विचार-विमर्श के लिए कुछ प्रश्न और कुछ खरी-खरी

कई बार लेखों में संकेतों के द्वारा समझाने पर भी मित्र लोग हुक्का-पानी लेकर SC एक्ट, मोदी सरकार की दलितों और अल्पसंख्यक इत्यादि की राजनीति को लेकर चढ़ जाते हैं।

अतः मेरी भी अब खरी-खरी सुनिए। शायद समझ में आ जाए।

बिना दलितों के समर्थन के आप मिशनरी और इंडिया ब्रेकिंग फोर्सेस के एजेंडे को कैसे तोड़ेंगे? 20% समुदाय विशेष और रोम से प्रेरणा लेने वालों का वोट आपको नहीं मिलना। इसके बाद 15-16% दलित से भी आप नाराज़ है। कुल मिलाकर हो गए 35% लोग।

फिर 25-30 प्रतिशत लोग वोट नहीं देते और इनमें अधिकतर भाजपा समर्थक सवर्ण और मध्यम वर्ग के मतदाता हैं। बचे 55% (क्योंकि समुदाय विशेष और दलित वोटर के भी कुछ लोग वोट नहीं डाल पाते)। इसमें भी बहुत से लोग तथाकथित जनजाति, पिछड़े और अगड़े अपनी जाति के नेतृत्व वाली पार्टी को वोट दे देंगे।

फिर, कुछ भाजपा समर्थक विद्रोही कैंडिडेट को वोट दे देंगे। भाजपा चाहे किसी को भी चुनाव का टिकट दे दे, कुछ मतदाताओं की समझ में कोई अन्य कैंडिडेट बेहतर है और वे उस विद्रोही कैंडिडेट को वोट डाल देंगे। ऐसे लोग हुए 10 प्रतिशत।

अब अगर आप दलितों से नाराज़गी बनाये रखेंगे और कांग्रेस की चालों में फंस जाएंगे, तो आपको 35 प्रतिशत मतदाता के वोट के लिए लड़ना होगा और इन्ही मतदाता के बूते पर बहुमत पाना होगा।

और फिर, हम इस 35 प्रतिशत में नोटावीरों को कैसे भूल सकते हैं। विश्वास कीजिये, सभी के सभी नोटावीर भाजपा समर्थक हैं।

और फिर, वे दलित जो अभी भी सनातन धर्म से जुड़े हैं, उनमे से कुछ लोग जब विदेशी प्रभाव में धर्म परिवर्तन करते हैं, हमारे आराध्य देव और देवियों का अपमान करते हैं, तब आपको क्यों बुरा लगता है? आपने उन्हें सनातन धर्म में बने रहने के लिए क्या प्रयास किया? प्रयास तो छोड़िये, आप उन्हें और उनके नेतृत्व को भला-बुरा कहते है।

क्या आप को लगता है कि इन 32-35 प्रतिशत वोट के आधार पर आप अपनी राष्ट्रवादी सरकार बनवा पाएंगे?

आपको चाहिए 35A से निवारण, 370 से मुक्ति, समान नागरिक संहिता, SC एक्ट से छुटकारा? है ना….!

लेकिन आपकी रणनीति क्या है?

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