इस देश के साथ किया सबसे बड़ा घात है सेकुलरिज़्म

हिंदुत्व कैसे बचा रहा? 1200 वर्षों के भीषण आक्रमणों को झेलकर भी, करोड़ों का कत्ल, बलात्कार और धर्म-परिवर्तन जैसे घाव अपने शरीर पर लेकर भी सनातन की आत्मा कैसे जिंदा है, भारत कैसे अविचल है?

…क्योंकि यह धर्मप्राण था।

आधुनिक युग में आक्रमण के हथियार भी बदल गए हैं। दुनिया की सबसे हिंसक राजनीतिक विचारधाराओं मुहम्मदवाद और ईसाइयत ने भी चोला बदला है, समय के साथ।

जब तक प्रत्यक्ष आक्रमण करना था, उन्होंन खूंरेजी की, कत्लोगारत किया, फ्रांसिस और ज़ेवियर ने, बेग और चिश्ती जैसों ने लाखों हिंदुओं को ज़मींदोज़ किया, लाखों को धर्मांतरित किया।

…चोला बदला, तो फ्रांसिस और ज़ेवियर जैसे हत्यारे संत हो गए, जिनके नाम पर चल रहे स्कूल में अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए हिंदू मरे जा रहे हैं, औरंगज़ेब सेकुलर हो गया, अकबर महान हो गया, हमारे पूरे इतिहास की धारा पलट दी गयी और हम खुद को ही भूल गए।

‘दुर्घटनावश हिंदू’ जवाहरलाल से लेकर खांटी ईसाई सोनिया तक के प्रधानमंत्रित्व काल में (सच हम सभी जानते हैं, डॉक्टर साब तो महज स्टैंप थे) कांग्रेसी-वामपंथी युति ने इस झूठ को खूब परोसा और बुलंद किया है।

तभी तो चोल, चेदि, पांड्य, गुप्त, मौर्य आदि साम्राज्यों के बारे में हमें कुछ नहीं बताया जाता, इतिहास की किताबों में सफे पर इनको जगह दी जाती है, जबकि ढाई सौ वर्षों मात्र के मुगलिया सल्तनत को (जो समलैंगिकों, हत्यारों, क्रूरताओं और जघन्यता मात्र का सिलसिला है) मध्यकाल के नाम पर ऐसा रटवाया जाता है कि हम अश-अश कर उठते हैं।

उनका एजेंडा साफ है। एकमात्र हिंदू राष्ट्र को विच्छिन्न करने के लिए चौतरफा हमला हो रहा है। आपको सेकुलर बनाकर आपकी जड़ों से विमुख पहले ही कर दिया गया है। कभी आप लाल टोपी पहनकर सैंटा बनते हैं, कभी मज़ार पर चादर उढ़ाते हैं, तो कभी उर्स में कव्वाली सुनकर लहालोट होते हैं…।

धर्म ही इस देश के प्राण हैं… ये धर्मनिरपेक्षता क्या चिड़िया है?

इस देश की रग-रग में राम हैं, कण-कण में कृष्ण हैं, मुहम्मद या जीसस नहीं। वो आए, मारकाट से बसे, ठीक है। हम इतिहास को बदल नहीं सकते, 20 करोड़ को फेंक नहीं सकते (हालांकि उन्होंने तो फेंक दिया, पांच करोड़ को) लेकिन अपने इतिहास को गंगा-जमनी तहज़ीब के नाम पर बदल भी तो नहीं सकते, प्लीज…..!!

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