमुल्लों को बांग्लादेशी हिंदुओं पर जुल्म करने से बांग्लादेश को कोई नुकसान नहीं है तो वह किसी आदर्शवाद के नाटक में नहीं पड़तीं हैं…

भारत से गैरकानूनी रूप से आयातित गौवंश को रोकने में उन्होंने कोई रुचि नहीं दिखाई क्योकि बांग्लादेश को इससे रोज़गार, भोजन और निर्यात के द्वारा विदेशी मुद्रा भी मिलती है।

दरअसल, शेख हसीना तीस्ता जल समझौते द्वारा तीस्ता नदी का पूरा पानी भी लेने में सफल हो जातीं… क्योंकि मोदी और सुषमा स्वराज इस समझौते के द्वारा शेख हसीना का दिल जीतने पर आमादा थे… अंतिम समय मे ममता बनर्जी ने मोदी, स्वराज और शेख हसीना की गलबहियों में विघ्न डाल दिया।

आज बांग्लादेशी शिक्षा और चिकित्सा व्यवस्था में व्यापक सुधार के बाद भी हज़ारों छात्र भारतीय कालेजों में ‘साफ्टा’ और ‘सार्क’ के तहत लगभग फ्री में पढ़ते है और हज़ारों बांग्लादेशी फ्री में भारत मे इलाज कराते हैं। यह है शेख हसीना की देन… बांग्लादेश को…

बरअक्स भारत में देखिए… 70 साल के चोर… ‘चौकीदार’ को ही खुलेआम चोर-चोर चिल्ला रहे हैं… इन चोरों ने न्यायालयों, कार्यपालिका और मशीनरी को आज भी अपने पंजो में जकड़ रखा है… एक भी भ्रष्टाचारी जेल नहीं भेजा जा सका।

मोदीजी लम्बी भाषणबाज़ी छोड़… शेख हसीना की कार्यशैली पर ध्यान देते तो शायद ‘सफल’ होते। कश्मीर ठिकाने आ जाता… 35A रद्दी की टोकरी में फेंक दिया होता। शेख हसीना ने तो बांग्लादेशी संविधान में आमूल-चूल परिवर्तन कर दिए… तदनुसार उन्होंने जैसा चाहा किया। भारत में मोदी ने संविधान को अल्लाह का कानून मान लिया गया है, जिसमे कोई परिवर्तन नहीं हो सकता…

संविधान को देश ने बनाया है… संविधान ने देश को नहीं! संविधान को पवित्र और अक्षुण्ण मानना बेहद बड़ी भूल है! शेख हसीना ने बताया है कि संविधान लगातार परिवर्तनीय है और समयानुसार इसमें परिवर्तन ज़रूरी है…

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