आखिर पीएम को ही क्यों आना पड़ा? सबसे बड़ी पार्टी के छुटभैए कहां हैं?

भाजपा की दुर्गति की कोई खास वजह नहीं है। आप अपने आसपास कोई भी सामान्य हिंदू परिवार उठाकर देख लीजिए, भाजपा के चरित्र का पैमाना आपको मिल जाएगा।

एक मध्यवर्गीय चरित्र, जो न पूरी तरह धूर्त है, न पूरी तरह ईमानदार। क्रिकेट में जब तक सचिन थे, टीम गायब थी क्योंकि सचिन तो है न…

भाजपा में फिलहाल (स्वर्गीय अटलजी के समय से ही) सेल्फीखींचू, कुर्सीतोड़क कार्यकर्ताओं की फौज है। ये जाहिल अधिक से अधिक फाइल ढोना और कुछेक हज़ार रुपयों का लेनदेन करना जानते हैं। इन्हें सत्ता को बनाए रखने और उसके पायों को मज़बूती देने से मतलब नहीं।

कोई मोदी या योगी आता है, इनके लिए झमाझम वोट बटोरता है और ये सत्ता की मलाई चाटने में व्यस्त हो जाते हैं। वैचारिकी और नैरेटिव्स से इनको सख्त कब्ज़ और परहेज़ है। आप ऐसी बातें करेंगे तो तुरंत वामपंथी खेमे में डाल दिए जा सकते हैं।

इनके हिसाब से सुबह में लाठी चलाना, तोंदियल भाईसाहबों और बहनजियों को नमस्ते करना, सेल्फी चिपकाना कहीं अधिक महत्वपूर्ण है, बनिस्बत एक आर्टिकल लिखने के, एक वेबसाइट चलाने के या एक यू-ट्यूब चैनल खोलने के…

साढ़े चार साल में जितने भी आरोप लगे, लगभग डेढ़ घंटे में पीएम ने सभी बातों पर अपनी सफाई दी, आक्रमण किया, जवाब दिया।

आखिर पीएम को ही क्यों आना पड़ा? सबसे बड़ी पार्टी के छुटभैए कहां हैं? वे हैं माल बटोरने में, ट्रांसफर-पोस्टिंग में, सेल्फी खींचने में या फिर किसी लड़की को भविष्य के सुनहरे सपने दिखाकर सोने में…

जीएसटी से लेकर रफाल या फिर नोटबंदी से लेकर सर्जिकल स्ट्राइक तक, हरेक वामपंथी-कांग्रेसी झूठ पर पीएम ने अपना पक्ष रख दिया है।

अब अगर भाजपाई मठाधीशों में तनिक भी बुद्धि है, तो इस इंटरव्यू के सैकड़ों छोटे-छोटे क्लिप्स बनाएं और उसे वायरल करें।

खानदानी चोरों के चमचों की तरफ से जैसी चुप्पी व्याप्त है, उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि मोदी ने यलगार कर दिया है और यह इंटरव्यू 2019 के युद्ध की शुरुआत है।

भाजपाई सूरमाओं को सीखना चाहिए सिख नरसंहार में आरोपित कमलनाथ से कि सत्ता कैसे चलती है… राहुल गांधी से कि अपने हिसाब से किसी को सत्ता कैसे सौंपी जाती है, भले ही वह कितना ही बड़ा आरोपित क्यों न हो…।

यहां तो पीएम को दिन रात भद्दी गालियां पड़ती हैं और रविशंकर प्रसाद से लेकर महान वकीलों की फौज से सज्जित भाजपाई वकीलों की इकाई खाट तोड़ रही है, एक चिंदीचोर तक को दस मुकदमों में परेशान नहीं कर पायी है…।

मैं जानता हूं कि यह बात नक्कारखाने में तूती की तरह है… फिर भी दिल है कि मानता नहीं…

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