जन्म का कारण और जन्मदाता का परिचय क्यों नहीं बताती काँग्रेस?

आज काँग्रेस का जन्मदिन है। लेकिन उसका जन्म क्यों हुआ था। उसके जन्मदाता का परिचय क्या था? अपना यह इतिहास कभी क्यों नहीं बताती काँग्रेस?

लेकिन काँग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे लाला लाजपतराय जी ने काँग्रेस के जन्म के 31 वर्ष बाद 1916 में प्रकाशित हुई अपनी किताब ‘युवा भारत’ में बाकायदा पूरा अध्याय लिखकर बताया है कि काँग्रेस का जन्म क्यों हुआ था।

अपनी पुस्तक ‘युवा भारत’ के पृष्ठ 98 में लाला लाजपतराय जी ने ‘काँग्रेस की स्थापना साम्राज्य हितों के लिए थी’ उपशीर्षक से लिखा है कि “यह तो स्पष्ट है कि उस समय काँग्रेस की स्थापना आने वाले खतरों से ब्रिटिश साम्राज्य को बचाने के लिए ही की गयी थी, न कि भारत को स्वतंत्रता दिलाने के लिए। उस समय ब्रिटिश राज्य की सुरक्षा का सवाल ही मुख्य था और भारत के हित गौण थे। इससे भी कोई इनकार नहीं करेगा कि काँग्रेस अपने उस समय के आदर्श के अनुकूल ही चलती रही। यह कथन नितान्त न्याययुक्त तथा तर्कसंगत है कि काँग्रेस के संस्थापक यह जानते थे कि भारत में ब्रिटिश शासन का चलते रहना अत्यन्त आवश्यक है, और इसीलिए उनकी चेष्टा थी कि यथा-शक्ति किसी भी आगन्तुक विपत्ति से ब्रिटिश शासन की न केवल रक्षा की जाए, अपितु उसे और मज़बूत बनाया जाए। उनकी दृष्टि में देशवासियों की राजनैतिक मांगों की पूर्ति तथा भारत की राजनैतिक प्रगति गौण थीं।”

अपनी इसी पुस्तक के पृष्ठ 111 पर लाला लाजपतराय ने यह भी लिखा है कि “यह आन्दोलन न तो जनता की प्रेरणा से आरम्भ किया गया और न इसकी योजना उसने बनाई। सच तो यह है कि इसके पीछे भारतवासियों की आन्तरिक प्रेरणा थी ही नहीं। भारत के लोगों के किसी भाग ने इस आन्दोलन के साथ खुद को पूरे तौर पर नहीं जोड़ा जिससे उसे यह भरोसा हो जाता है कि इस आन्दोलन के सुचारु संचालन के साथ उसका अस्तित्व ही जुड़ा हुआ है। यह आन्दोलन एक अंग्रेज़ वायसराय की सलाह से एक अंग्रेज़ द्वारा शुरू किया गया। इसका नेतृत्व करने वाले वो लोग थे जो या तो सरकारी नौकरियों में थे अथवा इन सेवाओं के साथ किसी भी रूप में सम्बद्ध थे, अथवा उन्हीं के लिए ऐसे अवसर सरकार द्वारा बनाये गए थे। इनमें से अनेक लोग सरकारी नौकरियों में प्रवेश पाना चाहते थे, अथवा सरकार से अपने महत्व या अपनी सार्वजनिक भावना को मनवाना चाहते थे।”

काँग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे लाला लाजपत राय द्वारा अपनी कलम से लिखी गयी काँग्रेस के जन्म की उपरोक्त कहानी के पश्चात अब यह भी जान लीजिये कि काँग्रेस के जन्मदाता अंग्रेज़ अफसर का नाम ए ओ ह्यूम था और 1885 में इसी अंग्रेज़ अफसर ने काँग्रेस की स्थापना की थी।

काँग्रेस की स्थापना करने से पहले ये अंग्रेज़ अफसर ए ओ ह्यूम भारत में अंग्रेजों की फौज में उसके ख़ुफ़िया विभाग का मुखिया (चीफ) था। 1857 में देश की आज़ादी की पहली लड़ाई में इसने अपनी गुप्तचरी से हज़ारों क्रांतिकारियों को मौत के घाट उतार दिया था। परिणामस्वरूप अंग्रेज़ सरकार ने इस अंग्रेज़ अफसर को इटावा का कलेक्टर बनाकर पुरुस्कृत किया था।

इटावा में इसने दो दर्जन से अधिक विद्रोही किसान क्रांतिकारियों को कोतवाली में ज़िंदा जलवा दिया था। परिणामस्वरूप सैकड़ों गाँवों में विद्रोह का दावानल धधक उठा था। इस अंग्रेज़ अफसर के खून के प्यासे हो उठे हज़ारों किसानों ने इस अंग्रेज़ अफसर का घर और ऑफिस घेर लिया था।

उन किसानों से अपनी जान बचाने के लिए यह अंग्रेज़ अफसर पेटीकोट साड़ी ब्लाउज़ और चूड़ी पहनकर, सिर में सिन्दूर और माथे पर बिंदिया लगाकर एक हिजड़े के भेष में इटावा से भागकर आगरा छावनी पहुंचा था।

हज़ारों भारतीय क्रांतिकारियों की हत्या के जिम्मेदार इस अंग्रेज़ अफसर ने काँग्रेस की स्थापना क्यों की थी? इस सवाल का जवाब लेख की शुरूआत में दे ही दिया है।

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