आरडीएक्स का प्रयोग नहीं हुआ, तो ये आतंकी मामला ही नहीं!

इस बुधवार को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने दिल्ली और यूपी में ताबड़तोड़ 16 छापे मारे और 10 लोगों को गिरफ्तार किया। इन पर विदेशी ताकतों से संबंध रखने और भारत में आतंकी धमाके करने के मंसूबे पालने का आरोप है।

एनआइए द्वारा रिलीज़ फोटोज़ में एक ‘सुतली बम’ का पैकेट भी है जिसको लेकर देश की राजनीति में एनआईए की यह कहकर खिल्ली उड़ाई जा रही है कि “अब IS के इतने बुरे दिन आ गए कि उसके आतंकी सुतली बम लेकर धमाके करने चले हैं”…

देश के कथित बुद्धिजीवियों का यह प्रलाप देख मुझे गंभीर आश्चर्य होता है कि आखिर इन मूर्खों की बुद्धि और सोच का स्तर क्या है?

सुतली बम अथवा पटाखे मुख्यतः पोटैशियम नाइट्रेट, अमोनियम नाइट्रेट से बने होते हैं, जो बेहद ज्वलनशील और खतरनाक होते हैं और आतंकवादी इन दोनों यौगिकों का प्रयोग धड़ल्ले से करते रहते हैं।

अधिक मात्रा में इन यौगिकों को मिलाइये। साथ में छर्रे, कीले, किरचें आदि मिलाइए। जान-माल को गंभीर हानि पहुंचाने लायक बम तैयार हो जाएगा। इस बम को पाइप, प्रेशर कुकर आदि में भरिये, इसकी विनाशक क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी।

पता नहीं इन बुद्धिजीवियों ने किस ट्रेनिंग में यह पढ़ा है कि बम का अर्थ सिर्फ आरडीएक्स होता है? पटाखों, रासायनिक उर्वरकों से इन खतरनाक यौगिकों के आसानी से प्राप्त होने के कारण इस प्रकार के बम आजकल दुनिया भर के आतंकवादियों के लिए पहली पसंद बन गए हैं।

यह पहली बार नहीं है कि पटाखे की सामग्री से बम बनाने की कोशिश की गई हो।

2016 में हैदराबाद में 11 IS संदिग्ध पटाखों की सामग्री से 70 मीटर की परिधि में तबाही फैलाने वाले बम का सफल परीक्षण गिरफ्तारी से पूर्व ही कर चुके थे। 2016 में बिहार में रेलवे ट्रैक पर पाया गया प्रेशर कुकर बम पटाखों की सामग्री से बना था।

2010 में न्यू यॉर्क के टाइम्स स्क्वायर में गाड़ी की डिक्की में मिला शक्तिशाली बम पटाखों की सामग्री पर आधारित था। दुनिया भर में ना जाने कितने उदाहरण भरे पड़े हैं।

आप पटाखे, फ़र्टिलाइज़र, ब्लीच को लेकर प्लेन, मेट्रो में सफर नहीं कर सकते। हर देश की सिक्योरिटी सर्विस ने अपनी वेबसाइट पर पटाखों, उर्वरकों, ब्लीच, सेनेटाइज़र इत्यादि दर्जनों घरेलू चीजों को ‘बम निर्माण सामग्री’ के रूप में चिह्नित कर रखा है और आप NIA जैसी एजेंसी की बुद्धि पर सवाल उठाते हुए सोशल मीडिया पर आतंक को डिफेंड कर रहे हैं? बेहद शर्मनाक बात है।

इन दस आरोपियों के पास 25 किलो पोटेशियम और अमोनियम पाउडर बरामद हुआ है जो कम से कम 25 बेहद खतरनाक बम बनाने के लिए पर्याप्त है। हो सकता है कि यह सामग्री उन्होंने बड़े पैमाने पर पटाखों से प्राप्त की हो या फिर पटाखों को इसलिए रखा हो ताकि किसी घटना में फंसने पर खुद को पटाखा व्यापारी बता सकें।

बदलते युग में इस्लामिक आतंकवाद, आतंक फैलाने के नये तरीकों के साथ मानवता को चुनौती दे रहा है। पिछले कुछ वर्षों में इस्लामिक स्टेट ने वक्तव्य जारी कर अपरंपरागत तरीकों से आतंक फैलाने के लिए मुस्लिम युवाओं का आव्हान किया है।

उनका कहना है कि अगर बम न मिले तो ट्रक और कार काफिरों पर चढ़ा दो और उसके बाद बार्सिलोना, ग्लास्गो, फ्रांस, लंदन, अमेरिका में ट्रक जिहाद हुई। आप रेलवे ड्राइवर हैं तो ट्रेन के ब्रेक फ़ेल कर दीजिए। फल विक्रेता हैं तो इंजेक्शन द्वारा फलों में जहर भरकर बेंच दीजिए। होटल में शेफ हैं तो खाने में ज़हर मिला दीजिए।

कुम्भ के मेले में एक सुतली बम भी भगदड़ और हजारों मौतों का कारण बन सकता है। 2001 में आतंकवादियों ने प्लेन हाइजैक करके ट्रेड सेंटर की इमारतें गिरा दी। देश के बुद्धिजीवियों की मानें तो ये आतंकवादी घटनाएं थी ही नहीं, क्योंकि आरडीएक्स का प्रयोग तो हुआ ही नहीं?

आतंक फैलाने के लिए और निर्दोषों की जान लेने के लिए आरडीएक्स नहीं बल्कि पाशविक ‘नीयत’ चाहिए। नरसंहार के साधन दुनिया में बिखरे हुए पड़े हैं।

वर्तमान सरकार से लाख मतभेदों के बावजूद यह बात उल्लेखनीय है कि बीते 4 वर्षों में देश का आंतरिक सुरक्षा तंत्र मज़बूत हुआ है अन्यथा यह संभव है कि इतने वर्षों में देश के भीतर एक भी बम नहीं फूटा जबकि कथित तौर पर आतंकियों की घृणा का एक पात्र देश के प्रधानमंत्री पद पर आसीन है?

एनआईए सही है या गलत, यह देखने के लिए न्यायपालिका है। देश के विपक्ष को राजनीतिक रोटियां सेंकने के चक्कर में देश के सुरक्षा तंत्र पर सवाल उठाने से बचना चाहिए।

अन्यथा यह देश विरोधी रवैया उन्हें अगले 50 सालों तक सत्ता में नहीं आने देगा।

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