ईसा मसीह के संबंध में ज्योतिषीय दृष्टिकोण

जन्म समय के आधार पर बनी जन्म कुंडली के आधार पर व्यक्ति के जीवन में घटने वाली घटनाओं को जाना जाता है। तो किसी व्यक्ति के जीवन में घटी घटनाओं के आधार पर जन्म कुंडली बना कर उसका वास्तविक जन्म समय तिथि भी जानी जा सकती है।

ईसा मसीह के जीवन की घटनाओं के आधार पर ग्रहयोगों को जानकर उनकी वास्तविक जन्म तिथि भी जानी जा सकती है।

ईसा के जीवन की प्रमुख घटनाएं

1-यीशु का जन्म पशु शाला में हुआ।

2-जन्म के बाद जन्म स्थान से दूर जाना पड़ा।

3-दस वर्ष की आयु में मंदिर में विद्वानों से ज्ञान चर्चा की।अर्थात यीशु बचपन से कुशाग्र बुद्धि के थे।

4-तेरह से तीस वर्ष का समय अज्ञात है। यह समय 17 वर्ष बुध की महादशा का मान है।

5- यीशु तात्कालिक देश धर्म के प्रति विद्रोही विचार वाले थे।

6-यीशु को शूली का दंड भोगना पड़ा।

7- यीशु के जन्म का पूर्वानुमान ज्योतिषियों को हो गया था। तभी तो पूर्व के देशों से ज्योतिषी येरुशलम गये। और वहाँ उन्होंने ने लोगों से पूछा कि यहूदियों के राजा का जन्म हुआ है वह कहाँ है?? ज्योतिषियों ने यीशु को खोज लिया था, तथा जोसेफ को सलाह दी थी कि यीशु को लेकर अज्ञात जगह चले जायें। जोसेफ यीशु को लेकर मिश्र चले गये थे। जिससे परेशान हो कर राजा हेरोद ने तत्कालीन जन्म लेने बच्चों को मरवा दिया था।
उक्त कथा के अनुसार यीशु महापुरुष योग में जन्मे होंगे।

1-तीन ग्रह नीचराशि में या नीच नवांश में हों तो जातक का जन्म घास या पुवाल के बिछौने में होता है।
लग्न में शनि हो और उसे शुक्र या सूर्य देखता हो तो जातक का जन्म पशु शाला या देवस्थान में होता है।

मिथुन, तुला, कन्या, पूर्वार्ध धनु, कुम्भ राशि में लग्न हो, लग्न में शनि हो, या लग्नेश शनि हो सूर्य से देखा जाता हो, तो जातक का जन्म देवस्थान या गौशाला में होता है।

2-तनुगो भास्करो यस्य द्वितीस्थो निशाकरः।
शूलिका भवेत्तस्य मृत्युरेव न संशयः।।
लग्न में सूर्य द्वितीय भाव में चंद्र हो तो उस जातक की शूली से मृत्यु होती है।
लग्न से चौथे स्थान में मंगल अथवा सूर्य हो, दसम भाव में शनि हो तो व्यक्ति शूल से छेदा जाता है।
लग्न में क्षीण चंद्र हो, पंचम नवम भाव में क्रूर पापग्रह हों तो जातक शूल से छेदा जाता है।
चौथे सूर्य दसवें मंगल हो शनि से दृष्ट हो तो शूली से मृत्यु का योग बनता है।

3-पितृ परोक्ष ज्ञानं -लग्न को चंद्रमा न देखता हो।

बुध शुक्र के मध्य चंद्र हो। लग्न में शनि चंद्र न देखता हो। सप्तम भाव में मंगल हो और लग्न को चंद्र न देखता हो तो जातक का पिता जातक के जन्म स्थान से दूर होता है।


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